यदि आप कोई बिजनेस करने की सोच रहे होंगे तो आप मन ही मन यह भी सोच रहे होंगे की आप अपनी Company का रजिस्ट्रेशन कैसे कराएँगे। व्यवसाय शुरू करने के लिए अनेकों गतिविधियों की पूर्ण करना पड़ता है, उनमें से एक महत्वपूर्ण गतिविधि अपनी कंपनी के लिए स्ट्रक्चर का चुनाव करना भी होता है। क्योंकि यदि आप अपने बिजनेस का सही स्ट्रक्चर नहीं चुन पाएंगे, तो आपके कई व्यवसायिक लक्ष्य अधूरे रह सकते हैं।

भारत में चाहे आप किसी भी प्रकार का व्यवसाय शुरू करना चाहते हों हर तरह के व्यवसाय को क़ानूनी तौर तरीकों का पालन करना ही होता है। इसके लिए उद्यमी को अपने व्यवसाय को विभिन्न स्वीकृत स्ट्रक्चर में से किसी एक का चुनाव करना होता है। वर्तमान में भारत में खुद की Company खोलना पहले की तरह जटिल और थका देने वाला काम नहीं रह गया है। क्योंकि वर्तमान में कंपनी रजिस्ट्रेशन से सम्बंधित अधिकतर गतिविधियाँ ऑनलाइन भी पूर्ण की जा सकती हैं।

company kya hai aur kaise khole

लेकिन इससे पहले की हम Company Registration प्रक्रिया के बारे में बात करें, आइये जानते हैं की एक कंपनी होती क्या है।

विषय वस्तु

कंपनी क्या है (What is a Company in India): 

एक कंपनी व्यक्तियों के एक समूह द्वारा व्यवसायिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए बनाई गई एक क़ानूनी इकाई है। Company की प्रमुख विशेषताओं में व्यवसायिक एवं वाणज्यिक गतिविधियों को करके लाभ की प्राप्ति करना है।  

साधारण शब्दों में यदि हम इसे समझने की कोशिश करें तो कंपनी कई व्यक्तियों का एक संगठन होता है, जिसे कई व्यक्तियों द्वारा पैसे एकत्रित करके व्यवसायिक लाभ प्राप्त करने के लिए संचालित किया जाता है। कंपनी को एक कृत्रिम व्यक्ति भी कह सकते हैं, जिसे कानून द्वारा बनाया जाता है, और कंपनी में कुछ भी गड़बड़ी के लिए कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि कंपनी जिम्मेदार होती है।

भारत में किस प्रकार की कंपनी खोली जा सकती है

यदि आप भारत में खुद की Company Register करना चाहते हैं, तो आपको केवल उन बिजनेस स्ट्रक्चर के तहत कंपनी खोलने की अनुमति होगी, जिन्हें कम्पनीज एक्ट के तहत स्वीकृत किया गया होगा । भारत में आप निम्नलिखित प्रकार की कंपनी खोल सकते हैं।

वन पर्सन कंपनी (OPC):

वन पर्सन कंपनी पहले कंपनी अधिनियम का हिस्सा नहीं थी, इसे वर्ष 2013 में कंपनी अधिनियम में शामिल किया गया । यदि आप खुद की अकेले ही कोई कंपनी शुरू करना चाहते हैं, तो वन पर्सन कंपनी आपके लिए सही विकल्प हो सकता है। Company का यह स्ट्रक्चर अकेले स्वामित्व वाले उद्यमी को उसके व्यवसाय को अच्छे से संचालित करने की अनुमति देता है, और उसका व्यवसाय कॉर्पोरेट फ्रेमवर्क का हिस्सा भी होता है। प्रोप्राइटरशिप की तुलना में इसमें उद्यमी की व्यक्तिगत लायबिलिटी बेहद कम हो जाती है।

लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप

यदि आप एक Partnership Company शुरू करने की सोच रहे हैं, लेकिन उसमें प्रत्येक साझेदार केवल कुछ बातों पर सहमत होकर ही आपके साथ बिजनेस करना चाह रहे हैं । तो आप अपनी कंपनी को लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप के तहत रजिस्टर कर सकते हैं, ध्यान रहे इसमें साझेदारों की देनदारियाँ वहीँ तक सिमित होती हैं, जहाँ तक वे सहमत होते हैं ।

