पोहा निर्माण बिजनेस शुरू करने की प्रक्रिया. Poha Manufacturing Business.

पोहा एक बेहद ही स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ है जिसका इस्तेमाल भारत में लगभग सभी भौगौलिक क्षेत्रों में किया जाता है । इसलिए Poha Manufacturing व्यवसाय शुरू करना एक बेहद ही लाभकारी व्यवसाय के रूप में परिवर्तित हो सकता है। पोहे को राइस फलैक्स भी कहा जाता है और उत्तर भारत में आम तौर पर इसका इस्तेमाल नाश्ते के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है। जैसा की हम सब अच्छी तरह से जानते हैं की हमारा देश भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ की जलवायु कृषि परिस्थितियों के अनुकूल होने के कारण कृषि उत्पादन में हमारा देश समृद्ध है। कहने का आशय यह है की भारत कृषि उत्पादों के उत्पादन में दुनिया के बड़े उत्पादकों में शामिल है। और जहाँ तक पोहा का सवाल है इसका निर्माण धान को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल में लाकर किया जाता है। और धान का उत्पादन भारत के लगभग सभी राज्यों में किया जाता है इसलिए Poha Manufacturing Business शुरू करने के लिए कच्चा माल लगभग हर जगह आसानी से उपलब्ध हो जायेगा इसमें को दो राय नहीं है। चूँकि पोहा खाने में हल्का एवं पौष्टिक होता है इसलिए इसका इस्तेमाल नाश्ते में ही अधिक किया जाता है। और इसका अधिकतम उपभोग पश्चिमी भारत जैसे महाराष्ट्र एवं गुजरात में किया जाता है लेकिन पूर्वी और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में भी लोग इसका बड़े पैमाने पर उपभोग करते हैं। कुछ लोग पोहा को तलने के बाद लेना पसंद करते हैं कुछ इसे दूध के साथ लेना पसंद करते हैं। कुछ इसमें मूंगफली, काजू इत्यादि डालकर इसे खाने के तौर पर इस्तेमाल करते हैं इसे बनाना बेहद आसान होता है और इसमें कार्बोहाइड्रेट एवं प्रोटीन भी प्रचुर मात्रा में होता है। इन्हीं सब कारणों के चलते लोग इसे खाना बेहद पसंद करते हैं इसलिए पोहा की मांग बाज़ारों में हमेशा विद्यमान रहती है। जो Poha Manufacturing Business को प्रोत्साहित करती है।

Poha Manufacturing Business hindi

पोहा बनाने का व्यापार क्या है (What is Poha Manufacturing Business)  

जैसा की हम पहले भी बता चुके है की पोहा को राइस फलैक्स के नाम से भी जाना जाता है और इनका निर्माण धान से किया जाता है। ग्राहक अपने स्वाद के अनुसार इसे या तो दही या दूध के साथ मिक्स करके खाना पसंद करते हैं या फिर इसमें नमक, मिर्च, मसाले, मूंगफली, काजू इत्यादि मिलाकर इसे फ्राई करके खाना पसंद करते हैं। भारत में पोहा स्वादिष्ट ब्रेकफास्ट आइटम में से एक है इसके अलावा इसका इस्तेमाल चेवड़ा जो की एक फरसान आइटम है बनाने के लिए भी किया जाता है। चूँकि इसे धान से बनाया जाता है इसलिए यह पचाने में आसान होता है शायद यही कारण है की बहुत सारे कैटरर इसका इस्तेमाल गिरेवी मोटी करने के लिए भी करते हैं। ढंग से भंडारित किये जाने पर इसे दो तीन महीने तक कुछ नहीं होता है, वैसे तो यह पश्चिमी भारत का एक सामान्य सा उत्पाद है लेकिन भारत में Poha Manufacturing Business कहीं से भी किया जा सकता है।  क्योंकि उत्तरी एवं पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भी इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए जब किसी उद्यमी द्वारा व्यवसायिक तौर पर अपनी कमाई करने के लिए पोहा निर्माण का कार्य शुरू किया जाता है तो इसे ही हम Poha Manufacturing Business कह सकते हैं।

पोहा की बिक्री संभावनाएं  

वैसे देखा जाय तो पोहे का इस्तेमाल खानपान में अधिकतर भारत की पश्चिमी बेल्ट जैसे महाराष्ट्र एवं गुजरात में किया जाता है। इसलिए इसमें कोई दो राय नहीं की इन क्षेत्रों में इसके बिकने की संभावनाएं बहुत अधिक हैं। लेकिन पोहा अपनी पौष्टिकता, स्वाद एवं पाचन में हलका होने के कारण भारत के पूर्वी एवं उत्तरी भाग में भी तेजी से फ़ैल रहा है और यहाँ के लोग भी इसका स्वाद एवं बनाने में आसानी होने के कारण काफी पसंद कर रहे हैं। इसलिए कहा तो यही जा सकता है की Poha Manufacturing Business करने वाले उद्यमी के उत्पाद के बिकने की संभावनाएं लगभग सभी भौगौलिक क्षेत्रों में हैं। लेकिन फिर भी उद्यमी जहाँ खुद का पोहा बनाने का व्यवसाय शुरू करने की सोच रहा हो उस एरिया में  इसकी मांग का विश्लेषण करके ही यह कदम उठाये तो उचित रहता है। जब पोहे को नारियल, ताजे टमाटर, धनिया इत्यादि से गार्निश किया जाता है तो शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा होगा जिसके मुहँ में इसे देखकर पानी न आया हो। पोहे का इस्तेमाल सिर्फ घरों में ही नहीं बल्कि कैटरर, होटल, ढाबों इत्यादि में भी किया जाता है और विभिन्न कम्पनियों एवं फैक्ट्रीयों जहाँ कर्मचारियों के लिए खाने पीने की व्यवस्था होती है। उनकी कैंटीन में भी इसका इस्तेमाल नाश्ता इत्यादि बनाने के लिए किया जाता है। इसलिए जहाँ तक Poha Manufacturing Business का सवाल है यह कृषि पर आधारित एक बेहद महत्वपूर्ण उद्योग है। जो न केवल किसानों को उनके पारिश्रमिक मूल्य को प्राप्त करने में मदद करेगा बल्कि उस एरिया विशेष में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। पोहा बनाने में बेहद आसान होता है और इसमें प्रोटीन एवं कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में होने के कारण हर आयु वर्ग के लोगों द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाता है। सरकारी स्कूलों में मिड डे मील योजना के तहत भी इसका इस्तेमाल होता है।

पोहा बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें (How to Start Poha Manufacturing Business)

भारत में Poha Manufacturing Business शुरू करना इसलिए लाभकारी हो सकता है क्योंकि उद्यमी को यहाँ कच्चा माल एवं इसमें प्रयुक्त होने वाली मशीनरी आसानी से उपलब्ध हो जाएगी। इसके अलावा यदि उद्यमी किसी ग्रामीण एरिया से इस तरह का यह बिजनेस शुरू करता है तो उसे श्रमिक भी बेहद सस्ती दरों पर आसानी से उपलब्ध हो जायेंगे। लेकिन उद्यमी को अपनी फैक्ट्री द्वारा उत्पादित उत्पाद को बेचना तो बड़े बाज़ारों में ही होगा जो ग्रामीण इलाकों में संभव नहीं है। भारत में अक्सर जो भी लोग खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं वे सर्वप्रथम यही जानना चाहते हैं की किसी विशेष व्यवसाय को शुरू करने में उन्हें कितने पैसे खर्च करने की आवश्यकता होगी। Poha Manufacturing Business की यदि हम बात करें तो इसमें जो प्रमुख बड़ा खर्चा है वह मशीनरी एवं उपकरणों को खरीदने में होने वाला है। लेकिन इसमें कई क्रियाएं ऐसी होती है जिसे उद्यमी शुरूआती दौर में मैन्युअली भी कर सकता है। और शुरूआती दौर में प्रोजेक्ट कास्ट कम करने के लिए कम क्षमता वाली जरुरी मशीन का ही इस्तेमाल कर सकता है। कहने का आशय यह है की इस व्यवसाय को शुरू करने में आने वाला खर्चा इसके आकार, उत्पादन क्षमता इत्यादि पर निर्भर करेगा। तो आइये जानते हैं कैसे कोई व्यक्ति खुद का पोहा बनाने का व्यवसाय शुरू कर सकता है ।

1. स्थानीय स्तर पर रिसर्च करें

Poha Manufacturing Business शुरू करने वाले उद्यमी को सर्वप्रथम जिस एरिया में वह यह व्यवसाय शुरू करने वाला है वहां पर विभिन्न बातों को स्पष्ट करने के लिए रिसर्च करना बेहद आवश्यक है। इसमें पहली बात तो यह है की यदि उद्यमी पूर्वी या उत्तरी भारत से है तो उसे इस बात पर रिसर्च करनी होगी की जिस एरिया में वह यह व्यवसाय शुरू करने की सोच रहा है वहां पर पोहे की मांग कितनी है। इसका अंदाजा उद्यमी को वहां पर निवासित लोगों की खान पान की आदतों से लग जाएगा। ध्यान रहे शुरूआती दौर में उद्यमी के पास इतना पैसा नहीं होता की वह अपने उत्पाद को सैकड़ों किलोमीटर दूर तक बेच पाने में सफल हो, इसलिए स्थानीय स्तर पर उत्पाद की मांग होना अति आवश्यक है। इसके अलावा उसे इस बात पर भी रिसर्च करनी होगी की क्या उसे धान यानिकी कच्चा माल आसानी से मिल जायेगा या नहीं।  यदि उस एरिया विशेष में धान की फसल अच्छी होती हो तो इसमें कोई दो राय नहीं की उद्यमी को कच्चा माल आसानी से उचित दरों पर उपलब्ध हो जायेगा, यदि नहीं होती हो तो इसमें दिक्कतें आ सकती हैं।      

2. प्लांट के लिए जगह का प्रबंध (Land & Building for Poha Manufacturing)

Poha manufacturing Business स्थापित करने के लिए उद्यमी का अगला कदम प्लांट के लिए जगह का प्रबंध करने का होना चाहिए। ध्यान रहे यह जगह किसी इंडस्ट्रियल एरिया या नॉन एग्रीकल्चर भूमि में कहीं भी हो सकती है और वहां पर बिजली, पानी, सड़क जैसी आधरभूत सुविधाओं का होना अत्यंत आवश्यक है। ग्रामीण एरिया में उद्यमी को बड़ी सी जगह भी आसान एवं सस्ती दरों पर आसानी से उपलब्ध हो जाएगी, इसके लिए यदि उद्यमी की खुद की जगह है तो बेहतर है अन्यथा उद्यमी को लम्बे समय के लिए जगह लीज पर लेनी चाहिए। क्योंकि इस तरह के व्यवसायों को स्थापित एवं मुनाफा कमाने में लम्बा समय लग सकता है। लीज इत्यादि सम्बन्धी सभी औपचारिक एवं कागज़ी कार्यवाही का होना भी नितांत आवश्यक है। एक आंकड़े के मुताबिक इस व्यवसाय के लिए 200 Square Meter जगह उपयुक्त रहेगी।      

3. आवश्यक लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन

जहाँ तक आवश्यक लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन की बात है उद्यमी को अपना Poha Manufacturing Business  रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज में रजिस्टर करने की आवश्यकता होती है । उसके बाद टैक्स रजिस्ट्रेशन, फैक्ट्री एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन, स्थानीय प्राधिकरण इत्यादि से ट्रेड लाइसेंस, बैंक में चालू खाता, फ़ूड लाइसेंस इत्यादि की भी आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा अपशिष्ट निबटान के लिए भी उचित कदम उठाने की आवश्यकता होगी, ताकि फैक्ट्री में किसी प्रकार का कोई प्रदूषण उत्सर्जित न हो। कमर्शियल विद्युत् एवं वाटर कनेक्शन की भी आवश्यकता होगी।  

4. मशीनरी, एवं उपकरणों की खरीदारी

यद्यपि Poha Manufacturing Business के लिए इस्तेमाल में लायी जाने वाली मशीनरी एवं उपकरणों की लिस्ट प्लांट के आकार, क्षमता के आधार पर अंतरित हो सकती है। क्योंकि इस व्यवसाय को शुरू करने में बहुत सारी मशीनरी एवं उपकरण ऐसे होते हैं जिनके विकल्प के तौर पर मैन्युअली भी काम को निष्पादित किया जा सकता है। जहाँ तक मशीनरी एवं उपकरणों के सप्लायर का सवाल है उद्यमी चाहे तो इंडियामार्ट, ट्रेड इंडिया एवं अन्य ऑनलाइन वेबसाइट की मदद से सप्लायर को ढूंढ सकता है और उनसे संपर्क साधकर उनसे अपनी आवश्यकतानुसार कोटेशन इत्यादि मंगवा सकता है।  Poha Manufacturing Business में प्रयुक्त होने वाली कुछ प्रमुख मशीनरी एवं उपकरणों की लिस्ट निम्नवत है।

  • डी स्टोनर: डी स्टोनर का इस्तेमाल कच्चे माल यानिकी धान से मिटटी, कंकड़ इत्यादि को दूर करने के लिए किया जाता है। लेकिन यदि उद्यमी का बजट अधिक नहीं है तो वह मैन्युअली भी यह काम कर सकता है।
  • पैडी क्लीनर : पैडी क्लीनर का इस्तेमाल धान से धूल, तिनके बजरी इत्यादि अशुद्धियों को दूर करने के लिए किया जाता है। लेकिन बजट न होने की स्थिति में मजदूरों की मदद से इस क्रिया को भी मैन्युअली अंजाम दिया जा सकता है।
  • एलीवेटर: एलीवेटर का इस्तेमाल प्रोसेसिंग के दौरान धान को लिफ्ट करने के लिए किया जाता है। इस क्रिया को भी मैन्युअली किया जा सकता है।
  • सोकिंग टैंक्स: इन टैंक्स में कच्चे माल यानिकी धान को भिगोने के लिए रखा जाता है इन टैंक्स में धान लगभग दस घंटों तक भिगोया जाता है। वैसे इसके लिए टैंक की जगह बड़े बर्तनों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • रोस्टिंग मशीन : इस मशीन का इस्तेमाल धान या कच्चे माल को एक जैसा भूनने के लिए किया जाता है इस मशीन को चूरा, भूसी या फिर कच्चे तेल के माध्यम से गर्म किया जाता है। उद्यमी चाहे तो इस क्रिया को चूल्हे एवं बड़े बर्तन की सहायता लेकर भी कर सकता है।
  • फ्लैटनिंग मशीन: इस मशीन के माध्यम से धान को चपटा किया जाता है।  
  • छलनी : छलनी की मदद से पोहा से भूसी एवं पोहा चूरा को अलग कर दिया जाता है।
  • कन्वेयर बेल्ट : कन्वेयर बेल्ट की मदद से छने हुए पोहे को फ्लेकिंग मशीन की ओर अग्रसित किया जाता है। Poha Manufacturing Business करने वाला उद्यमी चाहे तो यह प्रक्रिया मैन्युअली भी की जा सकती है।
  • फ्लेकिंग मशीन : यह मशीन पोहे को और अच्छा बनाने के लिए और चपटा करती है।
  • सीलिंग मशीन: इसका इस्तेमाल पोहे के पैकेट को सील करने के लिए किया जाता है ।
  • भार मापने की मशीन             

5. कच्चे माल की खरीदारी (Raw Material for Poha Manufacturing)

मशीनरी एवं उपकरणों की खरीदारी के बाद Poha Manufacturing Business करने के लिए उद्यमी का अगला कदम कच्चे माल की खरीदारी का होना चाहिए। और ध्यान रहे कच्चे माल की खरीदारी यानिकी धानों की खरीदारी उद्यमी को सीधे किसानों से ही करनी चाहिए। इसके लिए उद्यमी उस एरिया में स्थित किसानों से संपर्क कर सकता है। हालांकि शुरूआती दौर में उद्यमी पूरे एक साल के लिए कच्चा माल खरीद पाने में असमर्थ होगा क्योंकि उसके पास इतने पैसे खर्च करने को नहीं होंगे की वह पूरे एक साल के लिए कच्चा माल खरीद सके। इसलिए उद्यमी को जितना वह खरीद सकता है उतना कच्चा माल ही खरीदना चाहिए क्योंकि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में धान हमेशा उपलब्ध रहता है। लेकिन उस दौरान हो सकता है की उद्यमी को थोड़े महंगे दामों में यह मिले।    

6. निर्माण कार्य शुरू (Start Poha manufacturing Process)

अब यदि उद्यमी ने सभी कार्य पूर्ण कर लिए हों यहाँ तक की कर्मचारियों की नियुक्ति भी कर ली हो तो उसके बाद Poha Manufacturing Business कर रहे उद्यमी का अगला कदम अपनी फैक्ट्री में नियमों के मुताबिक निर्माण कार्य शुरू करने का होना चाहिए। पोहा निर्माण के कुछ प्रमुख स्टेप इस प्रकार से हैं।

  • सबसे पहले कच्चे माल यानिकी धान से कंकड़, पत्थर, धूल, मिटटी, बजरी, भूसी इत्यादि सभी प्रकार की अशुद्धियों को दूर कर लिया जाता है।
  • उसके बाद धान को सोकिंग टैंक में भिगोया जाता है और लगभग छह घंटे बाद जब धान सब पानी पी लेते हैं यानिकी पानी शुष्क हो जाता है तो उसके बाद भी दस घंटे तक इन्हें स्टोर करके रखा जाता है।
  • पानी शुष्क होने के दस घंटों के बाद इन्हें रोस्टिंग टैंक में एक समान भूनने के लिए भेज दिया जाता है ।
  • उसके बाद धान को फ्लेटनिंग मशीन की मदद से चपटा कर दिया जाता है जिससे धान का भूसा और पोहा चूरा की उत्पति होती है ।
  • अब इसे एक छलनी में डाला जाता है जहाँ से पोहा, धान का भूसा और पोहा चूरा को अलग अलग कर दिया जाता है ।
  • उसके बाद साफ़ पोहे को एक बार फिर फ्लेकिंग मशीन में और अधिक चपटा करने के लिए डाला जाता है जिसके बाद तोलकर इसे पैक कर दिया जाता है।  

उत्पाद की मार्केटिंग एवं बेचना

अपने उत्पाद की मार्केटिंग के लिए उद्यमी अनेकों तरह के पारम्परिक एवं नए ऑनलाइन मार्केटिंग के तरीके अपना सकता है। ऑनलाइन मार्केटिंग के जरिये भी उद्यमी केवल और केवल अपने टारगेट ग्राहकों को ही टारगेट कर सकता है जिससे कम पैसे खर्च करके उद्यमी अधिक से अधिक रेवेन्यु जुटाने में सफल हो पायेगा। Poha Manufacturing Business करने वाले उद्यमी को अपने एरिया में प्रत्येक जनरल स्टोर, सुपर मार्किट, स्थानीय बाजार इत्यादि में जाकर अपने उत्पाद को प्रमोट करना होगा शुरूआती दौर में उद्यमी को किराना स्टोर एवं होटल ढाबों इत्यादि को रिझाने के लिए अनेकों योजनायें भी चलानी पड़ सकती हैं। ताकि अपने फायदे को देखते हुए लोग उद्यमी के पोहा को खरीदने में दिलचस्पी दिखाएँ। और जनरल स्टोर, सुपर मार्किट इत्यादि को यदि मार्जिन अधिक दिखेगा तो वे भी उद्यमी के उत्पाद को ग्राहकों को बेचने एवं प्रदर्शित करने में अवश्य दिलचस्पी दिखायेंगे। 

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