Toilet Paper से आप सभी अच्छी तरह से अवगत होंगे क्योंकि इनका इस्तेमाल दीर्घ शंका से निवृत्त होने के बाद गुदा या उसके आस पास के एरिया की सफाई करने के लिए किया जाता है। हालांकि भारत में आज भी एक बड़ी आबादी द्वारा इस तरह की सफाई के लिए केवल पानी का ही इस्तेमाल किया जाता है। जबकि उच्च आय वर्ग और ऑफिस इत्यादि में उपलब्ध टॉयलेट दोनों तरह के विकल्प पानी और Toilet Paper का इस्तेमाल करते हुए देखे जा सकते हैं। यदि आप ग्रामीण इलाकों से हैं तो हो सकता है की आप इस बात से अभी तक अनभिज्ञ हों, की टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल कब और कहाँ किया जाता है।

लेकिन शहरों में आधुनिक टॉयलेट में इनका इस्तेमाल आम है इसे कभी कभी टॉयलेट टिश्यू के नाम से भी जाना जाता है इसलिए कहा जा सकता है की यह एक ऐसा टिश्यू उत्पाद है जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से शौच के बाद गुदा और आस पास के मलक्षेत्र को साफ़ करने के लिए किया जाता है। Toilet Paper का इस्तेमाल आम तौर पर टॉयलेट डिस्पेंसर के माध्यम से की जाती है क्योंकि यह एक लम्बी पट्टी का एक रोल होता है जिसे टॉयलेट डिस्पेंसर में फिट किया जाता है और वहीँ से जरुरत के अनुसार इस लम्बी पट्टी से टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है।

जहाँ तक इस प्रकार के पेपर को नष्ट करने की बात है इनमें अधिकतर पेपर ऐसे होते हैं जिन्हें सेप्टिक टैंक में आसानी से विघटित किया जा सकता है। Toilet Paper को अधिक से अधिक शोषकता प्रदान करने के लिए एक से छह प्लाई तक की विभिन्न मोटी परतों में बनाया जा सकता है। जहाँ तक कागज़ को सफाई के कामों में इस्तेमाल में लाये जाने की बात है तो चीन में छठवीं शताब्दी से ही कागज़ को स्वच्छता के लिए इस्तेमाल में लाया जाता था और चौदहवीं शताब्दी में टॉयलेट पेपर बनाने के लिए कागज़ का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था।

लेकिन आधुनिक वाणज्यिक टॉयलेट पेपर की शुरुआत 19 वीं शताब्दी में ही हुई थी, सन 1883 में रोल आधारित डिस्पेंसर का पेटेंट करवाया गया था।

Toilet paper Manufacturing Business

Toilet Paper का मार्किट विश्लेषण:

एक विश्वसनीय आंकड़े के मुताबिक अनुमान लगाया जा रहा है की वर्ष 2025 तक भारत विश्व की कुल टिश्यू पेपर मशीन मार्किट के एक तिहाई हिस्से पर कब्जा जमा लेगा। हालांकि इस पूर्वानुमान में थोड़े बहुत बदलाव भी शामिल हैं लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है की वर्ष 2018 में भारत वूवेन पेपर पैकेजिंग में दुनिया का सबसे बड़ा बाजार था। इसमें किचन पेपर रोल और टॉयलेट पेपर रोल पैकेजिंग का बहुत हिस्सा होने की उम्मीद है।

भारत जैसे जनाधिक्य वाले देश की यदि हम बात करें तो हम पाएंगे की यहाँ मशीनरी की औसत बिक्री मूल्य बहुत कम मिलेगी उसका कारण यह है की यहाँ अधिकतर लोग कम पैसे खर्च करके मशीन खरीदना चाहते हैं इसलिए कम क्षमता वाली मशीन अधिक बिकती हैं। इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है की भारत में Toilet paper Manufacturing में इस्तेमाल में लायी जाने वाली मशीनरी और उपकरणों का इस्तेमाल बढेगा और लोग इनके माध्यम से टॉयलेट पेपर का निर्माण करके अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहायक होंगे।

