बेसन बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें? Gram Flour Manufacturing Business.

बेसन की यदि हम बात करें तो इसे Gram Flour या चने से निर्मित आटा भी कहा जा सकता है और बंगाली चने को दक्षिण एशिया में Chickpea भी कहा जाता है । यहाँ पर बंगाली चने की बात करना इसलिए जरुरी हो जाता है क्योंकि बेसन के उत्पादन में कच्चे माल के तौर पर इसका ही इस्तेमाल किया जाता है। जहाँ तक भारत की बात है भारत में चना एक प्रमुख दलहन की फसल है जिसे देश के लगभग सभी हिस्सों में सदियों से बड़े पैमाने पर उगाया जाता है। एक आंकड़े के मुताबिक भारत में कुल दलहन की फसल का लगभग 40% उत्पादन इसी का होता है। और पूरे विश्व में इसे तीसरे नंबर की दाल के रूप में स्थान मिला हुआ है। भारत पूरे विश्व में बंगाली चने के उत्पादन में अहम् भूमिका अदा करता है इसे व्यापक तौर पर स्वस्थ भोजन के रूप में और प्रोटीन युक्त आहार के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता है। इसलिए यह दलहन विशेषकर विकासशील देशों जहाँ एक बड़ी आबादी मीट, मांस, मछली इत्यादि का खर्चा वहन करने में सक्षम नहीं हैं बेहद लाभकारी एवं फायदेमंद है। चूँकि बेसन का उत्पादन चने से किया जाता है तो इसलिए इसे Gram Flour भी कहा जाता है। बेसन का उत्पादन करने के लिए बंगाली चने को सुखाया जाता है फिर उससे कूड़ा करकट अलग किया जाता है और उसके बाद उसे मशीन में पीसकर बेसन के रूप में परिवर्तित कर दिया जाता है। और भारत में बेसन के इस्तेमाल से शायद कोई भी अनभिज्ञ नहीं होगा क्योंकि यहाँ पकौड़ी, ब्रेड पकौड़े एवं बेसन से निर्मित नमकीन इत्यादि हर गली मोहल्ले में बेचते हुए देखे जा सकते हैं। कहने का आशय यह है की बेसन यानिकी Gram Flour का इस्तेमाल खाने की रेहड़ी पटरियों से लेकर पांच सितारा होटलों तक में होता है। और घरों में भी इसका इस्तेमाल पकौड़ी के अलावा भी अनेकों व्यंजन बनाने के लिए होता है इसलिए इसकी मांग बाजार में हमेशा विद्यमान रहती है। यही कारण है की आज हम इस लेख में Gram Flour Manufacturing Business के बारे में वार्तालाप करने वाले हैं।

Gram Flour Manufacturing Business in Hindi

बेसन क्या है (What is Gram Flour)

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की बेसन को Gram Flour भी कहा जाता है और इसका निर्माण बंगाली चने को पीसकर किया जाता है। जहाँ तक इसके रंग की बात है यह पीले रंग का होता है और इसमें एक विशेष स्वाद एवं गंध की भी विशेषता होती है। वैसे तो बेसन का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को बनाने के लिए सम्पूर्ण विश्व में किया जाता है लेकिन भारत, बांग्लादेश, अफगानिस्तान पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका इत्यादि देशों में इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों को बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है। चूँकि इसे बंगाली चने को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल में लाकर बनाया जाता है और बंगाली चने का उत्पादन देश के लगभग हर भगौलिक क्षेत्र में होता है। लेकिन भारत के मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्णाटक, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, बिहार चना उत्पादन में दस सर्वश्रेष्ठ राज्य हैं। यद्यपि भारत में अलग अलग राज्यों में इसे स्थानीय तौर पर अलग अलग नामों से भी जाना जाता है लेकिन चने के नाम से यह प्रसिद्ध है। इसलिए बेसन को चने का आटा या Gram Flour भी कहा जाता है।

बेसन की बिक्री संभावना (Market Potential):

