किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में Debt Collection Agency की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है वे यह सुनिश्चित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं की दिए गए ऋण का भुगतान उचित समय सीमा के भीतर किया जाय। इसके अलावा जो कम्पनियाँ अपने उत्पादों और सेवाओं को विश्वास के भरोसे किसी को बिना भुगतान किये या मंथली, क्वार्टरली, अर्धवार्षिक, वार्षिक आधार पर चालान में माल या सेवाएं प्रदान करती हैं वे कम्पनियां भी Debt Collection Agency की मदद ऋण उगाही के लिए लेती हैं।

इस तरह की एजेंसी की सेवा सिर्फ व्यवसायिक संगठन ही नहीं अपितु सभी प्रकार के संगठन और व्यक्तिगत व्यक्तियों द्वारा भी ली जा सकती है। मान लीजिये की आपने किसी व्यक्ति को एक बहुत बड़ी रकम कर्जा दे रखी है और वह निर्धारित समय पर आपके पैसे नहीं लौटा पाया ऐसे में आप चाहें तो इस प्रकार के एजेंट की मदद लेकर अपने पैसे निकलवाने की कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा मान लीजिये किसी व्यवसायिक संगठन द्वारा अपने उत्पादों को किसी अन्य कंपनी में बेचा जा रहा है। और कंपनी उसे एक महीने में जितने भी आर्डर होते हैं उनका भुगतान एक साथ करती है।

लेकिन एक समय ऐसा आया की कंपनी ने एक महीने का भुगतान नहीं किया मांगने पर कहा की दो महीने के आर्डर का भुगतान एक साथ कर दिया जाएगा। लेकिन दुसरे महीने भी कंपनी ने उस व्यवसायिक संगठन का भुगतान नहीं किया अब जो आउटस्टैंडिंग अमाउंट था वह करोड़ों में हो चूका था। कंपनी माल लेते रही लेकिन भुगतान नहीं किया ऐसे में व्यवसायिक संगठन ने अपने स्तर पर पैसे निकलवाने के लिए हर संभव प्रयास किया लेकिन असफल रहा। अब वह व्यवसायिक संगठन अपने पैसे निकलवाने के लिए किसी Debt Collection Agency की मदद लेगा और एजेंसी को कुल अमाउंट का कुछ प्रतिशत कमीशन के तौर पर मिलेगा।

debt collection agency kaise shuru kare

ऋण उगाही एजेंसी क्या है (What is Debt Collection Agency):

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है की ऋण उगाही से तात्पर्य कर्जा वसूलने से लगाया जा सकता है इस तरह की एजेंसीयों की मदद वे व्यक्तिगत व्यक्ति या संगठन लेते हैं जिनका पैसा बाहर फंसा हुआ हो। स्पष्ट शब्दों में कहा जाय तो Debt Collection Agency का काम देनदारों से ऋण की उगाही करना होता है इसलिए इन्हें लेनदारों के एजेंट के तौर पर भी जाना जा सकता है। यानिकी एक ऐसी एजेंसी जो अपने ग्राहकों को उनका फँसा हुआ पैसा निकलवाने में मदद करती है ऋण उगाही एजेंसी कहलाती है।

और बदले में अपनी कमाई करने के लिए एजेंसी उगाही किये गए ऋण से कुछ प्रतिशत कमीशन के तौर पर लेती है। इन कंपनियों की सेवाएं वित्तीय कम्पनियों, बैंकों, माल और वस्तु बेचने वाले संगठनों, व्यक्तिगत व्यक्तियों इत्यादि द्वारा ली जाती है। लेकिन आज के परिदृश्य में ऋण उगाही एजेंसी लेनदार से उस ऋण को पहले ही खरीद लेती हैं और देनदार से उस ऋण को उगाही करने की जिम्मेदारी अपने कन्धों पर ले लेती हैं। इसमें जोखिम है इसलिए यदि एजेंसी उस ऋण की उगाही में सफल हो गई तो उसे बहुत अधिक लाभ होता है।  

ऋण उगाही एजेंसी की आवश्यकता  

आज के व्यापारिक परिदृश्य में ऋण देना भी आवश्यक है तभी वित्तीय कंपनी और बैंक आसानी से और सफलतापूर्वक चल पाएंगे। लोगों को ऋण देने का काम वित्तीय संस्थान एवं बैंक तो करते ही हैं क्योंकि वर्तमान में जिस किसी को भी ऋण की आवश्यकता होती है तो वह वित्तीय संस्थान और बैंक जैसे औपचारिक स्रोतों के पास ऋण माँगने अवश्य जाता है। इसके अलावा कम्पनियों के बीच व्यापार ऋण, इनवॉइस, मंथली पेमेंट इत्यादि के आधार पर भी चलता है।

