मिल्क चॉकलेट बनाने का बिजनेस। Milk Chocolate Business plan in Hindi.

वर्तमान में चॉकलेट नामक इस खाद्य पदार्थ से, हर कोई अच्छे से अवगत होगा। Milk Chocolate भी इसी खाद्य पदार्थ की एक लोकप्रिय किस्म है। कहने का आशय यह है की, वर्तमान में चॉकलेट नामक यह मीठा खाद्य पदार्थ, लगभग सभी आयु वर्ग के लोगों में खासा लोकप्रिय है। बच्चे तो एक बार इसे खाने की जिद पकड़ लेते हैं। तो फिर उनके जिद के आगे हर माँ–बाप को झुकना ही पड़ता है। इसलिए वर्तमान में बाज़ारों में, चॉकलेट विभिन्न फ्लेवर में मौजूद है। और ताज्जुब की बात यह है की, चॉकलेट सिर्फ किरयाना स्टोर में मौजूद नहीं होती। बल्कि हलवाई की दुकानों, बेकरी, पेस्ट्री इत्यादि की दुकानों में भी तरह तरह के स्वाद वाली चॉकलेट मौजूद रहती हैं।

विशेष तौर पर इसे बच्चे बेहद पसंद करते हैं। और अंतराष्ट्रीय बाजार में दशकों से इसका हजारों करोड़ रुपयों का कारोबार चला रहा है। कहने का आशय यह है, की विकासशील देशों से लेकर विकसित देशों तक में इसका व्यापार दशकों से चला आ रहा है। अंतराष्ट्रीय बाज़ारों में चॉकलेट, विभिन्न स्वरूपों में बिकती है। इनमें Milk Chocolate एक प्रमुख स्वरूप है। चॉकलेट में कोम्लेक्सिसिटी, और फ्लेवर के महान स्तर होते हैं। इसे कोको ट्री पर लगने वाले फल से बनाया जाता है। इस फल के और भी इस्तेमाल होते हैं, जैसे इसे विभिन्न प्रकार के पेय, और कन्फेक्शनरी उद्योग में भी, इस्तेमाल में लाया जाता है।

चॉकलेट खाने के कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। और इसका स्वाद तो हर किसी को पसंद आता ही है। यही कारण है की वैश्विक स्तर पर इसकी बहुत अधिक मांग है। और वह भी खास तौर पर दूध से बनायीं जाने वाली Milk Chocolate की। कभी कभी चॉकलेट का इस्तेमाल किसी व्यक्ति के अन्दर छुपी घबराहट, और बुरी भावनाओं को दूर करने के लिए भी किया जाता है। इसके अलावा, इनका उपयोग उपहार के तौर पर भी किया जाता है। जिससे दो परिवारों या दो व्यक्तियों के बीच सम्बन्ध, मजबूत होते हैं। इसलिए आज हम इस लेख के माध्यम से, Milk Chocolate बनाने के व्यवसाय के बारे में, जानकारी देने का प्रयास कर रहे हैं।

Milk Chocolate business plan hindi

उपयोग और बाजार  

चॉकलेट के उपयोग की यदि हम बात करें तो, वैश्विक स्तर पर इसे बच्चे बेहद पसंद करते हैं। इसके अलावा भोजन के बाद खायी जाने वाली, यह एक आम मिठाई भी है। जिस घर में छोटे बच्चे होते हैं, वहां पर आने वाले मेहमान भी, अक्सर चॉकलेट लेकर ही उनके घर पहुँचते हैं। क्योंकि बच्चों को यह बहुत अधिक पसंद होती हैं। इसके अलावा वर्तमान में, चॉकलेट का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर विभिन्न कल कारखानों में, चॉकलेट केंडी बनाने के लिए भी किया जा रहा है। हमारे देश भारत में त्योहारों, और कई अन्य शुभ अवसरों पर चॉकलेट को उपहार के तौर पर, देने का रिवाज सा चल पड़ा है।

कभी कभी चॉकलेट चबाने से अच्छा सेंसेशन पैदा होता है। जिसका मतलब यह है, की कभी कभी चॉकलेट चबाना अच्छी सेंसेशन का कारण बनता है। एक आंकड़े के मुताबिक भारत में, एक वर्ष में लगभग, 650 करोड़ रूपये की चॉकलेट बिक्री होती है। और यहाँ पर प्रति वर्ष लगभग 22000 टन से 24000 टन चॉकलेट का निर्माण किया जाता है। इसमें सिर्फ Milk Chocolate नहीं, बल्कि सभी प्रकार की चॉकलेट शामिल हैं। चॉकलेट की लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं, की भले ही आप भारत या दुनिया के किसी भी कोने से हों, लेकिन आपने अपने आस पास किरयाना स्टोरों, मिठाई की दुकानों, बेकरी पेस्ट्री की दुकानों इत्यादि में चॉकलेट बिकते हुए देखी होगी।