भारत पूरे विश्व में चने के उत्पादन में प्रमुख स्थान पर है और इसमें भी कोई दो राय नहीं की भारत  जनाधिक्य वाला देश होने के कारण हर प्रकार की वस्तु के लिए एक बहुत बड़ा बाजार भी स्वयं ही है। जहाँ तक बेसन की बात है बेसन भारतियों के खाने में रचा बसा हुआ है बेसन के इस्तेमाल से केवल एक नहीं बल्कि अनेकों व्यंजन बनाये जा सकते हैं। यही कारण है की भारतीय खान पान में इसके इस्तेमाल विविध हैं। Gram Flour यानिकी बेसन का इस्तेमाल न केवल पकौड़ी या अन्य तली जाने वाली खाद्य वस्तुओं को बनाने में किया जाता है बल्कि इसका इस्तेमाल बिस्कुट, नमकीन, मिठाई इत्यादि बनाने में भी किया जाता है। जहाँ तक मिठाइयों की बात है बेसन के लड्डू से भला कौन सा भारतीय अवगत नहीं होगा। और चाय, कोल्ड ड्रिंक इत्यादि के साथ पकौड़ी का मजा भी शायद किसी से छिपा हुआ हो। इसलिए बेसन का इस्तेमाल घरेलू तौर पर खाद्य सामग्री बनाने में तो किया ही जाता है लेकिन छोटे से लेकर बड़े बड़े होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, रेहड़ी पटरी सभी के द्वारा बेसन यानिकी Gram Flour का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसलिए जो भी उद्यमी खुद का बेसन बनाने का व्यापार शुरू कर रहा हो उसके उत्पाद के स्थानीय स्तर पर भी उपभोग होने की पूरी संभावना है। कहने का आशय यह है की यदि उद्यमी चाहे तो स्थानीय स्तर पर ही अपने उत्पाद को बेचकर अच्छी खासी कमाई कर सकता है। क्योंकि बेसन एक ऐसा उत्पाद है जिसका इस्तेमाल सर्वत्र हर भौगौलिक क्षेत्र में देखा गया है। यह मनुष्य के दैनिक जीवन में काम आने वाला उत्पाद है इसलिए हर घर होटल, ढाबों इत्यादि में इसका भारी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है।

बेसन का बिजनेस कैसे शुरू करें (How to Start Gram flour Manufacturing Business )  

वैसे देखा जाय तो भारत में Gram Flour Manufacturing Business शुरू करना अब कोई बहुत बड़ा चुनौती का काम नहीं रह गया है। जैसे जैसे समय व्यतीत हो रहा है प्रौदयोगिकी में भी बड़ी तीव्र गति से विकास हो रहा है। और हर क्षेत्र में नई नई मशीनों, उपकरणों इत्यादि का निर्माण भी हो रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं की जो मशीन इस काम के लिए दस साल पहले उपयोग में लायी जाती होगी। आज की मशीन उस मशीन से कई मामलों में बेहतर होगी । वर्तमान में बेसन बनाने वाली आटोमेटिक मशीन भी अनेकों उत्पादन क्षमता में बाजार में उपलब्ध हैं। और इनकी कीमत इनकी उत्पादन क्षमता के आधार पर अंतरित हो सकती है। कहने का आशय यह है की Gram Flour Manufacturing Business शुरू करने के लिए उद्यमी को मशीन एवं कच्चा माल इत्यादि भी आसानी से उपलब्ध होने की संभावना है। और इस मशीन को संचालित करने के लिए किसी विशेष कौशल की आवश्यकता नहीं होती है इसलिए बेसन बनाने के इस व्यवसाय को कोई भी व्यक्ति आसानी से शुरू कर सकता है। तो आइये जानते हैं की कोई व्यक्ति खुद का यह व्यवसाय कैसे शुरू कर सकता है ।

1. स्थानीय रिसर्च करें (Do Local Research)

बेसन का निर्माण व्यवसाय शुरू करने वाले उद्यमी को एक बात अच्छी तरह से जान लेनी चाहिए की यह एक ऐसा उत्पाद है जो देश के किसी भी कोने में आसानी से बिक सकता है। लेकिन चूँकि Gram Flour Manufacturing Business के शुरूआती दौर में उद्यमी के पास बजट की कमी हो सकती है इसलिए हो सकता है की वह अपनी फैक्ट्री द्वारा उत्पादित उत्पाद को देश की प्रमुख बाज़ारों तक पहुँचाने में असमर्थ हो। इस कारण उद्यमी को अपना उत्पाद स्थानीय बाज़ारों में ही बेचने का प्रयत्न करना पड़ेगा। इसलिए उस एरिया विशेष में बेसन के उपभोग का आकलन करने के लिए उद्यमी को उस एरिया में स्थित होटल, ढाबों, भोजनालयों, स्नैकस केन्द्रों इत्यादि की संख्या का अनुमान लगाना होगा और यह भी जानना होगा की इस तरह के ये बेसन के उपभोक्ता बेसन खरीदते समय क्या किसी ब्रांड इत्यादि का भी ध्यान रखते हैं या नहीं। स्थानीय स्तर पर इन सब बातों की जानकारी के पश्चात ही उद्यमी को कोई उपयुक्त निर्णय लेना चाहिए।