और मनुष्य भी दुसरे मनुष्य से ऋण लेता रहता है इसलिए कुल मिलाकर देखा जाय तो अर्थव्यस्था में ऋण की बड़ी अहम् भूमिका है। यहाँ तक की माल और सेवा बेचने वाले विक्रेताओं की भी मजबूरी है की उन्हें अपनी माल और सेवाएं उधार में देनी ही पड़ती हैं। इसमें से अधिकतर उधार तो व्यवसायिक संगठनों के पास चुकता हो जाता है लेकिन कुछ लोग और व्यवसायिक संगठन उस उधार लिए गए माल, सेवा या पैसे को भुगतान करने से मना कर देते हैं या फिर टालते रहते हैं।

ऐसे में ऐसे व्यक्तियों या संगठनों से ऋण उगाही के लिए Debt Collection Agency की आवश्यकता होती है। इस तरह की एजेंसी लेनदार के एजेंट के तौर पर और उस उधार को स्वयं सस्ते दामों पर खरीदकर स्वतंत्र रूप से भी कार्य करती हैं। इस तरह की एजेंसी को भी कानूनों के दायरे में रहकर ही ऋण की उगाही के लिए व्यक्तिगत व्यक्तियों या संगठनों को मनाना होता है। एजेंसी को कोई गैरकानूनी कदम उठाने की स्वतंत्रता नहीं होती।

ऋण उगाही एजेंसी कैसे शुरू करें (How to Start Debt Collection Agency In India):

हालाँकि बहुत सारे वित्तीय संस्थान और बैंक जिनका काम ही लोगों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को ऋण देने का होता है उनके पास स्वयं का ऋण उगाही वाला विभाग होता है। लेकिन अधिकतर संगठन इस काम को किसी थर्ड पार्टी के माध्यम से कराते हैं क्योंकि उनके पास इन सब कामों को करने के लिए संसाधनों और कौशल की कमी होती है। Debt Collection Agency शुरू करने वाले उद्यमी को एक बात और ध्यान में रखनी होगी की ऋण उगाही के लिए उसे या उसकी एजेंसी को किसी भी प्रकार के गैर क़ानूनी कदम उठाने की स्वतंत्रता नहीं है।

भले ही कोई व्यक्ति या व्यवसायिक प्रतिष्ठान आपका ऋणी है और आपके ऋण देने में आनाकानी कर रहा है आप उसके खिलाफ केवल और केवल क़ानूनी दाँव पेचों का ही इस्तेमाल कर सकते हैं। गैर क़ानूनी तरीके से ऋण उगाही की स्वतंत्रता कानून प्रदान नहीं करता है। तो आइये जानते हैं की कैसे कोई इच्छुक व्यक्ति खुद की ऋण उगाही एजेंसी शुरू कर सकता है।

1. एजेंसी कैसे काम करती हैं के बारे में जानें

खुद की Debt Collection Agency शुरू करने के इच्छुक उद्यमी को सर्वप्रथम यह जानना अति आवश्यक है की इस तरह की एजेंसी कैसे काम करती हैं? क्योंकि जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की किसी को भी ऋण देना आसान है लेकिन उस ऋण की उगाही करना वह भी उन परिस्थितयों में जब देनदार ने ऋण लौटाने से मना कर दिया हो या फिर वह ऋण का भुगतान करने में आनाकानी कर रहा हो। इसलिए उद्यमी को न सिर्फ इस बात की जानकारी होनी चाहिए की एक ऋण उगाही वाली एजेंसी कैसे काम करती है।

बल्कि उसे व्यवहारिक तौर पर इस बात का अनुभव भी प्राप्त करने की आवश्यकता होती है ताकि भविष्य में उसकी एजेंसी के माध्यम से कोई अप्रिय घटना न हो। जब इच्छुक उद्यमी पहले से स्थापित किसी एजेंसी के साथ कार्य करेगा तो वह यह जान पायेगा की ऋण खरीदने में ज्यादा कमाई होती है या फिर लेनदारों के एजेंट के तौर पर कार्य करने में ज्यादा कमाई होती है। और किन बातों का आकलन करके ऋण आएगा या नहीं आयेगा का अंदाजा लगाया जा सकता है।

वैसे देखा जाय तो एजेंसी बकाया ऋणों का भुगतान करने के लिए देनदारों को ईमेल, मेसेज या फ़ोन कॉल के माध्यम से उन्हें ऋण का भुगतान करने का अनुरोध करती हैं इसके अलावा देनदारों की सही जानकारी निकालने के लिए एजेंसी अनेकों सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती हैं। क्योंकि कोई भी Debt Collection Agency पूरी तरह से देनदार पर ही निर्भर करती है इसलिए कर्ज चुकता करने के लिए देनदार का रजामंद होना अनिवार्य है। क्योंकि किसी भी एजेंसी के पास यह अधिकार नहीं है की वह देनदार के बैंक खाते से सीधे पैसे निकाल ले तब भी जब एजेंसी को पता हो की देनदार का बैंक अकाउंट नंबर क्या है और उसमें कितने पैसे जमा हैं।