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी

खुद की लायबिलिटी को बेहद कम करने के लिए प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर Company Registration किया जा सकता है। इसमें कंपनी को व्यक्ति से अलग क़ानूनी इकाई माना जाता है और इसमें डायरेक्टर और शेयरहोल्डर होते हैं । लेकिन सभी को कंपनी के कर्मचारी के तौर पर ही माना जाता है। इसमें व्यक्तिगत लायबिलिटी बेहद कम हो जाती है।

पब्लिक लिमिटेड कंपनी    

पब्लिक लिमिटेड कम्पनी का भी अपना एक अलग ही क़ानूनी अस्तित्व है, इसलिए इसके सदस्यों की देनदारी केवल उनके शेयरों तक ही सिमित होती है। व्यवसाय के इस स्वरूप को सबसे बड़ा स्वरूप माना जाता है. क्योंकि इस तरह की कंपनी अपने IPO लाकर अपने शेयरों को शेयर बाज़ार में भी बेच सकती हैं।

Company के इन स्वरूपों के अलावा आप चाहें तो अपने बिजनेस को प्रोप्राइटरशिप, हिन्दू अनडिवाइडेड फॅमिली, पार्टनरशिप फर्म इत्यादि स्वरूपों के तहत भी रजिस्टर कर सकते हैं।

किस Company Structure के तहत रजिस्टर करें   

हम यह तो बता चुके हैं की इच्छुक उद्यमी किस किस कंपनी स्ट्रक्चर के तहत खुद की Company Register कर सकता है । इस जानकारी को पढ़ लेने के बाद एक प्रश्न जो बहुत सारे उद्यमियों के मष्तिष्क में आएगा, वह यह होगा की वे अपने बिजनेस के लिए सही Company Structure का चुनाव कैसे करें? इसी बात के मद्देनजर हम आगे इस लेख में यही जानने का प्रयत्न कर रहे हैं।

बिजनेस में कितने स्वामी या पार्टनर मौजूद हैं?  

सही Company Structure का चुनाव करने के लिए आपको इस प्रश्न का उत्तर मिलना आवश्यक है की आपके बिजनेस में कितने पार्टनर या मालिक हैं। यदि आप अकेले ही स्वयं के पैसे लगाकर बिजनेस शुरू कर रहे हैं, तो आपके लिए वन पर्सन कंपनी सबसे अच्छा विकल्प है। इसके अलावा यदि बिजनेस में दो या दो से अधिक पार्टनर हैं, तो इस स्थिति में लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप या पार्टनरशिप फर्म उपयुक्त हो सकती है।

शुरूआती निवेश कितना करना चाहते हैं?   

यदि आप शुरूआती दौर में कम निवेश के साथ शुरू करना चाहते हैं तो आप अपनी Company का रजिस्ट्रेशन प्रोप्राइटरशिप या हिन्दू अनडिवाइडेड फैमिली के तौर पर कर सकते हैं। और यदि आप इस बात को लेकर सुनिश्चित हैं की जल्द ही आपकी कंपनी का टर्नओवर इनकी सीमा को पार कर देगा, तो आप वन पर्सन कंपनी, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

व्यवसाय की सम्पूर्ण देनदारियों को वहन करने की क्षमता

यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यह है की यदि आप प्रोप्राइटरशिप, हिन्दू अनडिवाइडेड फैमिली और पार्टनरशिप फर्म के तौर पर अपने बिजनेस को रजिस्टर करते हैं, तो आपकी देनदारी असीमित होती है। अर्थात इनमें हर छोटी बड़ी गड़बड़ी के लिए केवल व्यवसाय का स्वामी ही जिम्मेदार होता है। इसका सीधा सा मतलब यह है की यदि आपके व्यवसाय पर कोई कर्जा है, तो कर्जा व्यवसाय के मालिकों से उनकी निजी सम्पति को गिरवी, नीलाम करके भी वसूला जा सकता है।

जबकि वन पर्सन कंपनी, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी इत्यादि में व्यक्तिगत देनदारी सिमित होती है, और इसमें व्यवसाय के मालिकों की निजी सम्पति को जोखिम नहीं होता है। क्योंकि इस प्रकार की Company में उनकी देनदारी शेयरों तक ही सिमित होती है।

क्या आप कम आयकर भरना चाहते हैं?   

Company Structure का निर्णय लेने में इन पर लगने वाले आयकर की दर भी अहम् भूमिका निभाती है। क्योंकि प्रोप्राइटरशिप, हिन्दू अनडिवाइडेड फैमिली इत्यादि व्यवसायिक इकाइयों पर लगने वाली ब्याज की दरें सामान्य होती हैं। जबकि अन्य कंपनीयों को 30% तक आयकर देना होता है।    

निवेशकों से पैसे इकट्ठा करने की योजना

यदि आप खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए निवेशकों से पैसा एकत्रित करने के बारे में विचार कर रहे हैं, तो आपको अपनी Company को लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर रजिस्टर कराने की आवश्यकता हो सकती है। क्योंकि एकल स्वामित्व, हिन्दू अविभाजित परिवार जैसी व्यवसायिक इकाइयों पर निवेशक का विश्वास कम होता है।

कंपनी रजिस्ट्रेशन के फायदे

यदि आप नया व्यवसाय शुर करना चाहते हैं या पहले से कोई व्यवसाय चला रहे हैं लेकिन अभी तक आपने अपनी Company Register नहीं की है। तो आपको कंपनी रजिस्ट्रेशन करने के फायदों के बारे में अवश्य जानना चाहिए। कुछ प्रमुख फायदों की लिस्ट इस प्रकार से है।

  • जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की कंपनी एक कृत्रिम व्यक्ति होती है, जिसे कानून ने बनाया होता है। इससे आपकी व्यक्तिगत देनदारियाँ कम हो जाती हैं, और व्यक्तिगत तौर पर आपको खतरा या नुकसान बेहद कम होता है।
  • कंपनी ग्राहकों के बीच विश्वास को बढ़ाने में मददगार होती है, यह ग्राहकों में Company के प्रति सद्भावना और आकर्षण को भी बढ़ावा देती है।      
  • कंपनी को अच्छे निवेशक एवं बैंक से ऋण जल्दी मिल जाता है।
  • सम्पति को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कंपनी जिम्मेदारियों पर कवर प्रदान करती है।
  • छोटे व्यवसायों की तुलना में कंपनी धन और स्थिरता कमाने के लिए अधिक प्रतिबद्ध रहती है।
  • अपने को बढ़ाने और विकसित करने के लिए अपनी क्षमता को बढ़ाती है।

Company registration के लिए आवश्यक दस्तावेज    

अलग अलग Company Structure के आधार पर अलग अलग दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है लेकिन एक लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी, वन पर्सन कंपनी, प्राइवेट लिमिटेड और पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रजिस्ट्रेशन के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है।

  • कंपनी के डायरेक्टर और शेयरहोल्डर का पहचान प्रमाण के तौर पर पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट इत्यादि प्रमुख हैं ।
  • Company के डायरेक्टर और शेयरहोल्डर के पता प्रमाण के तौर पर लेटेस्ट टेलीफोन बिल, लेटेस्ट बिजली बिल, बैंक खाते की स्टेटमेंट जिसमें वह पता लिखा हुआ हो।
  • डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर यदि लिमिटेड लायबिलिटी कंपनी है तो DPIN और सभी निदेशकों के लिए डायरेक्टर सिग्नेचर सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है।
  • कंपनी का पता प्रमाण के तौर पर रेंट एग्रीमेंट, लीज एग्रीमेंट, सेल डीड इत्यादि की आवश्यकता हो सकती है।
  • कंपनी के सदस्यों की लायबिलिटी और कंपनी के उद्देश्यों को परिभाषित करता हुआ मेमोरेंडम ऑफ़ एसोसिएशन।
  • कंपनी पालिसी और कंपनी के कानूनों को निर्देशित करता हुआ आर्टिकल ऑफ़ एसोसिएशन।

भारत में कंपनी कैसे रजिस्टर करें

अब यदि आप यह समझ चुके हैं की आपको अपनी कंपनी को किस स्ट्रक्चर के तहत रजिस्टर कराना चाहिए, तो अब आगे यह जान लेते हैं की भारत में अपनी Company रजिस्टर करने, यानिकी खुद की कंपनी खोलने के लिए क्या क्या कदम उठाने पड़ सकते हैं ।

डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट प्राप्त करें

जैसा की हम पहले भी बता चुके हैं की पहले के मुकाबले वर्तमान में भारत में खुद की कंपनी शुरू करना काफी आसान हो गया है। वर्तमान में सरकार ने Company Registration की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है, इसलिए जब आप मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स की वेबसाइट में पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करते हैं, तो उस फॉर्म में डिजिटल सिग्नेचर की आवश्यकता होती है।