2. जगह या दुकान किराये पर लें

बेसन बनाने की मिल स्थापित करने के लिए भी इतनी ही जगह की आवश्यकता होती है जितनी की एक आटा चक्की स्थापित करने में जगह की आवश्यकता होती है। इसलिए उद्यमी किसी भी स्थानीय बाजार या उसके आस पास कोई छोटी सी बनी बनाई दुकान किराये पर लेकर इस तरह का यह बिजनेस शुरू कर सकता है। Gram Flour Manufacturing के लिए 10×10 का एक बना बनाया कमरा ही उपयुक्त रहेगा उद्यमी इस कमरे को दो हिस्सों मशीन संचालित करने वाली जगह और उत्पादित उत्पाद को पैकेजिंग इत्यादि की जगह में विभाजित कर सकता है लेकिन इस स्थिति में उद्यमी को स्टोर के लिए अलग से व्यवस्था करने की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए उद्यमी को चाहिए की वह कच्चे माल के भण्डारण एवं तैयार माल के भण्डारण के लिए भी उचित जगह का प्रबंध अवश्य करे। और यदि जगह या दुकान किराये पर ली हो तो उसका रेंट एग्रीमेंट इत्यादि अवश्य बनवा लें ताकि इस दस्तावेज को पता प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल में लाया जा सके।  

3. लाइसेंस एवं रजिस्ट्रेशन कराएँ

जहाँ तक लाइसेंस एवं पंजीकरण की बात है उद्यमी को सर्वप्रथम अपने व्यवसाय को रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज में प्रोप्राइटरशिप, वन पर्सन कंपनी, पार्टनरशिप फर्म या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता हो सकती है। उसके बाद जीएसटी रजिस्ट्रेशन, बैंक में चालू खाता, व्यवसाय के नाम से पैन कार्ड, स्थानीय प्राधिकरण से ट्रेड लाइसेंस, उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन इत्यादि करने की आवश्यकता हो सकती है । खाद्य पदार्थ से जुड़ा व्यापार होने के कारण इसके लिए फ़ूड लाइसेंस की भी आवश्यकता होगी।  

4. मशीनरी एवं कच्चा माल खरीदें (Machinery and raw Material for Gram Flour manufacturing)

Gram Flour Manufacturing Business में इस्तेमाल में लायी जाने वाली मशीनरी एवं उपकरण उद्यमी की योजना के आधार पर अंतरित हो सकते हैं कहने का आशय यह है की यदि उद्यमी छोटे स्तर पर यह व्यवसाय शुरू करना चाहता है। तो बाजार में उसके लिए अलग सी मशीन, और यदि उद्यमी मध्यम स्तर पर यह व्यवसाय शुरू करना चाहता है तो उसके लिए अलग सी मशीन, और बड़े स्तर पर शुरू करने के लिए अलग सी मशीन उपलब्ध हैं। मध्यम स्तर पर इस तरह का व्यवसाय शुरू करने के लिए निम्नलिखित मशीनरी एवं उपकरण इस्तेमाल में लाये जा सकते हैं।

  • रील मशीन
  • मिलिंग सेपेरटर
  • वाटर व्हील डैम्पर
  • वॉशर व्हिजर
  • इसेंट्रिक सीविंग मशीन
  • एमरी रोलर मशीन
  • माइक्रो पल्वराइजर
  • साईंक्लोन के साथ लो प्रेशर ब्लोअर
  • वर्म कन्वेयर
  • एलीवेटर, ग्रेविटी पाइप, स्पाउट इत्यादि
  • भार मापने की मशीन    

जहाँ तक कच्चे माल की बात है Gram Flour Manufacturing में बंगाली चने को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता है इसके अलावा उद्यमी को पैकेजिंग सामग्री की भी आवश्यकता होती है।

5. बेसन बनाये और बेचें (Start Gram Flour Manufacturing Process)

बेसन बनाने की प्रक्रिया में सर्वप्रथम साईट पर उपलब्ध कच्चे माल अर्थात बंगाली चने से पत्थर, धूल मिटटी एवं अन्य अशुद्धियों को दूर किया जाता है। उसके बाद साफ़ किये हुए कच्चे माल को भिगोने एवं सुखाने के लिए रखे डिब्बों में भेजा जाता है और वहां इन्हें पानी के साथ वातानुकूलित किया जाता है। और उसके बाद ब्लोअर की हवा से सुखाया जाता है ताकि इसके बाहरी छिलके को आसानी से अलग किया जा सके। इस तरह की यह प्रक्रिया को लगभग  4-5 घंटे लगते हैं उसके बाद दाल मिल की मदद से चने को दो भागों में विभाजित किया जाता है। विभाजित दाल को अगले चार घंटों के लिए मॉइस्चराइज और कंडीशन किया जाता है। Gram Flour Manufacturing प्रक्रिया में इस सामग्री को अंतिम मिलिंग के लिए भेजा जाता है जिसे एमरी रोलर मशीन के माध्यम से अंजाम तक पहुँचाया जाता है। उसके बाद उत्पादित बेसन को सीविंग मशीन की मदद से गनी बैग में पैक कर दिया जाता है। अलग की गई भूसी को अन्य तरीके से एकत्र किया जाता है और छीले हुए अन्य मोटे पदार्थ को दुबारा से मिलिंग के लिए रोलर मशीन में डाल दिया जाता है।

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