जी हाँ कहने का आशय यह है की चाहे Milk Chocolate हो, या चॉकलेट का कोई अन्य स्वरूप, शहरी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक बड़ी मात्रा में बिकता है। इसलिए इस तरह का यह बिजनेस शुरू करना, किसी भी उद्यमी के लिए पैसे कमाने की दृष्टी से लाभकारी हो सकता है। वैसे तो आज लोग घर में भी चॉकलेट बनाने के अनेकों तरीके बता देते हैं। लेकिन वे तरीके, घर में इस्तेमाल तक ही ठीक होते हैं।  क्योंकि उन तरीकों को अपनाकर, उद्यमी व्यवसायिक तौर पर अपने ग्राहकों की मांगों के अनुरूप, चॉकलेट न तो मात्रा में बना पायेगा, और न ही गुणवत्ता में। इसलिए आगे हम यही बताने का प्रयास करेंगे, की कोई इच्छुक व्यक्ति खुद का मिल्क चॉकलेट बनाने का व्यवसाय कैसे शुरू कर सकता है।

मिल्क चॉकलेट बनाने का व्यापार कैसे शुरू करें? (How to Start Milk Chocolate Making Business):

हालांकि Milk Chocolate बनाने का व्यापार, उद्यमी चाहे तो अपने घर के किसी खाली कमरे से भी शुरू कर सकता है। लेकिन यहाँ पर हमारा उद्देश्य, घर से इस तरह का व्यवसाय शुरू करने के बारे में जानकारी देने का नहीं। बल्कि व्यवसायिक तौर पर इस तरह का व्यवसाय, किसी किराये वाली जगह से कैसे शुरू कर सकते हैं, के बारे में बताना है। इसलिए इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करने के लिए भी, उद्यमी को वे सभी प्रक्रियाएं पूर्ण करनी होंगी, जो किसी अन्य विनिर्माण बिजनेस को शुरू करने के लिए करनी पड़ सकती हैं। तो आइये स्टेप बाई स्टेप जानते हैं, की कैसे कोई व्यक्ति खुद का चॉकलेट बनाने का व्यापार शुरू कर सकता है।

1. प्रशिक्षण प्राप्त करें

यद्यपि कई ऐसे लोग होंगे, जिन्हें चॉकलेट बनाना पहले से आता होगा। यानिकी वे अपने रसोईघर में चॉकलेट बना देते होंगे। लेकिन सवाल यह उठता है, की जो लोग अपने घरों में चॉकलेट बना लेते हैं, क्या वे व्यवसायिक मशीनरी का इस्तेमाल करके भी, चॉकलेट का निर्माण कर सकते हैं?। इस प्रश्न का जवाब कोई निश्चित नहीं हो सकता, कुछ लोग हो सकता है, मशीनरी का इस्तेमाल करके चॉकलेट का निर्माण कर भी दें। लेकिन अधिकतर लोग शायद ही ऐसा कर पायें।  इसलिए Milk Chocolate बनाने का बिजनेस शुरू करने वाले, उद्यमी को चाहिए की, वह सबसे पहले व्यवसायिक मशीनरी से इस तरह की चॉकलेट का निर्माण कैसे किया जा सकता है, का प्रशिक्षण प्राप्त करे।

प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए, उद्यमी सरकारी प्रशिक्षण केन्द्रों, जिला उद्योग केन्द्रों या फिर प्राइवेट संस्थानों की मदद, ले सकता है। या फिर उद्यमी चाहे तो किसी चॉकलेट बनाने वाली फैक्ट्री में, काम करके इस बिजनेस के बारे में, अन्य जानकारी भी प्राप्त कर सकता है। ताकि बाद में उसे अधिक चुनौतियों का सामना, नहीं करना पड़े।     

2. दुकान किराये पर लें (Rent a Shop for Making Milk Chocolate)

यद्यपि Milk Chocolate बनाने का बिजनेस शुरू करने के लिए, यह जरुरी नहीं है, की उसकी यह इकाई किसी भीड़ भाड़, या स्थानीय मार्किट में ही होनी चाहिए। उद्यमी अपनी सुविधानुसार, कहीं भी, ऐसी जगह में, इस इकाई की स्थापना कर सकता है। जहाँ पर बिजली, पानी, सड़क, श्रमिकों इत्यादि की आसान उपलब्धता हो। हो सकता है, की उद्यमी को, एक औसत जगह की दुकान से, अधिक बड़ी दुकान की आवश्यकता हो। इसलिए उद्यमी अपनी आवश्यकतानुसार चाहे तो, पूरी बनी बनाई बिल्डिंग भी किराये पर ले सकता है।   

