साबुन बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें? How to Start Soap Making Business.

Soap Making Business  का सीधा एवं स्पष्ट अभिप्राय साबुन बनाने के काम से है जी हाँ दोस्तो भारत आज से नहीं बल्कि शताब्दीयों से ही प्राकृतिक उत्पादों एवं प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल एवं प्रचार प्रसार करता रहा है। वर्तमान में भारत हर तरह की सामग्री चाहे वह हस्तनिर्मित हो या फिर मशीनों से निर्मित के लिए एक बहुत बड़े बाजार के रूप में सामने आया है। जहाँ तक सवाल Soap Making का या साबुन बनाने का है इसे उद्यमी हाथों एम मशीन दोनों की मदद से बना सकता है। यद्यपि भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में एक दौर वह भी चला जब खाद्य पदार्थों सहित लोग उपभोक्तावाद एवं मशीनों से निर्मित वस्तुओं को अधिक महत्व देते थे। लेकिन ज्यों ज्यों लोगों की अपनी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढती गई और अधिक टिकाऊ जीवन की लालसा बढती गई उन्हें समझ में आने लगा की उन्हें सिर्फ उन्हीं का इस्तेमाल करना चाहिए जिनमें प्राकृतिक एवं स्वभाविक अवयवों की मात्रा अधिक हों। यही कारण है की आज जैविक सामग्री की मांग सबसे अधिक है। इसलिए आर्गेनिक सामग्री से निर्मित साबुनों की मांग भी आज बहुत अधिक है और उद्यमी इस तरह का यह व्यापार शुरू करके अच्छे लाभ प्राप्ति की कोशिश कर सकता है। एक साबुन किसी भी प्रकार का हाथ धोने वाला, चेहरा धोने वाला, नहाने वाला या फिर कपड़े धोने वाला कुछ भी हो सकता है। और इन साबुनों का इस्तेमाल व्यवसायिक एवं आवासीय दोनों के उपयोग के लिए भी किया जा सकता है। यही कारण है की वर्तमान में तरह तरह के साबुन हमें बाजार में देखने को मिल जाते हैं।  Soap Making Business में संभावना को देखते हुए अनेक बड़ी बड़ी कॉस्मेटिक सामग्री का उत्पादन करने वाली कंपनी भी साबुन बनाने के व्यापार में पहले से उतर चुकी हैं। तो आइये जानते हैं की कैसे कोई इच्छुक व्यक्ति साबुन बनाने का बिजनेस शुरू कर सकता है।

Soap Making Business in Hindi

साबुन बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें (How to Start Soap Making Business)

 अपने देश भारत में मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस शुरू करने की तुलना में सर्विस सेक्टर में बिजनेस करना काफी आसान है वह इसलिए क्योंकि सर्विस सेक्टर में बहुत सारे ऐसे बिजनेस होते हैं जिन्हें आप नाम मात्र या फिर मुफ्त में भी शुरू कर सकते हैं। और इनके लिए उद्यमी को अधिकतर लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन की भी आवश्यकता नहीं होती और जिनकी होती भी है उद्यमी उनके लिए ऑनलाइन ही आसानी से आवेदन भी कर सकता है। लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बिजनेस शुरू करने का मतलब है की आपकी निवेश करने की क्षमता अच्छी होनी चाहिए और उत्पादित होने वाले प्रोडक्ट के आकार, प्रकार एवं इस्तेमाल सम्बन्धी जो भी नियम कानून हैं उनका पूर्णतया अनुपालन होना आवश्यक है। Soap Making Business की खास बात यह है की उद्यमी इसे कम निवेश के साथ भी शुरू कर सकता है। और चूँकि साबुन की मांग हर क्षेत्र में बराबर होती रहती है इसलिए उद्यमी इसे कहीं से भी शुरू कर सकता है।   

जनसांख्यिकी एवं मांग को समझें

यदि आप Soap Making Business शुरू करने की ओर गंभीर हैं तो आपका सबसे पहला कदम इस दिशा की ओर स्थानीय बाजार में उपलब्ध लोगों का साबुन के प्रति रूचि, वरीयता, पसंद इत्यादि का अवलोकन करने की आवश्यकता होगी। उद्यमी को उस स्थानीय बाजार में पता करने की कोशिश करनी होगी की नियमित उपयोगकर्ता किस आकार, खुशबु, रंग, पैकिंग इत्यादि का साबुन पसंद करते हैं। इसके अलावा ऐसे ग्राहक जिनकी खर्च करने की क्षमता अधिक है वे किस प्रकार के साबुन पसंद करेंगे वैसे देखा जाय तो इन लोगों को प्राकृतिक सामग्री से बनाये गए साबुन जो उनकी त्वचा को किसी प्रकार का कोई नुकसान न पहुंचाएं पसंद होते हैं। इसके अलावा उद्यमी को उस एरिया विशेष में रहने वाले लोगों की आयु वर्ग, आय स्तर, लिंग इत्यादि का भी अवलोकन करने की आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा उद्यमी को साबुन के अन्य क्षेत्रों या प्रकारों जैसे वेडिंग गिफ्ट के तौर पर दिए जाने वाले साबुन, व्यक्तिगत स्तर पर उपयोग में लाये जाने वाले साबुन, आर्गेनिक सोप, बेबी सोप, नोवेल्टी सोप, हाउसहोल्ड सोप, कमर्शियल सोप इत्यादि पर भी ध्यान देने की आवश्यकता होती है।      

1. साबुन बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त करें (Get training of Soap making)

इससे पहले की उद्यमी स्वयं की विनिर्माण इकाई में निर्मित साबुन को बेचे उससे पहले यदि उसे साबुन बनाने के बिजनेस की कोई जानकारी नहीं है तो उसे इसमें विशेज्ञता हासिल करनी होगी। ताकि उसकी देखरेख में उसका शुरू होने वाला Soap Making Business सफलता की बुलंदियों तक पहुंचे। यही कारण है की उद्यमी को साबुन बनाने के सूत्र एवं परिष्कृत करने की तकनीक को समझना भी परम आवश्यक है। हालांकि अलग अलग साबुन विनिर्माणकर्ताओं द्वारा साबुन बनाने की अलग अलग विधि एवं अलग अलग सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। कहने का आशय यह है की जहाँ बेसिक साबुनों को बनाने के लिए मात्र कुछ अवयवों की आवश्यकता होती है वहीँ विशेष साबुनों को अवयवों की एक विस्तृत श्रंखला को जोड़कर बनाया जा सकता है। आम तौर पर साबुन बनाने के लिए विभिन्न सामग्री जैसे सोडियम हाइड्रोऑक्साइड, पोटेशियम हाइड्रोऑक्साइड, कास्टर आयल, नारियल तेल, जैतून का तेल, ताड़ का तेल, मूंगफली का तेल इत्यादि की आवश्यकता हो सकती है। इन अवयवों में से कौन से अवयव की कितनी मात्रा लेनी है या नहीं लेनी है यह सब जानकारी के लिए उद्यमी को प्रशिक्षण प्राप्त करना अति आवश्यक है। वर्तमान में विभिन्न सरकारी कौशल कार्यक्रमों एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रमों के तहत भी Soap Making Business का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।        

2. बिजनेस प्लान बनायें

जब Soap Making Business शुरू कर रहे उद्यमी द्वारा स्थानीय बाजार का अवलोकन एवं प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया जाता है तो अब उसका इस बिजनेस को शुरू करने की तरफ अगला कदम एक प्रभावी बिजनेस योजना बनाने का होना चाहिए। अपने विचारों को लिखित रूप देने से यह चीजों को समझने एवं किसी समस्या का हल ढूँढने में उद्यमी की मदद करेगा। इसके अलावा यह उद्यमी को उसके व्यापारिक लक्ष्य से डगमगाने नहीं देगा जैसे ही उद्यमी डगमगाने वाला होगा वह इस योजना के बिन्दुओं में परिवर्तन कर पाने में भी सक्षम हो पायेगा। कहने का आशय यह है की बिजनेस के शुरूआती दौर या प्रारम्भिक स्तर पर विस्तृत रूप से रणनीतिक बिजनेस योजना बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। और यहाँ तक की इसके लिए उद्यमी चाहे तो किसी मेंटर को भी नियुक्त कर सकता है जो समय समय पर उद्यमी का बिजनेस को लेकर मार्गदर्शन करता रहे। इस व्यापारिक योजना के माध्यम से उद्यमी को उसके Soap Making Business को शुरू करने में आने वाले खर्चे का भी अनुमान आसानी से लग जायेगा। इसके अलावा अनुमानित कमाई को भी इसका हिस्सा बनाने की आवश्यकता होती है। और बिजनेस के लक्ष्य क्या हैं और कितने समय में उन्हें हासिल कर लिया जायेगा यह सब जानकारी एक प्रभावी व्यापारिक योजना में होना नितांत आवश्यक है।        

3. वित्त का प्रबंध करें (Finance arrangement for Soap Making)

यद्यपि वित्त का प्रबंध करने से पहले उद्यमी का यह जानना अति आवश्यक होता है की उसे Soap Making Business शुरू करने में कितने पैसों का निवेश करना होगा। चूँकि उद्यमी द्वारा बिजनेस प्लान पहले ही बना लिया होगा इसलिए उसे अनुमानित खर्चे का पता भी चल गया होगा। अब उद्यमी का अगला कदम अपने बिजनेस के लिए वित्त का प्रबंध करने का होना चाहिए। यद्यपि उद्यमी का बजट उसके बिजनेस के आकार, उत्पादन क्षमता इत्यादि पर निर्भर करेगा लेकिन उद्यमी को यह मानकर चलना होगा की छोटे से छोटे स्तर पर भी इस तरह का बिजनेस शुरू करने के लिए उद्यमी 7-12 लाख रूपये निवेश करने की आवश्यकता होगी ही होगी। और इस स्थिति में उद्यमी को कम से कम लगभग 15-20 लाख रूपये का प्रबंध करके रखना होगा। इस व्यापार में होने वाले कुछ खर्चों का विवरण इस प्रकार से है।

  1. मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का किराया बिजली, मेंटेनेंस इत्यादि सभी को मिलाकर – Rs. 80000 Per Month
  2. फैक्ट्री में काम करने वाले पांच वर्कर की सैलरी – Rs. 50000/ per month each 10000
  3. एक इंजिनियर की सैलरी                   – Rs. 32000 per month
  4. एक सुपरवाइजर की सैलरी                  – Rs. 25000 per Month
  5. एक फैक्ट्री मेनेजर की सैलरी                                  – Rs. 40000 per month
  6. दो सेल्समेन की सैलरी                    – Rs. 30000 per Month 15000 each
  7. कच्चे माल खरीदने में आने वाला खर्चा       – 1-2 लाख रूपये
  8. मशीनरी एवं उपकरण खरीदने में आने वाला खर्चा – 2-3 लाख रूपये
  9. विज्ञापन एवं अन्य खर्चे                      – Rs. 50000 per month

इसके अलावा यदि कोई खर्चा इसमें सम्मिलित नहीं है तो उद्यमी को उसे भी अपने बिजनेस योजना में शामिल करना चाहिए और उसी के मुताबिक ही अपने Soap Making Business के लिए वित्त का प्रबंध करना चाहिए।  

4. आवश्यक लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन

भारत में किसी भी बिजनेस को वैधानिक रूप देने के लिए उसे एक लीगल एंटिटी जैसे लिमिटेड लायबिलिटी फर्म, पार्टनरशिप, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर रजिस्टर करने की आवश्यकता होती है। हालांकि आम तौर पर भारत में छोटे बिजनेस प्रोप्राइटरशिप के तौर पर ही रजिस्टर होकर लोग चलाते हैं। इसलिए उद्यमी चाहे तो प्रोप्राइटरशिप या लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी के तौर पर भी अपने बिजनेस को रजिस्टर कर सकता है। इसके अलावा उद्यमी को स्थानीय प्राधिकरण जैसे नगर निगम, नगर पालिका इत्यादि से भी लाइसेंस की आवश्यकता हो सकती है और उद्यमी को टैक्स रजिस्ट्रेशन, बैंक में चालू खाता, बिजनेस कजे नाम से पैन कार्ड इत्यादि की भी आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा उद्यमी को ड्रग एंड कॉस्मेटिक रूल के तहत भी लाइसेंस इत्यादि की आवश्यकता हो सकती है।     

5. मशीनरी एवं कच्चा माल खरीदें

Soap Making Business शुरू करने वाले उद्यमी को एक बात का विशेष ध्यान रखना होगा की यदि वह चाहता है की उसकी फैक्ट्री में लगातार साबुन बनाने का काम चलता रहे अर्थात वह अवरुद्ध न हो । तो उसे कच्चे माल की उपयुक्त मात्रा हमेशा अपनी यूनिट में उपलब्ध करानी पड़ेगी । इसके लिए उद्यमी चाहे तो थोक विक्रेताओं से यह सामग्री थोक भावों पर खरीदने के लिए अधिक मात्रा में भी खरीद सकता है। यदि उसे कच्चा माल सस्ती दरों पर उपलब्ध होता है तो इसका सीधा प्रभाव उसकी प्रोडक्शन लागत पर पड़ेगा।

साबुन बनाने के लिए कच्चे माल की लिस्ट

  • खुशबूदार तेल जैसे जैतून का तेल, नारियल का तेल, ताड़ का तेल इत्यादि।
  • सोडियम हाइड्रोऑक्साइड, पोटेशियम हाइड्रोऑक्साइड
  • त्वचा के पोषण के लिए शहद, एलोवेरा, समुद्री शैवाल, जई का आटा इत्यादि।
  • प्राकृतिक प्रजरवेटिव के तौर पर निकले हुए अंगूर के बीज,गाजर की जड़ का तेल इत्यादि।
  • सेंट और कलर
  • मोल्ड और कंटेनर
  • पैकेजिंग मटेरियल 

