यदि आप खुद का स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, तो आप यह बात अच्छी तरह जानते होंगे की स्टार्टअप के लिए फण्ड एकत्रित करना कितना महत्वपूर्ण है। यदि नहीं जानते हैं तो हम आपको बता देते हैं, की भले ही भारत में स्टार्टअप शुरू करना पहले के मुकाबले अधिक सरल हो गया हो। लेकिन आज भी दुनिया में जितने भी स्टार्टअप शुरू होते हैं, उसके 94% स्टार्टअप फण्ड की कमी या अन्य कारणों से पहले वर्ष के भीतर ही बंद हो जाते हैं।

इसलिए यदि आप चाहते हैं की आपका स्टार्टअप उन 94% स्टार्टअप में न हो, तो आपको अपने स्टार्टअप के लिए फण्ड की उचित व्यवस्था करनी होगी। यद्यपि कोई भी बिजनेस शुरू करना किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि आप भले ही कितनी अच्छी योजना बना लो, कितना ही भविष्यवादी दृष्टिकोण अपना लो, लेकिन आपको इस बात की गारंटी कोई नहीं दे सकता है, की भविष्य में आपका स्टार्टअप या बिजनेस बढ़िया चल जाएगा।

लेकिन इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है की कोई खुद का स्टार्टअप ही न शुरू करे, या फिर बिजनेस बिना किसी योजना और भविष्यवादी दृष्टिकोण के शुरू कर दे। सच्चाई यह है की स्टार्टअप शुरू करने के लिए भारत में जो माहौल आज बना हुआ है, इससे पहले ऐसा माहौल कभी नहीं बना था। इसलिए इस आर्थिक माहौल में उद्यमियों के लिए अच्छी योजना और भविष्यवादी दृष्टिकोण को लेकर खुद का स्टार्टअप शुरू करने का विचार लाभप्रद हो सकता है।

स्टार्टअप के लिए फण्ड कैसे जुटाएँ

हालांकि भले ही आपका स्टार्टअप प्रॉफिट क्यों न कमा रहा हो, लेकिन एक समय ऐसा आता है जब आपको लगता है की आपको स्टार्टअप के लिए फण्ड की आवश्यकता और अधिक है। कहने का आशय यह है की यह जरुरी नहीं है की आपको केवल स्टार्टअप को शुरू करने के दौरान ही फण्ड की आवश्यकता होगी।

बल्कि लाभ कमा रहे स्टार्टअप को अगले चरण में पहुँचाने के लिए भी फण्ड की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए खुद का स्टार्टअप शुरू कर रहे उद्यमी अक्सर एक बात जानना चाहते हैं की ऐसी स्थिति में वे अपने स्टार्टअप के लिए फण्ड किन किन माध्यमों से एकत्रित कर सकते हैं।

1. खुद की बचत से स्टार्टअप के लिए फण्ड एकत्रित करें

यदि आपका विचार खुद का बिजनेस करना या स्टार्टअप शुरू करने का है, तो आपको एक इनोवेटिव बिजनेस आईडिया के अलावा स्टार्टअप के लिए फण्ड की भी आवश्यकता होती है। इसलिए ध्यान रहे आप जो भी काम कर रहे हों, पहले उससे इतनी कमाई अवश्य कर लें की आप अपने स्टार्टअप को सेल्फ फंडिंग करने में सक्षम हों।

कहने का आशय यह है की अपने स्टार्टअप विचार को आजमाने के अलावा आपको अपनी बचत का भी आकलन करना होगा, और यह भी पता लगाना होगा की आपको अपने खुद का स्टार्टअप शुरू करने के लिए कम से कम कितने फण्ड की आवश्यकता हो सकती है।

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की बहुत सारे स्टार्टअप केवल इसलिए बंद हो जाते हैं क्योंकि उनके पास उसे संचालित करने के लिए फण्ड की कमी हो जाती है। इसलिए हडबडाहट या किसी के बहकावे में आकर कोई भी निर्णय जल्दबाजी में न करें। बल्कि कोशिश करें की आप जो खुद का बिजनेस शुरू करने वाले हों, उसके लिए पैसे की व्यवस्था आप अपनी बचत से करें।  

2. नाते रिश्तेदारों से उधार लेकर

खुद की बचत से अपने स्टार्टअप के लिए फण्ड एकत्रित करने के बावजूद भी यदि आपको लग रहा है की आपको और अधिक फण्ड की आवश्यकता है, तो आप अनौपचारिक ऋणों जैसे किसी दोस्त, रिश्तेदार, पारिवारिक सदस्य इत्यादि से फण्ड एकत्रित करने का प्रयास कर सकते हैं। इस तरह के ऋण लेने का यह फायदा होता है, की ये बिना ब्याज या नाममात्र के ब्याज पर भी मिल जाते हैं। उद्यमी चाहे तो इच्छुक नाते रिश्तदारों को निवेश करने के बदले अपने स्टार्टअप में हिस्सा भी ऑफर कर सकता है।    

