बकरियों की नस्लें एवं विशेषताएं । Goat Breeds Information in Hindi.

बकरियों की नस्ल अर्थात Goat Breeds की जानकारी देना इसलिए बेहद जरुरी हो जाता है की बिना इनकी जानकारी के कोई भी व्यक्ति जो बकरी पालन व्यवसाय करने की सोच रहा हो अच्छी प्रोडक्टिव नस्ल का चुनाव करने में अक्षम होगा । इसलिए हम हमारे इस लेख के माध्यम से न केवल बकरी की संरचना के बारे में जानने की कोशिश करेंगे बल्कि बकरी की विभिन्न देशी एवं विदेशी नस्लों के बारे में भी वार्तालाप करेंगे । इससे पहले की हम Goat Breeds पर वार्तालाप करें आइये जानते हैं बकरी से समबन्धित कुछ अतिरिक्त जानकारी जैसे बकरी की संरचना इत्यादि के बारे में ।

विषय वस्तु

बकरी की संरचना:

बकरी की संरचना की बात करें तो यह चार पैरों वाला एक पालतू पशु है यह‘बोवाइडी’ परिवार एवं ‘कैपरा’  गोत्र से सबंधित है । बकरी का वैज्ञानिक नाम कैप्रा हिरकस (Capra hircus) है । यह गाय के समान दिखती है । लेकिन यह अपेक्षाकृत गाय से छोटे आकार की होती है । इन्हें छोटे जुगाली करने वाला (Small ruminants) पशु भी कहते हैं । नस्लों के आधार पर ये कई वर्ण के होते हैं । इनके दो सींग, दो कान, व दो आंखें होती हैं । इनके शरीर पर ककुद या गलकंबल नहीं होता है । इनकी छोटी सी पूंछ होती है । मादा बकरियों के थन में केवल दो अयन होती हैं । बकरी की खाल नरम होती है और उस पर उगे हुए बाल या रेशे सामान्यत: छोटे व चमकीले होते हैं । दूध उत्पादन के लिए अच्छी मादा बकरी और प्रजनन हेतु बलिष्ठ बकरों के निर्वाचन से पूर्व उसकी बाह्य देहाकृति के सबंध में जानकारी रखना बेहद जरुरी होता है ।

भारतीय बकरियों की नस्लें (Indian Goat Breeds in Hindi):

यद्यपि भारत में बकरियों की अनेक नस्लें पायी जाती हैं लेकिन सभी Goat Breeds व्यवसायिक दृष्टी से उचित नहीं होती हैं । लेकिन फिर भी हम इनका वर्णन इस लेख के अंत मरे अवश्य करेंगे लेकिन उससे पहले कुछ प्रमुख Indian Goat Breeds के बारे में जान लेते हैं ।

1. जमुनापारी (Jamunapari Goat Breeds):

बकरियों की यह नस्ल मुख्यतः उत्तर प्रदेश में पाई जाती है । ये बकरी यमुना तथा चम्बल नदियों के बीच के क्षेत्रों में पाई जाती है ।

Jamunapari-Goat

जमुनापरी बकरी की विशेषताएं (Features of Jamunapari Goats in Hindi):

  • इस Goat Breeds से सम्बंधित बकरियां चितकबरे या विभिन्न रंगों की हो सकती हैं ।
  • इस नस्ल की बकरियों के मुँह या गले पर सामान्यतः सफेद पर भूरे धब्बे होते हैं । सफेद जमुनापारी बकरियां भी देखने को मिलती हैं ।
  • इस नस्ल की बकरियों के लंबे कान 20-25 सेमी तक होते है ।
  • छोटी सींग, बड़ा थन, लंबे चुचुक इत्यादि जमुनापारी बकरियों की विशेषताएं हैं ।
  • ये बकरियां बड़ी होती हैं । पीछे के पट्ठों के नीचे के तरफ के लंबे बाल लटकते हैं ।
  • इस Goat Breeds से समबन्धित एक वयस्क नर बकरे का वजन 68 -90 कि.ग्रा एवं मादा बकरी का वजन  45-65 कि.ग्रा तक होता है ।
  • जमुनापारी नामक यह बकरियों की नस्ल दूध एवं मांस दोनों के उत्पादन के लिए विख्यात है ।
  • मादा बकरी दिन में औसतन 1 लीटर दूध देती है एवं इसमें वसा की मात्रा 4-5% है ।
  • यह बकरी वर्ष में एकबार प्रसव करती है और एक प्रसव में एक ही शावक को जन्म देती है ।

