Milk Powder बनाने का बिजनेस शुरू करने के लिए उठायें ये आसान कदम।

Milk Powder यानिकी दूध पाउडर से तो आप सभी अच्छी तरह से अवगत होंगे जी हाँ दोस्तों इस उत्पाद का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के पेय जैसे चाय, कॉफ़ी इत्यादि बनाने के लिए किया जाता है। जैसा की हम सब जानते हैं की तरल दूध बेहद कम समय में खराब हो जाता है लेकिन इसके बावजूद भी शहरों में पैकेज्ड तरल दूध का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता रहा है।

लेकिन बात जब Milk Powder या दूध पाउडर की आती है तो इसे लम्बे समय तक इस्तेमाल में लाया जा सकता है यही कारण है की वर्तमान में विभिन्न आयोजनों जैसे शादी, जन्मदिन पार्टी, सालगिरह पार्टी, जन्म होने की पार्टी इत्यादि अवसरों पर चाय, कॉफ़ी इत्यादि पेय बनाने के लिए मिल्क पाउडर का ही इस्तेमाल किया जाता है।

इसलिए वर्तमान समय में जब शहरी इलाकों तक तरल दूध पहुँचाना एक चुनौती बनी हुई है ऐसे में यदि कोई उद्यमी मिल्क पाउडर बनाने का बिजनेस शुरू करता है तो यह उसके लिए एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में सामने आ सकता है। इससे पहले की हम इस व्यवसाय को शुरू करके की प्रक्रिया के बारे में बात करें आइये जानते हैं की यह Milk Powder Manufacturing व्यवसाय होता क्या है।

milk powder banane ka business

मिल्क पाउडर निर्माण क्या है (What is Milk Powder Manufacturing Business): 

Milk Powder की यदि हम बात करें तो इसमें कैल्शियम की मात्रा तो भरपूर होती ही है साथ में यह पोषक तत्वों से भी समृद्ध होता है। दूध में आम तौर पर फॉस्फोरस, प्रोटीन, पोटेशियम, विटामिन ए, इत्यादि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

वैसे देखा जाय तो मिल्क पाउडर डेयरी उत्पाद जैसे दूध से ही निर्मित एक उत्पाद है इसे तरल दूध को निर्जलित करके बनाया जाता है और जब तक तरल दूध पाउडर नहीं बन जाता तब तक उसे विभिन्न प्रक्रियाओं से होकर गुजरना पड़ता है। कहने का आशय यह है की Milk Powder का निर्माण तरल दूध को डीहाइड्रेट करके ही किया जाता है ।

इसलिए इस ड्राई मिल्क की संरचना जिस तरल दूध से यह बनाया जा रहा है उसकी सरंचना के अनुसार अलग अलग हो सकती है। जब किसी उद्यमी द्वारा अपनी कमाई को ध्यान में रखते हुए व्यवसायिक तौर पर इस तरह का यह कार्य किया जाता है तो उसके द्वारा किया जाने वाला यह कार्य ही Milk Powder Manufacturing Business कहलाता है।

इस्तेमाल एवं बिक्री संभाव्यता

Milk Powder के इस्तेमाल की यदि हम बात करें तो इसे घरेलू और व्यवसायिक दोनों स्तर पर इस्तेमाल में लाया जाता है। घरेलू इस्तेमाल के तौर पर इसे प्रमुख रूप से चाय, कॉफ़ी एवं अन्य पेय जिनमें दूध की आवश्यकता होती है उनमें इस्तेमाल में लाया जाता है।

जबकि व्यवसायिक या औद्योगिक स्तर पर इसका इस्तेमाल चॉकलेट इंडस्ट्री में मिल्क चॉकलेट और आइसक्रीम बनाने के लिए भी किया जाता है इसके अलावा इसका इस्तेमाल एक बेहद पोषक पशु आहार के तौर पर भी किया जाता है।

यही कारण है की वैश्विक स्तर पर इस उत्पाद का एक बेहद ही व्यापक बाजार पहले से स्थापित है और इसे लगभग हर आयु वर्ग के लोगों द्वारा इस्तेमाल में लाया जाता है लेकिन बच्चों द्वारा इसे विशेष तौर पर पसंद किया जाता है।

एक आंकड़े के मुताबिक भारतीय स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) बाजार की 2011 से 2018 तक बढ़ने की गति 10% CAGR रही। जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है की आने वाले समय में भी Milk Powder की मांग लगतार बढती रहेगी।

मिल्क पाउडर निर्माण बिजनेस कैसे शुरू करें (How to Start Milk Powder Manufacturing Business):

Milk Powder Manufacturing के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल तरल दूध ही है और जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में भी बता चुके हैं की तरल दूध की संरचना के आधार पर मिल्क पाउडर की संरचना भी अंतरित हो सकती है । इसलिए दूध जितना शुद्ध होगा मिल्क पाउडर भी उतनी अच्छी गुणवत्ता का निर्मित होगा।

