विशेषत: भारत में तुलसी के पौधे को पवित्र पौधा माना जाता है। इसलिए यहाँ पर Tulsi Farming व्यापार शुरू करना बेहद लाभकारी हो सकता है। वैसे देखा जाय तो सिर्फ भारत में ही नहीं अपितु विश्व के अन्य देशों में भी तुलसी की खेती करना बेहद लाभदायक व्यापार बन सकता है । क्योंकि यह सुगन्धित प्रदान करने वाला एक औषधीय पौधा है।

भारत में Tulsi Farming के अतिरिक्त फायदे यह हैं की यहाँ इनके पत्तों को कई धार्मिक गतिविधयों में इस्तेमाल में लाया जाता है। तुलसी के पत्तों में एक विशेष प्रकार का वाष्पशील तेल पाया जाता है, जो कई प्रकार के कीटों और बैक्टीरिया के खिलाफ कारगर साबित होता है। चूँकि तुलसी के तेल की भी डिमांड विश्व स्तर के बाज़ारों में काफी अधिक है, इसलिए भी Tulsi Farming Business शुरू करना लाभकारी हो सकता है ।

दुनिया के कई देशों में मुख्यत: भारत में कमर्शियल Tulsi Farming धीरे धीरे लोकप्रिय हो रही है। आयुर्वेद की दृष्टी से तुलसी एक बेहद उपयोगी पौधा होता है। क्योंकि आयुर्वेद और सिद्ध प्रेक्टिस में इसका इस्तेमाल अनेकों बीमारियों के ईलाज करने में किया जाता है।

अनाज में कीड़ा न लगे इसके लिए सदियों से तुलसी के सूखे पत्तों को अनाज के साथ मिलाया जाता है। यह लैमियासी परिवार का बारहमासी सुगन्धित पौधा है। इसका मूल उद्गम भारतीय महाद्वीप को ही माना जाता है। और Tulsi Farming दक्षिण पूर्व एशियाई उष्णकटिबंधीय जलवायु  के लिए उपयुक्त है।

tulsi farming kaise shuru kare

व्यवसायिक तौर पर तुलसी की खेती धार्मिक और चिकित्सकीय उद्देश्यों की पूर्ति के अलावा तुलसी का तेल बनाने के लिए भी की जाती है। और तुलसी का इस्तेमाल हर्बल चाय बनाने में भी किया जाता है। भारत में Tulsi Farming करना कोई चुनौतीपूर्ण कार्य नहीं है, बल्कि तुलसी की खेती करना बहुत ही आसान है। वह इसलिए क्योंकि तुलसी के पौधे किसी भी मिटटी में आसानी से उगाए जा सकते हैं। तुलसी की मांग भी ठीक है, लेकिन धीरे धीरे यह और अधिक बढ़ रही है।

ऐसे में कोई भी ऐसा व्यक्ति जो उद्यमी बनने की ओर अग्रसित हो, उसके लिए Tulsi Farming Business शुरू करना काफी लाभकारी साबित हो सकता है।

  तुलसी के औषधीय गुण

तुलसी में कई औषधीय गुण होते हैं, इनमें से कुछ की लिस्ट इस प्रकार से है।

  1. विशेष तौर पर जब तुलसी के तेल और अर्क का इस्तेमाल किया जाता है, तो इनमें एंटीऑक्सीडेंट बहुत अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।
  2. तुलसी यादाश्त को तेज करने में कारगर मानी जाती है।
  3. यह बुखार, खाँसी, सर्दी जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों को ठीक करने में मददगार साबित हो सकती है।
  4. एक्सपेक्टोरेंट और कफ सिरप बनाने में तुलसी का इस्तेमाल बेहद महत्वपूर्ण है, यह कोलेस्ट्राल को कम करने में मदद करती है। और अस्थमा एवं ब्रोंकाइटिस में बलगम को भी दूर करने में मदद करती है।
  5. तुलसी का अर्क आँखों के दर्द और रतौंधी के लिए अच्छा माना जाता है।
  6. यह त्वचा रोगों जैसे ल्यूकोडर्मा इत्यादि को भी ठीक करने में सहायक होती है।