साबुन बनाने के लिए मशीनरी एवं उपकरणों की लिस्ट

  • ब्लेंडर
  • माइक्रोवेव
  • मोल्ड
  • मिक्सिंग केटल
  • लेबल लगाने वाला
  • रैपिंग मशीन
  • स्टेनलेस स्टील से निर्मित घड़ा ढक्कन सहित
  • स्टील या प्लास्टिक का चम्मच
  • मापक चम्मच या कप
  • बेकेर
  • स्टिक ब्लेंडर
  • मिश्रण के लिए रबर स्पैटुला
  • सुरक्षा के लिए दस्ताने, काले चश्मे इत्यादि
  • थर्मामीटर       

6. साबुन बनाना शुरू करें ( Start Soap making process)

हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं की Soap Making units में इस्तेमाल में लाये जाने वाले कच्चे माल, बजट, इस्तेमाल में लाये जाने वाले मशीनरी एवं उपकरणों के आधार पर मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया अलग अलग हो सकती है। लेकिन यहाँ पर हम कुछ साबुन बनाने की प्रमुख विधियों का संक्षिप्त वर्णन कर रहे हैं।

ठंडी प्रक्रिया (Cold Process):

Soap Making की इस ठंडी प्रक्रिया में एक क्षार जैसे सोडियम हाइड्रोऑक्साइड इत्यादि के साथ एक निर्धारित अनुपात में निर्धारित तेलों जैसे जैतून, नारियल या ताड़ के तेल का सम्मिश्रण सम्मिलित होता है। इस निर्माण प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल में लायी जाने वाली रासायनिक प्रक्रिया को ही Saponification  कहा जाता है। यहाँ साबुन की पट्टी का निर्माण करने के लिए क्षार की मदद से तेल की संरचना में बदलाव हो जाता है। इस प्रक्रिया में उद्यमी उपयुक्त होने वाली सामग्री को पूर्णतया नियंत्रित कर सकता है।

गर्म प्रक्रिया (Hot Process)

Soap Making की यह गर्म विधि ठंडी विधि से थोड़ी भिन्न है इसमें सभी प्रकार के अवयवों को एक साथ मिला लिया जाता है और फिर इसे किसी बड़े बर्तन में रखकर चूल्हे पर रख दिया जाता है। और इस पद्यति में इसे तब तक हिलाया जाता है जब तक की साबुन विभिन्न चरणों से होकर नहीं गुजरता है। इस प्रक्रिया में जो अतिरिक्त पानी होता है वह वाष्प बनकर हवा में उड़ जाता है और ठंडा होने के बाद साबुन उपयोग करने के लिए तैयार हो जाता है।

 ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग

Soap Making Business करने वाले उद्यमी के लिए ब्रांडिंग बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी के जरिये उद्यमी अपने उत्पाद को अन्य उत्पादों से अलग बताने की कोशिश करता है । ब्रांडिंग रणनीतियां बनाने के लिए भी उद्यमी को टारगेट कस्टमर एवं उनकी अपेक्षाओं को समझना अति आवश्यक है। जैसे यदि उद्यमी के टारगेट कस्टमर ऐसे लोग हैं जो जानवरों से निर्मित उत्पादों को पसंद नहीं करते हैं तो उद्यमी को ऐसे साबुन का निर्माण करने की आवश्यकता होती है जो पशु उत्पाद से मुक्त हों। और ऐसे लोग जो अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं उनके लिए उद्यमी को प्राकृतिक अवयवों का इस्तेमाल करके साबुनों का निर्माण करने की आवश्यकता हो सकती है। उद्यमी अपने ब्रांड के बारे में जागरूकता बढाने के लिए विभिन्न आर्ट एवं क्राफ्ट शो, फ़्ली मार्किट, फार्मर मार्किट, घरेलु पार्टियों इत्यादि में हिस्सा लेकर प्रचार एवं प्रसार कर सकता है। ध्यान रहे यदि Soap Making Business करने वाला उद्यमी चाहता है की वह अपने उत्पाद को सफलतापूर्वक बेच पाए तो उसे अपने बाजार को तो समझना ही होगा साथ में अपने टारगेट ग्राहकों तक कुशलता से कैसे पहुंचे यह भी सोचना होगा। टारगेट ग्राहकों तक पहुँचने के लिए उद्यमी अपने व्यापार का विभिन्न तरीकों जैसे सोशल मीडिया, सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन, स्थानीय न्यूज़पेपर, केबल चैनल, बिजनेस कार्ड, बैनर मार्केटिंग इत्यादि का सहारा ले सकता है।  

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  1. sarvesh tiwari April 2, 2021

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