2. बारबरी (Barbari Goat Breeds)

यद्यपि बारबरी नामक यह बकरियों की नस्ल अर्थात Goat Breeds उत्तर प्रदेश से समबन्धित है । लेकिन इन सबकेबावजूद यह दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान के विस्तृत क्षेत्रों में पाई जाती है । उत्तर प्रदेश के आगरा, मथुरा, एवं अलीगढ़ इत्यादि जिलों मे असली बारबरी नस्ल पाई जाती है ।

Barbari

बारबरी नस्ल की विशेषताएं (Features of barbari Goat Breeds) :

  • इस Goat Breeds से सम्बन्ध रखने वाले बकरियों का शरीर छोटा होता है  । इनके सफेद शरीर पर भूरे धब्बे पाए जाते हैं  ।
  • इनके पैर छोटे, कान छोटे और ऊपर की ओर उठे हुए होते हैं ।
  • इनके शरीर पर रोएं छोटे और बड़ा थन होता है ।
  • इस नस्ल की एक वयस्क मादा बकरी का वजन 30-35 कि.ग्रा एवं नर बकरे का वजन 35-45 कि. ग्रा. होता है ।
  • बारबरी बकरी का पालन दोहरे उद्देश्य अर्थात दूध तथा मांस उत्पादन के लिए किया जाता है ।
  • मादा बकरी बहुत जल्दी ही प्रजनन के लिए उपयोगी हो जाती है ।
  • इस नस्ल की बकरी प्रत्येक प्रसव में सामान्यत दो बच्चा प्रसव करती है ।
  • मादा बकरी दिन में औसतन 0.75-1.25 लीटर दूध देती है जिसमें वसा की मात्रा 5% होती है ।
  • यह नस्ल बाड़े में लाभदायक रूप से पालन करने के लिए उचित मानी जाती है ।

3. बीटल बकरी (Beetal Goat Breeds)

यह Goat Breeds अर्थात बीटल बकरी पंजाब तथा हरियाणा में पाई जाती है । पंजाब के सियालकोट, झेलम, गुरुदासपुर व अमृतसर में असली बीटल नस्ल की बकरी पाई जाती है ।

Beetal-Goat

बीटल बकरी की विशेषताएं (Features of beetal Goat Breeds) :

  • इस Goat Breeds से सम्बन्ध रखने वाली बकरियां भी दिखने में जमुनापरी नस्ल की भांति ही होती है । पंरतु शरीर का आकार जमुनापरी से छोटा होता है ।
  • इनका रंग भूरा अथवा काले पर सफेद या भूरे धब्बे होते हैं ।
  • इस नस्ल की बकरी के कान लंबे, ऊंची गर्दन, मुड़े हुए सींग होते हैं ।
  • वयस्क मादा बकरियों का औसतन वजन 45-60 कि.ग्रा एवं नर बकरों का वजन 65-85 कि.ग्रा. होता है |
  • बीटल बकरियों का पालन दोहरे उद्देश्यों के लिए किया जाता है ।
  • इस नस्ल की बकरियां प्रत्येक प्रसव में एक या दो बच्चा पैदा करती हैं | और ये सामान्यत वर्ष में एक बार प्रसव करती है ।
  • लेकिन इस Goat Breeds से सम्बन्ध रखने वाली बकरियां कभी कभी (एक पशुशाला के 20% मामलों में वर्ष में दो बार या दो वर्ष में तीन बार भी प्रसव कर सकती हैं |
  • इस नस्ल की मादा बकरी प्रत्येक दिन औसतन 1.75 कि.ग्रा. दूध देती है ।
  • बाड़े में या गहन पालन पद्धति में यह नस्ल जमुनापरी से भी अधिक लाभदायक सिद्ध हो सकती है ।

4. ओस्मानाबादी बकरी (Osmanabadi Goat Breeds):

चूँकि यह Goat Breeds महाराष्ट्र के ओस्मानाबाद क्षेत्र की प्रमुख नस्ल है  । इसलिए इसका नाम उसी आधार पर ओस्मानाबादी पड़ा है । महाराष्ट्र के अलावा पड़ोसी राज्य आंध्रप्रदेश में भी यह नस्ल पाई जाती है ।