Tulsi Farming Business के लाभ

कृषि और फार्मिंग से सम्बंधित व्यवसायों को शुरू करने के कई फायदे होते हैं, इसलिए Tulsi Farming Business शुरू करने के भी कई फायदे हैं, जिनकी लिस्ट इस प्रकार से है।

  1. व्यवसायिक रूप से यह एक अलग प्रका का व्यवसाय है, और यह धीरे धीरे प्रचलित होता जा रह है।
  2. चूँकि तुलसी में औषधीय गुण विद्यमान होते हैं, इसलिए इसके उत्पादों की देश और विदेशी बाज़ारों में अच्छी मांग है। और समय के साथ धीरे धीरे यह और बढ़ रही है।
  3. तुलसी के पौधों के बीमार होने की आशंका कम होती है क्योंकि ये आम तौर पर मजबूत और कठोर होते हैं। इसलिए फसल बर्बाद होने का जोखिम कम होता है।
  4. Tulsi Farming में तुलसी का रोपण, बुवाई अन्य की तुलना में कम है, और रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट बहुत अच्छा है। उद्यमी को बिजनेस स्थापित करने में लगाया पैसा कम समय में ही वापिस हो जाता है।
  5. तुलसी के पौधों से दो उत्पाद पत्ते और बीज प्राप्त होते हैं, इसलिए व्यवसायिक रूप से इसकी खेती करना बेहद लाभकारी हो सकता है।
  6. उद्यमी Tulsi Farming भारत के किसी भी कोने से शुरू कर सकता है, क्योंकि यह हर तरह की मिटटी में आसानी से उग जाती है।
  7. बेरोजगार शिक्षित लोगों के लिए तुलसी की खेती रोजगार का एक बेहतरीन साधन हो सकती है।
  8. तुलसी का पूरा का पूरा पौधा ही औषधीय गुणों से भरपूर होता है, इसलिए इसे कई तरह से इस्तेमाल में लाया जा सकता है।
  9. Tulsi Farming पर्यावरण को दूषित होने से बचाने में भी मददगार साबित होती है, क्योंकि तुलसी के पौधे वायु को शुद्ध करते हैं और आक्सीजन प्रदान करते हैं।    

तुलसी की खेती शुरू करने में ध्यान देने योग्य बातें

व्यवसायिक तौर पर तुलसी की खेती यानिकी Tulsi Farming शुरू करने के लिए उद्यमी को निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखने की आवश्यकता हो सकती है।

  1. तुलसी की खेती करने से पहले आपको मार्किट रिसर्च करनी चाहिए। मार्किट रिसर्च में कई बातों जैसे बीज कहाँ से मिलेगा, उत्पादित उत्पाद कहाँ बेचा जाएगा, कौन सी किस्म की तुलसी उस क्षेत्र विशेष में होगी। इत्यादि सवालों के जवाब ढूंढें जाने आवश्यक है।
  2. उन कंपनियों का पता करें जो तुलसी खरीदने के लिए आपसे गठजोड़ कर सकते हैं। उपयुक्त कंपनी मिलने पर उससे गठजोड़ करें।
  3. जहाँ आप Tulsi Farming शुरू करना चाह रहे हैं, उस क्षेत्र विशेष की कृषि जलवायु के अनुसार ही तुलसी की किस्म का चुनाव करें।
  4. आपकी योजना जितनी भी जमीन में तुलसी की खेती करने की है उसी के अनुसार उसमें आने वाली लागत का आकलन कर लें ।
  5. जिस भूमि पर आप Tulsi Farming करने की सोच रहे हैं, उस भूमि की मिटटी की जाँच कराएँ, और उस मिटटी के लिए कौन कौन से पोषक तत्व जरुरी हो सकते हैं, उसकी भी योजना बनाएँ।
  6. ध्यान रहे तुलसी की खेती करने के लिए आपके पास पौंधों की सुरक्षा और उनकी सिंचाई की उचित व्यवस्था का होना नितांत आवश्यक है ।      