टॉयलेट पेपर निर्माण की मशीनरी

वर्तमान में आटोमेटिक और मैन्युअल दोनों प्रकार की Toilet Paper Making Machine बाजार में उपलब्ध हैं इन मशीनों का इस्तेमाल थोक मात्रा में टॉयलेट पेपर का निर्माण करने के लिए किया जाता है। इन मशीनों की मदद से फीडिंग, श्रेडिंग, थ्रेडिंग, फिनिशिंग इत्यादि सभी कार्य बेहद कम समय में पूर्ण हो जाते हैं। इन मशीनों का इस्तेमाल आम तौर पर कागज़ बनाने वाले उद्योगों में विभिन्न प्रकार के पेपर रोल बनाने में किया जाता है। आटोमेटिक मशीनें आवश्यकता के अनुसार जम्बो रोल को किसी भी शेप, स्क्वायर या आयताकार में मोड़ने में मददगार होते हैं।

इस मशीन की स्पीड भी बहुत अच्छी होती है और कण्ट्रोल डिवाइस से पूर्ण रूप से नियंत्रित की जा सकती है। इसके अलावा इसमें अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हुआ होता है इसलिए एक बार में जितने भी Toile Roll बनते हैं यह उनकी संख्या को भी बताने में सक्षम है। मशीन में डिवाइस को हैंडल करने के लिए एक और अतिरिक्त रिमोट लगा हुआ होता है। इसलिए मशीन संचालन के दौरान इसकी गति को नियंत्रित करना बेहद आसान हो जाता है। इन मशीनों की कीमत इनकी उत्पादन क्षमता के अनुसार 1 लाख से 5 लाख रूपये के बीच कुछ भी हो सकती है।

Toilet Paper निर्माण के लिए आवश्यक कच्चा माल  

Toilet Paper Manufacturing Business शुरू करने के लिए आवश्यक मशीनरी के बारे में तो हम बता चुके हैं अब सवाल यह उठता है की इस व्यवसाय में इस्तेमाल में लाया जाने वाला आवश्यक कच्चा माल क्या होगा? आवश्यक कच्चा माल पेपर जम्बो रोल ही होता है यह दो प्रकार का होता है एक होता है सॉफ्ट पेपर जम्बो रोल जो की प्रति किलो 72-75 रूपये में बाजार में उपलब्ध हो सकता है।

दूसरा हार्ड पेपर जम्बो रोल जिसकी कीमत 62-66 रूपये प्रति किलो हो सकती है। यह स्वयं उद्यमी को तय करना होगा की उसकी योजना के मुताबिक उसके व्यवसाय के लिए सॉफ्ट एवं हार्ड कागज़ में से कौन सा कागज़ उपयुक्त रहेगा। रीवाईन्डिंग सामग्री, पैकेजिंग सामग्री इत्यादि की भी आवश्यकता होती है।

आवश्यक लाइसेंस और पंजीकरण

इस तरह का व्यवसाय शुरू करने के लिए उद्यमी निम्नलिखित लाइसेंस और पंजीकरण प्राप्त कर सकता है।

  • रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज में रजिस्ट्रेशन
  • जीएसटी रजिस्ट्रेशन
  • ट्रेड लाइसेंस और फैक्ट्री लाइसेंस
  • पोल्यूशन और फायर एनओसी
  • उद्यम पोर्टल रजिस्ट्रेशन
  • ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन

और जहाँ तक मैनपावर का सवाल है छोटे स्तर पर इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करने के लिए उद्यमी को 3-4 Manpower की आवश्यकता हो सकती है।  

Toilet Paper की निर्माण प्रक्रिया

सबसे पहले कच्चे माल के जुम्बो रोल को मशीन में लोड कर दिया जाता है उसके बाद कोर की लोडिंग की जाती है। और Toilet Paper Manufacturing Process में इसके बाद प्लेन पेपर पर एम्बोस्सिंग की जाती है उसके बाद परफोर्शन का कार्य किया जाता है ऑनलाइन स्लाईटिंग प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है रीवाईन्डिंग के साथ पेपर की कटिंग की जाती है। रीवाईन्डिंग के बाद गमिंग की जाती है उसके बाद इन्हें 32 इंच 56 इंच में काटा जाता है। इस प्रकार से टॉयलेट पेपर तैयार हो जाता है फिर इनकी पैकेजिंग की जाती है।

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