3. क्राउडफंडिंग के माध्यम से

क्राउडफंडिंग की यदि हम बात करें तो इसमें आपके स्टार्टअप में निवेश करने वाले एक से अधिक निवेशक होते हैं। इससे पहले की वे आपके स्टार्टअप के लिए फण्ड दें, वे आपके बिजनेस आईडिया, बिजनेस के लक्ष्य, उसकी कार्य योजना, और लाभ कमाने की क्षमता का आकलन करते हैं। और उसके बाद एक निश्चित राशि आपके स्टार्टअप के लिए ऑफर की जाती है।

वर्तमान में स्टार्टअप के लिए फण्ड जुटाने के तौर पर क्राउडफंडिंग काफी लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है।  वह इसलिए क्योंकि इस माध्यम से फण्ड मिलने पर अन्य निवेशकों का भी आपके व्यवसाय में विश्वास बढ़ जाता है। आप चाहें तो जो लोग या रिश्तेदार आपके बिजनेस आईडिया में विश्वास कर रहे हैं, उन्हें लग रहा है की यह एक कमाऊ आईडिया हो सकता है। तो आप उन लोगों से भी क्राउडफंडिंग के जरिये फण्ड एकत्रित कर सकते हैं।       

4. एंजेल इन्वेस्टर से स्टार्टअप के लिए फण्ड एकत्रित करें

एंजेल इन्वेस्टर ऐसे लोग या लोगों का समूह होता है जिनके पास अतिरिक्त नगदी होती है, और वे उस नगदी को लाभ कमाने के लिए कहीं निवेश करना चाहते हैं। कहने का आशय यह है की एंजेल इन्वेस्टर के पास उनकी जरुरत से अधिक पैसा होता है और वे उस पैसे को लाभ कमाने के उद्देश्य से स्टार्टअप इत्यादि में लगाते हैं ।

स्टार्टअप के लिए फण्ड एकत्रित करने का यह तरीका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्तमान में जो बड़ी बड़ी कंपनियां दिखती हैं, उनमें से कई ऐसी कम्पनियाँ हैं, जिन्होंने एंजेल इन्वेस्टर से फण्ड एकत्रित करके अपने स्टार्टअप को इस मुकाम तक पहुँचाया है।

हालांकि स्टार्टअप के लिए फण्ड देने के बदले एंजेल इन्वेस्टर 30% इक्विटी या उससे भी अधिक इक्विटी की माँग कर सकते हैं। और वे केवल ऐसे स्टार्टअप पर पैसे लगाना चाहेंगे, जिसमें उन्हें लगेगा की भविष्य में उनका पैसा अच्छा रिटर्न देने में सक्षम होगा।    

5. वेंचर कैपिटल के माध्यम से

ऐसे स्टार्टअप जो पहले से लाभ अर्जित कर रहे हों, लेकिन उन्हें अपने स्टार्टअप को अगले मुकाम तक पहुँचाने हेतु स्टार्टअप के लिए फण्ड की आवश्यकता हो। उनके लिए वेंचर कैपिटलिस्ट फण्ड एकत्रित करने का अच्छा माध्यम हो सकते हैं, क्योंकि इनके माध्यम से उद्यमी के स्टार्टअप को बड़ा फण्ड भी आसानी से मिल सकता है। वेंचर कैपिटलिस्ट वे कंपनी या व्यक्तिगत व्यक्ति होते हैं, जो हमेशा ऐसे स्टार्टअप की तलाश में रहते हैं जिसमें भविष्य में सफल होने की बहुत अधिक संभावना हो।

आम तौर पर इनके पास एक्सपर्ट की एक टीम होती है, जो यह पता लगाने में सक्षम होती है की वह स्टार्टअप भविष्य में कितना सफल हो पायेगा। उन्हीं की राय के आधार पर वे इस बात का निर्णय लेते हैं की स्टार्टअप के लिए फण्ड कितना देना है, या देना भी है की नहीं देना है । ये निवेश के बदले इक्विटी में हिस्सा मांगते हैं और जब कंपनी खुद का IPO या किसी अन्य कंपनी में अधिग्रहण कर लेती हैं, तो ये अपना हिस्सा लेकर कंपनी को छोड़ देते हैं।    

6. इनक्यूबेटर और एक्सेलरेटर के माध्यम से

भारत में स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिए पूरे वर्ष भर इनक्यूबेटर और एक्सेलरेटर के कार्यक्रम चलते रहते हैं। जहाँ इनक्यूबेटर के जरिये व्यवसायों को बच्चे की तरह आश्रय देकर उन्हें प्रशिक्षण और नेटवर्क प्रदान करके स्टार्टअप का पोषण करना होता है। वहीँ एक्सेलरेटर व्यवसायों को बड़ी छलांग लगाने और संचालित करने में मदद करते हैं । 

इस तरह के ये कार्यक्रम 4-8 महीने के होते हैं, लेकिन ये सीधे तौर पर स्टार्टअप के लिए फण्ड एकत्रित करने का जरिया तो नहीं बनते हैं । लेकिन इन कार्यक्रमों के माध्यम से उद्यमी मेंटर, निवेशकों और अन्य स्टार्टअप चलाने वाले उद्यमियों के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाकर अपने स्टार्टअप के लिए फण्ड एकत्रित करने में सक्षम हो सकता है।     