तुलसी की खेती कैसे शुरू करें (How to Start Tulsi Farming in Hindi):

Tulsi Farming शुरू करने से पहले उपर्युक्त बताई गई बातों का ध्यान अवश्य रखें, और फिर जिस तरह से कोई अन्य फसल की खेती शुरू की जाती है। तुलसी की खेती भी उसी ढंग से शुरू की जा सकती है । जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की, तुलसी के पौंधे मजबूत होते हैं, इनमें बीमारियों का खतरा कम होता है। इनकी प्रगति आम तौर पर अच्छी होती है। तो आइये जानते हैं की कोई इच्छुक व्यक्ति Tulsi Farming Business कैसे शुरू कर सकता है।

1. उचित मिटटी वाली लोकेशन का चुनाव करें

हालांकि तुलसी के पौधे हर तरह की मिटटी में आसानी से उग जाते हैं लेकिन इसके बावजूद भी Tulsi Farming के लिए उच्च जैविक सामग्री से युक्त और अधिक उपजाऊ वाली मिटटी की आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा उस जगह पर जल निकासी की भी उचित व्यवस्था होनी चाहिए।

ऐसी मिटटी जिसका pH स्तर 4.3 से 8.2 के बीच हो तुलसी की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। दोमट मिटटी, लेट्राईट, लवणीय, क्षारीय इत्यादि सभी प्रकार की मिटटी तुलसी के पौधों को उगाने के लिए अच्छी मानी जाती है।   

2. भूमि को तैयार करें

भूमि की तैयारी से आशय Tulsi Farming के लिए मिटटी की जुताई, जल निकासी की व्यवस्था इत्यादि से लगाया जा सकता है । जिस मिटटी में जल निकासी की उचित व्यवस्था होती है वहां पर तुलसी के पौधों की प्रगति अच्छी होती है। भूमि की तैयारी करते समय मिटटी की कई बार जुताई की जानी चाहिए और उस मिटटी में जैविक खाद भी अच्छी तरह से मिला लेनी चाहिए।

3. तुलसी फार्मिंग के लिए आवश्यक जलवायु

तुलसी के पौधे उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की जलवायु के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं, यह गरम जलवायु में सही से विकसित हो सकते हैं। तुलसी के बीजों के सफल अंकुरण के लिए 20˚C तापमान की जरुरत हो सकती है। इसके अलावा पौधों के बढ़ने के दौरान 7˚C से 27˚C तापमान की आवश्यकता हो सकती है।

Tulsi Farming वैसे तो कहीं भी की जा सकती है लेकिन इसके पौधें ठंडी जलवायु के लिए अति संवेदनशील होती हैं। यद्यपि ठंडे और छायादार जलवायु में भी तुलसी के पौधों को उगाया तो जा सकता है, लेकिन इनकी पत्तियों में तेल की मात्रा बहुत कम होती है। पौधों को समय समय पर पानी की आवश्यकता होती है।      

4. तुलसी की किस्म का चुनाव करें

यद्यपि Tulsi Farming Business शुरू करने के लिए तुलसी की कई किस्में मौजूद हैं, लेकिन भारत और नेपाल में तीन किस्म राम तुलसी, कृष्ण तुलसी और वन तुलसी का उत्पादन किया जाता है। तुलसी के इन तीन किस्मों में राम तुलसी की पत्ते चौड़े और चमकीले होते हैं। और इनका स्वाद थोड़ा मीठा होता है, जबकि कृष्ण तुलसी के पत्ते बैंगनी रंग के होते हैं।

व्यवसायिक रूप से अच्छी किस्मों में कृष्णा तुलसी, राम तुलसी, द्रुद्रिहा तुलसी, बाबी तुलसी, अमृता तुलसी, तुकश्मिया तुलसी, कपूर तुलसी और वाना तुलसी इत्यादि शामिल हैं। उद्यमी अपने क्षेत्र में व्यापत माँग और कीमत के आधार पर इनमें से किसी भी किस्म की तुलसी का चुनाव Tulsi Farming के लिए कर सकता है।