ओस्मानाबादी बकरी की विशेषताएं (Features of Osmanabdi Goat Breeds) :

  • इस Goat Breeds से सम्बन्ध रखने वाली बकरियों का आकार बहुत बड़ा होता है ।
  • सामान्यत: यह काले रंग के या कभी-कभी भूरे या सफेद धब्बे वाले भी हो सकते हैं ।
  • इस नस्ल की बकरियों के कान मध्यम आकार के होते हैं ।
  • नर बकरा के सींग होते हैं । जबकि लगभग 50% मादा बकरियों के सींग होते हैं, शेष के नहीं होते हैं । इस नस्ल की वयस्क मादा बकरियों का औसतन वजन 30 कि.ग्रा. एवं नर बकरों का वजन 35 किग्रा होता है ।
  • ओस्मानाबादी बकरियों की दुग्ध उत्पादन क्षमता कम होती है ।
  • इस नस्ल की बकरियों का पालन मांस के लिए किया जाता है ।
  • ये वर्ष में दो बार या दो वर्ष में तीन बार मेमना प्रसव करती हैं और प्रत्येक प्रसव में सामान्यतः दो बच्चे होते हैं ।

5. गंजाम बकरी (Ganjam Goat Breeds):

इस तरह की यह Goat Breeds अर्थात गंजाम नस्ल की बकरी उड़ीसा की गंजाम तथा कोरापुट जिलों में पाई जाती है ।

 गंजाम बकरी की विशेषताएं :

  • इस नस्ल की बकरी सामान्यतः काली रंग की होती हैं । पर कभी कभी काले रंग पर भूरे या सफेद धब्बे भी दिखाई पड़ते हैं ।
  • इस नस्ल की बकरी के सींग अंदर की तरफ मुड़े हुए होते हैं ।
  • इस Goat Breeds से सम्बन्ध रखने वाली बकरियाँ आकार में छोटी होती हैं ।
  • वयस्क मादा बकरियों का औसतन वजन 30 किग्रा. एवं नर बकरों का 40 किग्रा. होता है ।
  • इनका पालन सामान्यतः मांस के लिए किया जाता है ।
  • इन्हें गर्भधारण करने में देर हो सकती है पंरतु मेमना उत्पादन का दर अच्छा है ।
  • इस नस्ल की बकरियां वर्ष में दो बार और प्रत्येक प्रसव में सामान्यत दो मेमना प्रसव करती है ।

6. मारवाड़ी बकरी (Marwari Goat Breeds)

इस Goat Breeds से सम्बंधित बकरियां राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में और पड़ोसी राज्य गुजरात व मध्यप्रदेश में पाई जाती है ।

 मारवाड़ी बकरी की विशेषताएं :

  • इस नस्ल की यह बकरियाँ काली रंग की होती है और कान के पास सफेद धब्बे होते हैं ।
  • शरीर पर रेशों की लंबाई (10-12 सेमी.) होती है ।
  • इनके कान छोटे और सींग लंबे तथा स्क्रू के जैसे मुड़े हुए होते हैं । ये मध्यम आकार के होते हैं । वयस्क मादा बकरी का औसतन वजन 25 किग्रा. एवं नर बकरे का वजन 35 किग्रा. होता है ।
  • इस नस्ल का पालन तीन मुख्य उद्देश्य अर्थात मांस, दूध व रेशों के लिए किया जाता है ।
  • इस नस्ल की बकरियों का मांस स्वादिष्ट होता हैं ।
  • ये प्रत्येक दिन 0.75-1.00 किग्रा. दूध देती हैं । एक बकरी से वर्ष में औसतन 300 ग्राम रेशा प्राप्त होता है ।

7. सिरोही बकरी (Sirohi Goat Breeds):

यह Goat Breeds राजस्थान तथा गुजरात में पाई जाती है ।

Sirohi

सिरोही बकरी की विशेषताएं :