7. बैंक से ऋण लेकर फण्ड एकत्रित करना

वैसे देखा जाय तो कोई भी उद्यमी जो खुद का बिजनेस शुरू करने का विचार कर रहा हो, और वह यह भी महसूस कर रहा हो की उसके पास इसके लिए फण्ड की कमी है। तो आम तौर पर वह बैंक से लोन लेने की ही सोचेगा, इसलिए बैंक ऐसी पहली जगह है जहाँ से कोई भी उद्यमी अपने स्टार्टअप के लिए फण्ड एकत्रित करने का विचार करता है। जैसा की हम सब जानते हैं की वर्तमान में लगभग हर बैंक चाहे वह सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक हो, या फिर निजी क्षेत्र का बिजनेस लोन प्रदान करता है।

लेकिन इस तरह का यह लोन देने के लिए हर बैंक द्वारा कुछ पात्रता मानदंड निर्धारित किये गए होते हैं, यदि आप भी बैंक से ऋण लेना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको जिस बैंक से आप ऋण लेना चाहते हैं उसके पात्रता मानदंडों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। तभी आप तय कर पाएंगे की आपका स्टार्टअप उस बैंक से ऋण लेने के लिए पात्र है या नहीं ।    

8. MFI और NBFC से लोन लेकर

जैसा की हमने बताया की बैंक आपके स्टार्टअप के लिए फण्ड तभी देगा जब आपका स्टार्टअप उसके निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करेगा। इसलिए यदि आपका स्टार्टअप नया है और आपकी या आपके स्टार्टअप का कोई वित्तीय इतिहास नहीं है, तो हो सकता है की बैंक आपको लोन देने से मना कर दे।

दुसरे शब्दों में कहें तो यदि आपकी कोई वित्तीय इतिहास या क्रेडिट स्कोर नहीं है तो बैंकों से ऋण लेने में आपको काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आप अपने स्टार्टअप के लिए फण्ड हेतु माइक्रो फाइनेंस इंस्टिट्यूशन (MFI) और नॉन  बैंकिंग फाइनेंस कम्पनीज (NBFC) से संपर्क कर सकते हैं । यद्यपि इनके द्वारा प्रदान किये गए ऋण पर तुलनात्मक रूप से ब्याज अधिक लगता है, लेकिन ये क्रेडिट स्कोर और वित्तीय इतिहास के बिना भी ऋण प्रदान कर देते हैं।  

9. सरकारी योजनाओं के तहत लोन प्राप्त करें

वर्तमान में भारत सरकार द्वारा कई ऐसी ऋण योजनाएँ शुरू की गई हैं, जिनका उद्देश्य माइक्रो, स्माल, मीडियम और स्टार्टअप उद्यमों को लाभ पहुँचाना है। इसलिए यदि आपको अपने स्टार्टअप के लिए फण्ड जुटाने में मुश्किल हो रही है, तो आप सरकार की ऐसी योजनाओं के बारे में पता कर सकते हैं।

जो स्टार्टअप उद्यमों को ऋण प्रदान करने के उद्देश्य से चलायी गई हैं। इनमें प्रधानमंत्री एम्प्लॉयमेंट जनरेशन प्रोग्राम, स्टार्टअप इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और राज्य सरकार की योजनाएँ भी शामिल हैं।  

10. बिजनेस क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करके

यदि आपका बिजनेस अच्छा चल रहा है और यह लाभ भी अच्छा कमा रहा है। लेकिन आपको उससे इतना पैसा अभी नहीं मिल पा रहा है की आप उसे अगले स्तर पर ले जाएँ।

ऐसे में यदि आपके पास किसी बैंक का बिजनेस क्रेडिट कार्ड है तो आप उसका इस्तेमाल वस्तुओं, सेवाओं इत्यादि की खरीदारी के लिए कर सकते हैं। यदि नहीं है तो आप इसके लिए उस बैंक में आवेदन कर सकते हैं, जहाँ पर आपके बिजनेस के नाम से चालू खाता हो । बिजनेस क्रेडिट कार्ड बैंकों द्वारा उद्यमियों की वित्त सम्बन्धी समस्याओं के निराकरण के लिए ही जारी किये जाते हैं।

प्रश्न – स्टार्टअप के लिए फण्ड इकट्ठा करने का सबसे बढ़िया तरीका क्या है?

उत्तर – यह इस बात पर निर्भर करता है की आपका स्टार्टअप किस स्तर का है, शुरुआत में खुद की बचत से फण्ड और यदि स्टार्टअप अच्छा चल रहा हो तो एंजेल इन्वेस्टर या वेंचर कैपिटलिस्ट अच्छे विकल्प हो सकते हैं ।

प्रश्न – स्टार्टअप के लिए बैंक से लोन न मिले तो क्या करें?

उत्तर –  बैंक से लोन न मिले तो आप MFI या NBFC से लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

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