दाल मिल का बिजनेस कैसे शुरू करें? How to Start Dal Mill Business In India.

Dal Mill के बारे में शायद सभी लोग अच्छी तरह से जानते होंगे क्योंकि हमारे दैनिक जीवन में हम अक्सर विभिन्न प्रकार की दालों का इस्तेमाल अपने आहार में करते हैं । वैसे तो दालों को आहार के तौर पर सभी चाहे मांसाहारी लोग हों या शाकाहारी सभी के द्वारा इस्तेमाल में लाया जाता है लेकिन शाकाहारी लोगों द्वारा दालों का इस्तेमाल कुछ ज्यादा ही किया जाता है। वह इसलिए क्योंकि मांसाहार के बाद दालें प्रोटीन के मुख्य स्रोत होते हैं हमारे देश भारत में विभिन्न प्रकार के दालों जैसे चना मूंग, उड़द, मोठ, तुरडल, मसूर, मटर इत्यादि की पैदावार की जाती है। और इनका इस्तेमाल नमकीन, मीठे, चटपटे इत्यादि व्यंजनों को बनाने के लिए किया जाता है इसलिए वर्तमान समय में Dal Mill Business की उपयोगिता बहुत अधिक बढ़ जाती है। और आज देश विभिन्न भागों में 1000 से अधिक इकाइयाँ दालों के प्रसंस्करण व्यवसाय में लगी हुई हैं लेकिन देखा गया है की इनमें से अधिकतर दाल मिलें ऐसी प्राद्यौगिकी का इस्तेमाल कर रही हैं जो अप्रचलित है यही कारण है की उन्हें प्रोडक्शन में हानि उठानी पड़ती है। Dal Mill Business की यदि हम बात करें तो यह प्रमुख रूप से एक लघु उद्योग है और इसके विशेष विकास को ध्यान में रखते हुए इसे सरकार ने लघु उद्योग क्षेत्र के अंतर्गत आरक्षित रखा हुआ है। कृषि और उद्योग की आन्तरिक निर्भरता प्रबंधन और उपज के प्रसंस्करण से सम्बंधित है इसलिए औदयोगिक निवेश को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि दोनों क्षेत्रों के विकास को पारस्परिक रूप से आगे बढाया जा सके। जैसा की हम सब जानते हैं की भारतीय कृषि में दलहन की फसलों का अहम् योगदान है और दलहन भारतीय परिवारों के आहार का भी अहम् हिस्सा है इसलिए दलहन की खेती को यहाँ महत्व भी दिया जाता रहा है। दालों की यदि हम बात करें तो इनके दो भाग होते हैं एक बाहरी छिलका और एक अन्दुरुनी हिस्सा वास्तव में देखें तो इसी अंदरूनी हिस्से को दाल के रूप में घरों में पकाया जाता है। और एक Dal Mill Business करने वाला उद्यमी दालों को प्रसंस्कृत यानिकी इनके बाहरी छिलके को निकालकर इन्हें आहार के तौर पर इस्तेमाल में लाने योग्य बनाता है। और इन प्रसंस्कृत दालों का इस्तेमाल सिर्फ रसोई में पकाने के तौर पर ही नहीं बल्कि इनसे उत्पादित होने वाले अनेक उत्पाद जैसे बेसन इत्यादि बनाने के लिए भी तैयार किया जाता है।

Dal mill Business plan in hindi

दाल के इस्तेमाल (Uses of Pulses):

दालों की यदि हम बात करें तो हम इसे एक सूखा अनाज भी कह सकते हैं जिसका इस्तेमाल मनुष्य द्वारा शरीर में प्रोटीन की आवश्यकता को ध्यान में रखकर किया जाता है। यद्यपि मांसाहारी लोगों द्वारा अपने शरीर की प्रोटीन सम्बन्धी आवश्यकता को मांसाहार के माध्यम से पूर्ण कर लिया जाता है जबकि शाकाहारी लोगों द्वारा दालों का ही इस्तेमाल इस उद्देश्य के लिए किया जाता है। दालों का आंतरिक भाग प्रोटीन और विटामिन से परिपूर्ण होता है और पकाने के बाद खाने से शरीर को पोषक तत्वों की आपूर्ति करता है। चूँकि दालों में प्रोटीन की उच्च मात्रा होती है इसलिए इन्हें अन्य अनाज के साथ मिलाकर भी खाया जाता है ताकि प्रोटीन की गुणवत्ता को बढाया जा सके। दालों की मांग को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है की Dal Mill Business शुरू करना कमाई की दृष्टी से एक लाभकारी बिजनेस हो सकता है।

दालों के विभिन्न प्रकार (Types of Some Pulses):

दालों के प्रकार की यदि हम बात करें तो चना दाल, मूंग दाल, उड़द दाल, तूर दाल इत्यादि से आप सभी अच्छी तरह से अवगत होंगे आइये आगे हम इनके बारे में कुछ संक्षिप्त रूप से जानने का प्रयत्न करते हैं ।

उड़द दाल – यह एक बेहद ही पौष्टिक दाल है इसमें उपयुक्त फॉस्फोरिक एसिड की मात्रा पाई जाती है इसका इस्तेमाल भी वैसे ही किया जाता है जैसे मूंग दाल का इस्तेमाल किया जाता है। उड़द दाल का इस्तेमाल पापड़ और बरैन निर्माण करने के लिए किया जाता है इसके अलावा चावल के साथ इडली, डोसा जैसी लोकप्रिय साउथ इंडियन डिश को बनाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है ।

चने की दाल– दलहन की फसल में चने की दाल का बेहद प्रमुख स्थान है क्योंकि एक आंकड़े के मुताबिक कुल दलहन उत्पादों का लगभग 40% चने की दाल का ही उत्पादन यहाँ पर किया जाता है। अंकुरित चनों से स्कर्वी रोग को ठीक करने की सलाह दी जाती है इसकी हरी पत्तियों से मेलिक एसिड और ऑक्सालिक एसिड तैयार किये जाते हैं।

मूंग दाल – मूंग दाल की यदि हम बात करें तो इसके आन्तरिक भाग को दाल के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता है तो वहीँ छिलके इत्यादि से मवेशियों के लिए खाना और भूसा तैयार किया जाता है। मूंग दाल पाचन में हलकी होती है इसलिए पेट के भारीपन, फूलने जैसी समस्या से निजात दिलाने में भी सहायक होती है। मूंग के दानों को साबुत अंकुरित करके, पराठे, नमकीन इत्यादि बनाकर भी खाया जाता है।

मटर – यद्यपि Dal Mill Business करने वाले उद्यमी को एक बात समझ लेनी चाहिए की मटर का अधिकतर इस्तेमाल सब्जी के तौर पर ही किया जाता है। यह भी भारत में पायी जाने वाली एक प्रमुख दलहन की फसल है इसके छिलकों को पशुओं के चारे के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता है यह चना और मसूर के समान ही एक अनाज है।

तूर दाल/अरहर – तूर दाल को दाल के रूप में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में लाया जाता है और इसकी हरी फली का उपयोग सब्जी के तौर पर भी किया जा सकता है। और इसके पौधों की हरी पत्तियों का इस्तेमाल पशुओं के चारे या खाद के तौर पर किया जाता है। इसकी गुठली के कुछ हिस्से का इस्तेमाल करके बीज और भूसी को मिलाकर एक मूल्यवान पशु चारे का निर्माण किया जा सकता है। इसके अलावा थ्रेशिंग के बाद बचे सूखे डंठल का इस्तेमाल टोकरी निर्माण या ईधन के तौर पर भी किया जा सकता है ।

दालों की बिक्री संभावना (Market Potential of Dal Mill ):

दालों की यदि हम बात करें तो दालें शाकाहारी लोगों के लिए आहार, प्रोटीन, ऊर्जा, खनिज और विटामिन इत्यादि प्राप्त करने का एक बेहद महत्वपूर्ण और सस्ते स्रोत हैं। भारत में एक बड़ी जनसँख्या को कुपोषण से उबारने में दालों का अहम योगदान रहा है कहने का आशय यह है की कुपोषण युक्त जनता को इससे उबारने के लिए दालों से बढ़िया एवं सस्ता विकल्प शायद ही कुछ और हो। यही कारण है की वर्तमान में लगभग हर घर में एक नहीं बल्कि अनेकों तरह की दालें देखने को मिल जाती हैं । भारत में एक बहुत बड़ी जनसँख्या ऐसी है जो चाहकर भी अपनी प्रोटीन सम्बन्धी आवश्यकता की पूर्ति मांसाहार से नहीं कर सकती क्योंकि उनकी जेब और कमाई उन्हें मांस खरीदने की इजाजत नहीं देती है इसलिए ऐसे लोगों के लिए भी दालें बेहद पौष्टिक और लाभप्रद आहार के तौर पर जानी जाती है। Dal Mill Business शुरू करने वाले उद्यमी को एक बात समझ लेनी चाहिए की यदि उसने गुणवत्तायुक्त दाल का प्रसंकरण कर दिया तो फिर उसे इसे बेचने के लिए बहुत अधिक मार्केटिंग की आवश्यकता नहीं होगी। दालें मनुष्य की अत्यंत जरुरी आवश्यकताओं में से एक आवश्यकता है इसलिए इस तरह के उत्पाद को बेचने के लिए किसी प्रकार की मार्केटिंग की आवश्यकता नहीं होगी।

दाल मिल बिजनेस कैसे शुरू करें? (How to Start Dal Mill Business in India):

भारत में Dal Mill Business शुरू करना इसलिए बहुत अधिक कठिन कम नहीं है क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ लगभग हर राज्य में कम या अधिक कृषि की ही जाती है । और भारतीय कृषि में दलहन एक बेहद महत्वपूर्ण फसल है इसलिए उद्यमी को अपने व्यवसाय को संचालित रखने के लिए आवश्यक कच्चा माल हर जगह आसानी से उचित मूल्य पर प्राप्त हो जायेगा। लेकिन इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करने वाले उद्यमियों के अंतर्मन में अक्सर यह सवाल आते रहता है की एक किलों अप्रसंस्कृत दाल से कितनी प्रसंस्कृत दाल निकलेगी। तो ऐसे लोगों के लिए यहाँ पर स्पष्ट कर देना जरुरी है की एक किलो अप्रसंस्कृत दाल से 890 ग्राम प्रसंस्कृत दाल, 100 ग्राम छिलका और 10 ग्राम चुरी निकल सकता है। हालांकि Dal Mill Business शुरू करने के इच्छुक उद्यमी को यह बात भी समझनी बेहद जरुरी है की कुछ दालों में यह आंकड़ा अलग अलग भी हो सकता है।  तो आइये जानते हैं की कैसे कोई इच्छुक व्यक्ति खुद का दाल मिल बिजनेस शुरू कर सकता है।

1. जमीन और बिल्डिंग का प्रबंध करें

Dal Mill Business एक ऐसा बिजनेस है जिसे उद्यमी कहीं से भी चाहे वह ग्रामीण इलाका हो, या फिर शहरी कहीं से भी शुरू कर सकता है। वह इसलिए क्योंकि इस उत्पाद की मांग सर्वत्र है अर्थ्जत दाल एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसे पूरे भारत में और विदेशों में भी खाया जाता है। इसिये उद्यमी कम से कम इस बात के लिए स्वतंत्र है की जहाँ उसे सस्ती जमीन बिल्डिंग इत्यादि मिल रही हों वह वहीँ पर अपनी इकाई स्थापित करने की योजना बना सकता है। लेकिन वहां पर सड़क, बिजली, पानी, कर्मचारियों इत्यादि की आसान उपलब्धता होनी चाहिए। और जैसा की हम सब जानते हैं की एक औद्योगिक इकाई को स्थापित करने में विनिर्माण स्थल, स्टोर रूम, बिजली उपयोगिताओं और ऑफिस स्थापित करने की आवश्यकता होती है इसलिए इस तरह का व्यवसाय शुरू करने के लिए उद्यमी को 800-1000 वर्ग फीट जगह की आवश्यकता हो सकती है।      

2. वित्त का प्रबंध करें (Fund arrangement for Dal Mill Business):

अपने Dal Mill Business के लिए उद्यमी वित्त का प्रबंध तभी कर पायेगा जब उसे ज्ञात होगा की उसके व्यवसाय को शुरू करने में कुल कितनी अनुमानित लागत आएगी । और उद्यमी को यह आंकड़ा तब ज्ञात होगा जब वह अपने व्यवसाय के लिए बिजनेस प्लान या फिर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करेगा। इसलिए वित्त का प्रबंध करने से पहले उद्यमी को चाहिए की वह प्रोजेक्ट रिपोर्ट इत्यादि तैयार कर ले, ताकि उसी आधार पर वह वित्त का प्रबंध करने में सक्षम हो। उद्यमी सरकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी ऋण, बैंक ऋण और व्यक्तिगत बचत इत्यादि माध्यमों से वित्त का प्रबंध कर सकता है । 

3. लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन कराएँ

Dal Mill Business के लिए आवश्यक लाइसेंस और पंजीकरणों की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • प्रोप्राइटरशिप या वन पर्सन कंपनी के तौर पर रजिस्ट्रेशन
  • बिलिंग इनवॉइस के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन
  • फैक्ट्री और ट्रेड लाइसेंस
  • BIS मानकों IS:2814‐1978, IS:5315‐1978, IS:10768‐1984 के आधार पर प्रसंस्करण
  • उद्योग आधार रजिस्ट्रेशन  

4. मशीनरी और कच्चा माल खरीदें

Dal Mill Business के लिए इस्तेमाल में लायी जाने वाली प्रमुख मशीनरी की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • स्टील शाफ़्ट, बेअरिंग और लकड़ी की बॉडी के साथ एमरी रोल
  • एनर्जी स्टोन, शाफ़्ट, बेयरिंग के साथ स्टील बॉडी वाला      वर्टीकल ग्राइंडर
  • सभी उपकरणों के साथ छानने वाली छलनी
  • स्टील इम्पेरल के साथ फैन
  • स्टील पाइप, वर्म ब्लेड , पुल्ली इत्यादि
  • विभिन्न इलेक्ट्रिक मोटर
  • आयल सर्किट ब्रेकर
  • वाटर पंप और बोरिंग वेल
  • विभिन्न लेबोरेटरी उपकरण

और इस व्यवसाय में कच्चे माल के तौर पर विभिन्न छिलका सहित दालों का इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें उद्यमी स्थानीय किसानों से आसानी से खरीद सकता है।   

5. दाल प्रसंस्करण शुरू करें (Start Dal Mill Processing):  

दाल प्रसंस्करण व्यवसाय में यानिकी Dal Mill Business में कच्चा माल स्थानीय अधिकृत विक्रेताओं या किसानों से खरीद लिया जाता है फिर इन दालों के छिलके को लग किया जाता है । इनके छिलके को Dehusker Machine के माध्यम से अलग कर दिया जाता है। हालांकि यहाँ पर यह भी देखा गया है की अधिकतर दालों के लिए लगभग एक जैसी ही प्रक्रिया को अपनाया जाता है लेकिन दालों के प्रकार के आधार पर प्रसंस्करण की प्रक्रिया अलग भी हो सकती है। जैसे यहाँ पर यदि हम चने दाल की यदि हम बात करें तो सबसे पहले चने से अशुद्धियों को दूर किया जाता है उसके बाद इसे 2% नमी के साथ तैयार किया जाता है और फिर इसे चार घंटों के लिए सुखाया जाता है। और उसके बाद इसका बाहरी आवरण तोड़ने के लिए 10% मिलिंग की जाती है। इस टूटे हुए चने को फिर से चार घंटों के लिए नम और वातानुकूलित किया जाता है और इसके बाद अंतिम मिलिंग प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है।

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