  • ये मुख्यतः भूरे रंग की होती है, हल्के भूरे धब्बे सारे शरीर पर होते हैं ।
  • इनका शरीर दृढ़ होता है व सारे शरीर पर घने बाल होते हैं ।
  • इस नस्ल की बकरियां मध्यम आकार की और लंबे कान वाली होती हैं ।
  • वयस्क मादा बकरी का औसतन वजन 35-40 किग्रा. एवं नर बकरे 50-55 किग्रा. होता है |
  • ये मुख्यतः दूध तथा मांस के लिए ही पाली जाती है । तथापि इनका ज्यादातर प्रयोग मांस के लिए किया जाता है ।
  • इस नस्ल की बकरियां प्रतिदिन औसतन 1. 5 किग्रा. दूध देती है ।
  • गहन पालन पद्धति में इनका पालन उपयोगी है ।

8. जखराना बकरी (Jakhrana Goat Breeds):

इस Goat Breeds का नामकरण राजस्थान के अलवाड़ जिले के जखराना क्षेत्र के नाम से हुआ है इसलिए इसे जखराना नस्ल कहा जाता है ।

जखराना बकरी की विशेषताएं :

  • इस नस्ल की बकरियां काली रंग की होती हैं । तथापि, इनके कान तथा थूथन (Muzzle )पर सफेद धब्बे दिखाई पड़ते हैं ।
  • इनके कान चपटे तथा मध्यम आकार के होते हैं ।
  • इनका शरीर बड़ा होता है । इनके थन बड़े होते हैं ।
  • इस नस्ल की वयस्क मादा बकरी का औसतन वजन 45 किग्रा. एवं नर बकरे का 55 किग्रा. होता है । इनका पालन मुख्यतः दूध उत्पादन के लिए ही किया जाता है ।
  • इस नस्ल की बकरियों के मांस तथा चमड़े की भी यथेष्ट मांग है ।
  • मादा बकरी प्रतिदिन औसतन 1 किग्रा. दूध देती है ।
  • इस नस्ल की बकरियां ये प्रत्येक प्रसव में 1-2 मेमना प्रसव करती है, कभी कभी तीन मेमने को भी जन्म देती है ।

ब्लैक बंगाल बकरी (Black Bengal Goat Breeds)

यह Goat Breeds पश्चिम बंगाल में पाई जाती है । बिहार, उड़ीसा तथा बंग्लादेश में भी ब्लैक बंगाल (Bengal Goat) उपलब्ध है । रंग (वर्ण) के आधार पर बंगाल की बकरी तीन प्रकार की होती है  ।

  • ब्लैक बंगाल गोट (Black Bengal Goat ) या बंगाल की कृष्णकाय बकरी,
  • ब्राउन बंगाल गोट (Brown Bengal Goat) या बंगाल की भूरी बकरी
  • व्हाईट बंगाल गोट (White Bengal Goat ) या बंगाल की सफेद बकरी
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ब्लैक बंगाल बकरी विशेषताएं :

  • इस नस्ल की बकरियां छोटी आकृति की होती है ।
  • इनकी छाती चौड़ी, छोटे तथा ऊपर की ओर उठे हुए कान, बाल छोटे व नरम होते हैं ।
  • यह Goat Breeds काली, भूरी व सफेद होने के बावजूद भी इस नस्ल की काली बकरियों की संख्या अधिक होती है और इनकी मांग भी अधिक होती है ।
  • उपर्युक्त करानी के कारण ही बंगाल की बकरी के बारे में पूछने पर हम अधिकांश समय बंगाल की कृष्णकाय बकरी या ब्लैक बंगाल गोट की ही चर्चा करते हैं ।
  • इस नस्ल की वयस्क मादा बकरी का औसतन वजन 20 किग्रा. एवं नर बकरे का 32 किग्रा. तक होता है ।
  • मांस उत्पादन के लिए ही मुख्यतः इनका पालन किया जाता है ।
  • स्वाद एवं गुणवत्ता की दृष्टि से इनका मांस जगत विख्यात है ।
  • इस नस्ल की बकरियों का चमड़ा भी उत्कृष्ट कोटि का है और चर्म उद्योग में भी इसकी मांग है ।
  • यह Goat Breeds बहुत कम दूध देती है । दैनिक 400-500 ग्राम ।
  • ये वर्ष में दो बार प्रसव करती है और प्रत्येक प्रसव में एक से अधिक मेमना प्रसव करती है । इकट्ठे तीन या चार बच्चे भी प्राप्त हो सकते है ।
  • विस्तीर्ण प्रणाली में ये लाभदायक रूप से पाली जा सकती हैं । ये कठिनाई सहने वाली नस्ल है ।