कंपनी के मेमोरेंडम ऑफ़ एसोसिएशन और आर्टिकल ऑफ़ एसोसिएशन में उल्लेखित सभी निदेशकों और सब्सक्राइबर को डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC)की आवश्यकता होती है। डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त प्राधिकरणों से प्राप्त किया जा सकता है। आम तौर पर ये अधिकृत प्राधिकरण आवेदन के दो दिनों के भीतर डीएससी प्रदान कर देते हैं ।

 डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (DIN) प्राप्त करें

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है यह डायरेक्टर की पहचान के लिए एक संख्या होती है, इसलिए ऐसा कोई भी व्यक्ति जो किसी Company में डायरेक्टर बनना चाहता है उसके लिए डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर प्राप्त करना अनिवार्य है।इसे कंपनी रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरते समय डायरेक्टर की डिटेल्स श्रेणी में भरना होता है। इस कार्य को पूर्ण रूप से मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन किया जा सकता है ।

मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स द्वारा इसके लिए SPICe+ एक वेब आधारित पंजीकरण फॉर्म निर्धारित किया गया है, जिसके माध्यम से कोई कंपनी अपने तीन निदेशकों के लिए DIN प्राप्त कर सकती है।

 यदि कंपनी में तीन से अधिक डायरेक्टर हैं, तो कंपनी उनके लिए DIR- 3 फॉर्म भरकर डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर प्राप्त कर सकते हैं। क्योंकि नियमों के मुताबिक मौजूदा कंपनी यदि नए डायरेक्टर बनाना चाहती है तो केवल वही DIR- 3 फॉर्म के माध्यम से आवेदन कर सकती है। नई कंपनी को SPICe+ के माध्यम से ही डीआईएन के लिए आवेदन करना होता है।

मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करें

Company registration प्रक्रिया में उद्यमी को SPICe+ फॉर्म को सही से भरकर मिन्स्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स के पोर्टल पर सबमिट करना होता है। इसके लिए सबसे पहले कंपनी के डायरेक्टर को मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स के पोर्टल पर खुद को डायरेक्टर के तौर पर रजिस्टर कराना होता है। ताकि वह SPICe+ फॉर्म एवं अन्य जरुरी दस्तावेजों को पोर्टल पर अपलोड करके सबमिट कर सके।

जब निदेशक रजिस्ट्रेशन कर लेता है तो उसे उस पोर्टल पर लॉग इन करने के लिए यूजर आईडी एवं पासवर्ड दिया जाता है, जिसके माध्यम से वह उस पोर्टल पर लॉग इन कर सकता है।

लॉग इन करने के बाद निदेशक आसानी से SPICe+ फॉर्म के साथ साथ अन्य दस्तावेजों को भी आसानी से अपलोड करके सबमिट कर पायेगा, और ई फॉर्म दाखिला करना, सार्वजनिक दस्तावेजों को देखने की सुविधा इत्यादि से भी सुसज्जित हो पाएगा।    

इनकारपोरेशन का सर्टिफिकेट प्राप्त करें

एक बार रजिस्ट्रेशन फॉर्म भर जाने और सभी लागू शुल्कों का भुगतान कर देने के बाद जब निदेशक द्वारा अन्य दस्तावेज भी ऑनलाइन सबमिट करा दिए जाते हैं, तो उसके बाद कंपनी रजिस्ट्रार द्वारा उस आवेदन और दस्तावेजों की अच्छे ढंग से जांच की जाती है। और सब कुछ सही पाए जाने पर रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज द्वारा उस कंपनी का इनकारपोरेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।

Company का इनकारपोरेशन सर्टिफिकेट कंपनी द्वारा प्राप्त किये गए पैन और टेन के साथ जारी किया जाता है।

प्रश्न – मैं अकेले ही कंपनी खोलना चाहता हूँ, कौन सी कंपनी खोलूं?

उत्तर – अकेले प्रमोटर के लिए वन पर्सन कंपनी सबसे अच्छा विकल्प है।

प्रश्न – कंपनी का रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

उत्तर – सबसे पहले सभी दस्तावेज तैयार कर लें, फिर MCA की ऑफिसियल वेबसाइट के माध्यम से निर्देशों का पालन करते हुए ऑनलाइन अप्लाई करें।  

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