हाँ इतना जरुर है की जब अदालत ने देनदार के खिलाफ निर्णय सुना दिया हो तब एजेंसी बैंक या नियोक्ता से इस बात की इजाजत ले सकती है। इस तरह की एजेंसी की कार्यशैली के बारे में उद्यमी तभी जान पायेगा जब वह कुछ महीने या साल इस तरह की एजेंसी में खुद काम करेगा ।       

2. Debt Collection हेतु खुद का ऑफिस स्थापित करें

अब यदि उद्यमी ने Debt Collection Agency शुरू करने का निर्णय ले ही लिया हो तो अब उसका अगला कदम एक ऑफिस स्थापित करने का होना चाहिए। उद्यमी इस काम को अकेले नहीं शुरू कर सकता, शुरूआती दौर में ही उसे कम से कम चार से पांच कुशल कर्मचारियों की आवश्यकता होगी इसलिए उद्यमी को ऑफिस में ऐसी व्यवस्थान करनी होगी ताकि कर्मचारी बिना डिस्टर्ब हुए आराम से कार्य कर सकें।

इसके लिए उद्यमी को ऑफिस को फुल्ली फर्निशड करना होगा और लाइटिंग इत्यादि का भी विशेष ध्यान रखना होगा। ऑफिस के उपकरणों के तौर पर उद्यमी को कुछ कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर, सॉफ्टवेयर, कुर्सी, टेलीफ़ोन इत्यादि की आवश्यकता हो सकती है।    

3. आवश्यक लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन प्राप्त करें

Debt Collection Agency शुरू करने के लिए निम्नलिखित लाइसेंस और पंजीकरण की आवश्यकता हो सकती है।

  • एजेंसी का नाम सर्च करना और उसका रजिस्ट्रेशन।
  • प्रोप्राइटरशिप या वन पर्सन कंपनी के तौर पर रजिस्ट्रेशन।
  • जीएसटी पंजीकरण।
  • स्थानीय प्राधिकरण जैसे नगर निगम इत्यादि से लाइसेंस।
  • बैंक में चालू खाता और एजेंसी के नाम से पैन कार्ड।
  • सैलरी पर टैक्स काटने के लिए TAN Number ।

 4. कुशल और आवश्यक मैनपावर नियुक्त करें

Debt Collection agency को उद्यमी चाहकर भी अकेले सफलतापूर्वक चला नहीं पायेगा उसे देनदारों से संवाद करने के लिए एक बेहद सुलझी और प्रशिक्षित टीम की आवश्यकता होगी। यदि कोई देनदार सारे हथकंडे अपनाकर भी ऋण चुकता करने के लिए तैयार नहीं होता है तो उस पर क़ानूनी कार्यवाही करने के लिए अधिवक्ता को नियुक्त करने की भी आवश्यकता हो सकती है। इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करने के लिए उद्यमी को शिक्षित और पेशेवर लोगों की आवश्यकता होती है इसलिए स्वाभाविक है की वेतन देने में आने वाला खर्चा बहुत अधिक होगा।   

5. ऋण खरीदें या लेनदारों के एजेंट के तौर पर कार्य करें  

अब उद्यमी द्वारा Debt Collection Agency शुरू करने के लिए सभी प्रक्रियायें पूर्ण कर ली गई हैं तो अब उद्यमी का अगला कदम काम करने का होना चाहिए। काम करने के लिए एजेंसी के पास दो विकल्प है पहला तो यह की एजेंसी लेनदारों के एजेंट के तौर पर कार्य करे और जब वह किसी ऋण को रिकवर करने में कामयाब हो जाए तो अपना निर्धारित हिस्सा कमीशन के तौर पर रख ले।

दूसरा तरीका यह है की एजेंसी क्रेडिटर से उस ऋण को सस्ते दामों में खरीद ले और फिर देनदारों से उस ऋण की रिकवरी करे। लेकिन दुसरे तरीके से काम शुरू करने के लिए उद्यमी को बहुत अधिक निवेश करने की आवश्यकता तो होती ही है साथ में जोखिम भी अधिक होता है। इसलिए शुरूआती दौर में उद्यमी पहले वाले तरीके यानिकी लेनदारों के एजेंट के तौर पर ही कार्य करे तो अच्छा है।      

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