उत्पादन के आधार पर बकरियों की नस्ल का निर्धारण (Production Wise Goat Breeds):

उत्पादन के आधार पर Goat Breeds यानिकी बकरियों की नस्लों को प्रमुख रूप से चार भागों में विभाजित किया जा सकता है । यद्यपि भारत में बकरियों की बीस स्वीकृत नस्लें (recognized breed) हैं जो देश के अलग अलग क्षेत्रों में पायी जाती हैं  । उत्पादन के आधार पर बकरियों की नस्लों का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार से है ।

बकरियों की दुधारू नस्लें (Milch Goat Breeds) :

बकरियों की दुधारू नस्लों में निम्न नस्ल शामिल हैं ।

  • मेहसाना
  • सुरती
  • जाखराना
  • मालाबारी आदि ।

बकरियों की मांस उत्पादक नस्लें:

Goat Breeds की मांस उत्पादक लिस्ट इस प्रकार से है ।

  • बंगाल गोट
  • असम हील गोट
  • गंजम
  • संगमनेरी
  • कच्छी

दूध तथा मांस की नस्लें (Dual Purpose Goat Breeds)

  • जमुनापारी
  • बारबरी
  • बीटल
  • जालावाड़ी
  • सिरोही आदि

रेशा उत्पादक नस्लें

इन बकरियों से प्राप्त रेशों से ऊनी वस्त्र तैयार किए जाते हैं । ये ठंडे क्षेत्रों की नस्लें हैं ।

  • चैगू
  • चागथंगी
  • गद्दी ।

क्षेत्र के आधार पर बकरियों की नस्लों का वर्गीकरण (Region Wise Goat Breeds):

क्षेत्र के आधार पर भारतीय बकरियों को निम्न पांच वर्गों में बांटा जा सकता है ।

1. हिमालय क्षेत्र की नस्लें :

उन बकरियों की नस्ल अर्थात वे Goat Breeds जिन्हें जम्मू व कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड इत्यादि पहाड़ी क्षेत्रों में पाला जाता है । उन बकरियों की नस्ल को हिमालय क्षेत्र की नस्ल कहते हैं इनमे चैगू, चागथंगी व गद्दी प्रमुख हैं । ये बकरियां मध्यम आकार की व रोएंदार होती हैं । इनसे दूध व रेशे दोनों ही प्राप्त किए जा सकते हैं । चैगू व चागथंगी नस्लों से पश्मीना ऊन प्राप्त होती है जिससे कीमती ऊनी वस्त्र तैयार किए जाते हैं ।

2. उत्तर भारत की शुष्क क्षेत्रों की नस्लें :

इसके अतंर्गत पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्रों में पाए जाने वाली Goat Breeds आते हैं । इनमें जमुनापरी, बारबरी व बीटल प्रमुख नस्लें हैं । ये तीन नस्लें दूध उत्पादन के लिए मशहूर हैं । इनसे अच्छा मांस भी प्राप्त होता है ।

3. मध्य-भारतीय क्षेत्र की नस्लें :

राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, व महाराष्ट्र के उत्तरी इलाके में इस तरह की यह Goat Breeds पायी जाती हैं । इनमें मारवाड़ी, सिरोही, झाकराना, कच्छी, मेहसाना, जालावाड़ी, सुरती व बेरारी प्रमुख नस्लें हैं ।

4. दक्षिण भारतीय क्षेत्र की नस्लें :

महाराष्ट्र का दक्षिण भाग, आंध्रप्रदेश, कर्णाटक, तमिलनाडु व केरला में पायी जाने वाली Goat breeds अर्थात बकरियों की नस्लें इसके अंतर्गत आते हैं । यहाँ की प्रमुख नस्लें – संगमनेरी, ओसमानाबादी व मालाबारी हैं ।

5. पूर्व भारत की नस्लें (Eastern Goat Breeds) :

पूर्व भारत की इन नस्लों को मुख्य रूप से मांस उत्पादन के लिए पाला जाता है । पूर्व भारत की Goat Breeds में ब्लैक बंगाल, असम हील व गंजम प्रमुख रूप से शामिल हैं ।

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2 Replies to “बकरियों की नस्लें एवं विशेषताएं । Goat Breeds Information in Hindi.”

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