इसलिए इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक उद्यमी को चाहिए की वह अपने व्यवसाय के लिए किसी ऐसी लोकेशन का चुनाव करे जहाँ उसे शुद्ध दूध उचित दामों पर आसानी से उपलब्ध हो जाय। और यह उसी इलाके या क्षेत्र में संभव है जहाँ लोग पशु पालन, डेरी फार्मिंग जैसे काम करते हों। इसके अलावा भी उद्यमी को अनेक प्रक्रियाओं से होक गुजरना पड़ सकता है यहं पर आगे हम इन्हीं स्टेप के बारे में संक्षेप में जानने का प्रयत्न कर रहे हैं।

1. जमीन का प्रबंध करें

यद्यपि जमीन का प्रबंध करने में उद्यमी को एक महीने या फिर इससे भी अधिक समय लग सकता है क्योंकि उद्यमी को अपनी व्यवसायिक योजना के मुताबिक ही जमीन का प्रबंध करने की आवश्यकता होती है ।

उद्यमी के प्लांट की क्षमता यदि अधिक होगी तो इसमें कोई दो राय नहीं की उसे अधिक संसाधनों की आवश्यकता होगी जिसके लिए उसे अधिक जमीन का प्रबंध करना होगा। लेकिन जमीन का प्रबंध उद्यमी को उसी लोकेशन पर करना चाहिए जहाँ पर उसे लगता है की उसे Milk Powder निर्माण करने के लिए तरल दूध आसानी से और उचित दामों में मिल जायेगा।

वैसे शुरूआती दौर में उद्यमी इस तरह का यह व्यवसाय एक बड़ा सा हाल किराये पर लेकर भी शुरू कर सकता है। जमीन का प्रबंध कहीं भी जहाँ सड़क, बिजली, पानी इत्यादि की उचित व्यवस्था हो की जा सकती है क्योंकि इसके लिए यह जरुरी नहीं है की इस तरह की यह इकाई किसी रिहायशी इलाके या फिर स्थानीय बाजार में ही हो।  

2. वित्त का प्रबंध करें

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की Milk Powder Manufacturing Business शुरू करने में आने वाला खर्चा इस बात पर निर्भर करता है की उद्यमी किस स्तर का प्लांट स्थापित करना चाहता है। क्योंकि अधिक क्षमता वाला प्लांट स्थापित करने के लिए उद्यमी को अधिक संसाधनों की आवश्यकता होगी तो निवेश भी बढ़ जायेगा।

इसलिए सर्वप्रथम उद्यमी को चाहिए की वह अपने व्यवसाय के लिए बिजनेस प्लान या फिर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर ले। बिजनेस प्लान में जहाँ बिजनेस को शुरू करने से लेकर, उसे सफलतापूर्वक कैसे चलाया जा सकता है इत्यादि का पूरा ब्यौरा रहता है वहीँ प्रोजेक्ट रिपोर्ट इसी बिजनेस प्लान का एक हिस्सा होती है।

जिसमें अनुमानित लागत से लेकर अनुमानित कमाई तक सबका ब्यौरा उल्लेखित होता है। इसलिए उद्यमी तभी सटीक रूप से वित्त का प्रबंध करने में सक्षम हो पायेगा जब उसे प्रोजेक्ट रिपोर्ट या बिजनेस प्लान के माध्यम से अनुमानित लागत की जानकारी होगी । वित्त का प्रबंध करने के लिए उद्यमी के पास सरकारी सब्सिडी योजनायें, स्वयं की व्यक्तिगत बचत, बैंक ऋण, वेंचर कैपिटल इत्यादि विकल्प मौजूद हैं ।     

3. लाइसेंस और पंजीकरण

Milk Powder manufacturing शुरू करने के लिए उद्यमी निम्नलिखित लाइसेंस और पंजीकरण करवा सकता है ।

  • अपने व्यवसाय को प्रोप्राइटरशिप के तहत रजिस्टर करा सकता है।
  • इनवॉइस और बिलिंग के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन करा सकता है।
  • बैंक में अपने व्यवसाय के नाम से चालू खाता खुलवा सकता है ताकि सभी प्रकार के वित्तीय लेन- देन आसानी से पूर्ण किये जा सकें।
  • खाद्य और पेय से जुड़ा व्यवसाय होने के कारण फ़ूड लाइसेंस की भी आवश्यकता हो सकती है जिसे उद्यमी FSSAI की अधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन भी अप्लाई कर सकता है।
  • स्थानीय प्राधिकरण जैसे नगर निगम इत्यादि से ट्रेड लाइसेंस भी ले सकता है।
  • एमएसएमई सेक्टर के लिए शुरू की गई योजनाओं का लाभ लेने के लिए उद्योग आधार एवं एमएसएमई डाटा बैंक रजिस्ट्रेशन भी करवा सकता है ।
  • अपना ब्रांड स्थापित करने और उसकी सुरक्षा के लिए ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन भी करवा सकता है।     