5. पौधे उगाएँ या खरीदें

Tulsi Farming शुरू करने के लिए उद्यमी को तुलसी के पौधों की आवश्यकता होती है। वह इन पौधों को या तो खुद उगा सकता है, या फिर नर्सरी से पौधों को खरीद भी सकता है। यदि आप चाहते हैं की आप स्वयं ही तुलसी के पौधे उगाएँ तो आपको क्यारी तैयार करके उनमें बीज को बोना होगा।

आप किसी भी आकार की क्यारियां तैयार कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे की बीज के साथ जैविक खाद इत्यादि भी डालनी होगी । और बीज बोने के बाद क्यारियों के ऊपर पुआल, सूखी घास इत्यादि से इन्हें ढकना भी होगा।    

6. पौधों का रोपण करें

पौधों का रोपण तब शुरू किया जाता है जब पौधे रोपने के लिए तैयार हो जाएँ। आम तौर पर बीज बो लेने के 15-20 दिनों बाद पौंधे रोपने के लिए तैयार हो जाते हैं। लेकिन उद्यमी को पौंधों को रोपने से पहले भूमि को अच्छी तरह से तैयार करना होगा, जैविक सामग्री इत्यादि डालकर मिटटी को तैयार करना होगा। आम तौर पर रोपाई अप्रेल के मध्य में की जाती है।

रोपाई करने से पहले जिसमें पौंधे लगे हों उन क्यारियों को अच्छी तरह से पानी देने की आवश्यकता हो सकती ह, ताकि पौधों को जड़ से अच्छी तरह उखाड़ा जा सके। Tulsi Farming में पौंधों को मुख्य खेत में रोपने के बाद तुरंत पानी भी देना चाहिए, ताकि पौंधे सूखे नहीं।        

7. देखभाल और खाद दें

हालांकि तुलसी के पौंधे मजबूत और कठोर होते हैं, इसलिए उन्हें अन्य की तुलना में कम देखभाल की आवश्यकता होती है । लेकिन यदि उद्यमी अपने Tulsi Farming Business को सफल बनाना चाहता है, तो उसे अच्छा उत्पादन और अधिक उपज प्राप्त करने के लिए पौधों की अच्छी देखभाल तो करनी ही होगी। देखभाल के लिए निम्न बातों का ध्यान रखा जा सकता है। 

  1. पौधों को पर्याप्त उर्वरक प्रदान करें, जितना हो सके जैविक खाद जैसे सड़ा हुआ गोबर इत्यादि का इस्तेमाल अधिक करें।
  2. बरसात के मौसम में तुलसी की खेती के लिए सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन गर्मियों में हर हफ्ते या फिर महीने में 3 बार सिंचाई की जा सकती है।
  3. मल्चिंग के माध्यम से मिटटी में नमी बनाये रखी जा सकती है, मल्चिंग बनाने के लिए जैविक सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  4. तुलसी के पौंधों से खरपतवारों को दूर करना भी बेहद आवश्यक है, इस प्रक्रिया को निराई कहा जाता है। खरपतवार पौंधों को नुकसान न पहुँचाएँ, इसके लिए उन्हें निराई करके खेत से दूर किया जाना आवश्यक है। 

Tulsi Farming Business शुरू कर रहे उद्यमी को समझना चाहिए, की तुलसी एक तेजी से बढ़ने वाला पौधा है। और आम तौर पर इसके रोपण के लगभग तीन महीने बाद यह फसल तैयार हो जाती है।  उद्यमी को चाहिए की वह तुलसी की खेती शुरू करने से पहले किसी कंपनी या खरीदार से गठजोड़ कर ले। ताकि उसे फसल तैयार होने के बाद ग्राहकों को ढूँढने के लिए ईधर उधर भटकना न पड़े।

यदि कोई उद्यमी कम्पनियों या खरीदार के साथ पहले ही गठजोड़ करके Tulsi Farming शुरू करता है। तो वह इस व्यवसाय से भी अच्छा लाभ कमा सकता है।

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