3. वित्त का प्रबंध करें

वित्त का प्रबंध करने से पहले, उद्यमी को चाहिए की वह उस क्षेत्र विशेष में चल रही उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की योजनाओं के बारे में, जानकारी प्राप्त कर ले। क्योंकि राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा, देश और राज्य में, वह भी खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में, रोजगार पैदा करने वाले उद्यमियों के लिए अनेकों सब्सिडी योजनायें भी चालू होती हैं। इसलिए Milk Chocolate बनाने का व्यवसाय शुरू करने वाले उद्यमी को, वित्त का प्रबंध करने के लिए, सरकारी सब्सिडी ऋण योजनाओं के बारे में जानकारी, अवश्य प्राप्त करनी चाहिए। इसके अलावा उद्यमी बैंक ऋण, और अपनी व्यक्तिगत बचत से भी, वित्त का प्रबंध कर सकता है।    

4. लाइसेंस और पंजीकरण

Milk Chocolate बनाने का व्यवसाय शुरू करने वाले उद्यमी को, निम्नलिखित लाइसेंस और पंजीकरण की आवश्यकता हो सकती है।

  • प्रोप्राइटरशिप फर्म के तौर पर रजिस्ट्रेशन ।
  • जीएसटी रजिस्ट्रेशन।
  • उद्यम रजिस्ट्रेशन।
  • स्थानीय प्राधिकरण लाइसेंस और पंजीकरण।
  • एफएसएसएआई लाइसेंस।
  • ब्रांड नाम और ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन।

5. मशीनरी और कच्चा माल खरीदें (Machinery for Milk Chocolate Making)

Milk Chocolate बनाने के व्यापार के लिए, निम्निल्खित मशीनरी और उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

  • चॉकलेट Molding Machine
  • Tempering मशीन
  • चॉकलेट Grinding मशीन
  • आटोमेटिक रोस्टिंग मशीन
  • चॉकलेट रेफ्रीजिरेटर
  • चॉकलेट मिक्सर
  • अन्य उपकरण और हैण्ड टूल्स

कच्चे माल की लिस्ट (Raw Material for making milk Chocolate)

  • कोको
  • कोको बटर
  • सुगर
  • लेसिथिन
  • वैनिला
  • मिल्क पाउडर
  • पैकिंग सामग्री   

6. निर्माण कार्य शुरू करें (Start Making Process of Milk Chocolate)     

Milk Chocolate Manufacturing Process में, सबसे पहले कोको बीन्स में स्वाद बढ़ाने, और रंग को विकसित करने के लिए, कोको बीन्स को भुन लिया जाता है। कोको बीन्स को भूनने के बाद, इनके बाहरी आवरण को हटा लिया जाता है। और आंतरिक बीन्स को, जिन्हें कोको निब्स के नाम से जाना जाता है, इन्हें टुकड़ों में तोड़ लिया जाता है। उसके बाद इन कोको निब्स को, छलनी की एक सीरिज के माध्यम से, पारित किया जाता है। जो इनके आकार के आधार पर इन्हें अलग करता है। इस प्रक्रिया को winnowing कहा जाता है। उसके बाद कोको निब्स को, Chocolate ग्राइंडिंग मशीन में डाला जाता है। जहाँ यह मशीन इन्हें पीसकर, पाउडर का स्वरूप प्रदान कर देती है। और साथ ही इसी मशीन के अन्दर यह पाउडर पिघल जाता है।

इस पिघले हुए रूप को, कोको लिकर कहा जाता है। उसके बाद इस कोको लिकर में, और चीजें मिलाने के लिए मिक्सर मशीन की मदद ली जाती है। यह मिश्रण प्रक्रिया धीमी और लम्बी होती है। ताकि एक समान, यानिकी समरूप मिश्रण को, प्राप्त किया जा सके। Milk Chocolate Manufacturing Process में, आगे मिक्सिंग मशीन से प्राप्त ब्लेंड को, और अधिक परिष्कृत किया जाता है। ताकि मिलाई गई चीनी के कणों को, महीन किया जा सके। उसके बाद इस मिश्रण को कोको लिकर, चीनी, दूध पाउडर, कोको बटर एवं अन्य संरक्षक पदार्थों के साथ, अच्छी तरह से मिलाया जाता है।

ब्लेंडिंग प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद, चॉकलेट मौल्डिंग प्रक्रिया, इसमें सबसे अंतिम प्रक्रिया है। इसके लिए इसे चॉकलेट मौल्डिंग मशीन में डाला जाता है। जहाँ यह उपयुक्त आकार लेकर, ठंडी और सख्त हो जाती है। उसके बाद इनकी पैकिंग करके, इन्हें बाजार में बेचने के लिए उतार दिया जाता है।

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