4. मशीनरी और कच्चा माल

Milk Powder Manufacturing में इस्तेमाल में लायी जाने वाली मशीनरी प्लांट की उत्पादन क्षमता पर ही निर्भर करती है । और यह इस व्यवसाय को शुरू करने में आने वाली लागत का एक अहम् हिस्सा है इसलिए उद्यमी को विभिन्न सप्लायर से नेगोसिएशन करने के बावजूद ही किसी अच्छे सप्लायर का चुनाव इन्हें खरीदने हेतु करना चाहिए। कुछ प्रमुख मशीनरी और उपकरणों की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • स्टोरेज टैंक
  • फीड पंप
  • प्री- कंडेंसर
  • एटमोजर के साथ स्प्रे ड्रायर
  • कंडेंसर
  • बेबी बायलर
  • चिल्लिंग प्लांट
  • पैकिंग यूनिट
  • लेबोरेटरी टेस्टिंग उपकरण
  • अन्य उपकरण  

Milk Powder manufacturing व्यवसाय में इस्तेमाल में लाये जाने वाले कच्चे माल की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है।

  • मिल्क
  • सिट्रिक एसिड
  • मैग्नीशियम ऑक्साइड
  • अन्य केमिकल NACL, CACO3
  • पैकिंग सामग्री जैसे टिन कंटेनर

मिल्क पाउडर निर्माण शुरू करना (Manufacturing process of Milk Powder)  

तरल दूध से Milk Powder बनाने के लिए इसे अनेकों प्रक्रियाओं से होकर गुजरना पड़ता है जिनकी स्टेप बाई स्टेप जानकारी इस प्रकार है।

1. अलग करना और मानकीकरण करना

इस प्रक्रिया को शुरू करने से पहले उपर्युक्त बताये गए सभी कच्चे माल को फैक्ट्री तक पहुंचा दिया जाता है और फिर सेंट्रीफ्यूगल क्रीम सेपरेटर दूध से क्रीम और स्किम मिल्क को अलग कर दिया जाता है। इसके बाद थोड़ा सा क्रीम स्किम दूध में मिलाया जाता है ताकि उसमें बसा की मात्रा बनी रहे।

2. प्रीहीटिंग प्रक्रिया:

पृथक्कीकरण और मानकीकरण प्रक्रिया के बाद प्रीहीटिंग प्रक्रिया प्रारम्भ की जाती है इस प्रक्रिया में दूध को 75 से 120 ° C तक के तापमान पर गर्म किया जाता है। और यह प्रक्रिया भाप इंजेक्शन के माध्यम से, हीट एक्सचेंजर्स के माध्यम से या फिर दोनों की मिश्रण पद्यति से की जा सकती है ।

3. वाष्पीकरण की प्रकिया

Milk Powder Manufacturing के लिए अगली वाष्पीकरण की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है इस प्रक्रिया में दूध को विभिन्न स्तर पर केन्द्रित किया जाता है। इस प्रक्रिया में दूध को ऊर्ध्वाधर ट्यूबों में 72 ° C से नीचे के तापमान पर एक वैक्यूम के अंतर्गत उबाला जाता है। और इसी प्रक्रिया में दूध से पानी को वाष्पीकरण के माध्यम से हटा लिया जाता है।

4. स्प्रे ड्राइंग

इस विधि ने दूध को एटमाइज्ड किया जाता है और इसे वाष्पीकरण से बारीक बूंदों में परिवर्तित कर दिया जाता है। उसके बाद इसे एक हॉट चैम्बर में रखा जाता है जहाँ गर्म हवा का उचित फ्लो इसे सुखाने का कार्य करता है । उसके बाद दूध की बूंदों को वाष्पीकरण के माध्यम से ही ठंडा किया जाता है।

5. पैकेजिंग और स्टोरेज  

Milk Powder Manufacturing Process में अंतिम प्रक्रिया पैकिंग और स्टोर करने की है हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं की मिल्क पाउडर ताजे दूध की तुलना में बहुत अधिक समय तक इस्तेमाल में लाया जा सकता है। लेकिन लम्बे समय तक यह ख़राब न हो इसके लिए इसे नमी, ऑक्सीजन, प्रकाश और गर्मी से सुरक्षा देना आवश्यक होता है। इसलिए इनकी पैकिंग के लिए प्लास्टिक बैग या फिर टिन के डिब्बे इस्तेमाल में लाय्रे जा सकते हैं। 

अन्य भी पढ़ें

मिल्क चॉकलेट बनाने का व्यवसाय कैसे शुरू करें?

पॉपकॉर्न बनाने का व्यापार कैसे शुरू करें ?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *