एल्युमीनियम के बर्तन बनाने का व्यापार।Aluminium Utensils Manufacturing.

Aluminium Utensils से आशय एल्युमीनियम के बर्तनों से आशय है भारत में ही नहीं अपितु वैश्विक स्तर पर इस तरह के ये बर्तन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में लाये जाते हैं । घरेलु तौर पर इस्तेमाल में लाये जाने वाले बर्तनों की जब बात आती है तो घरों में इनका इस्तेमाल विभिन्न घरेलु प्रयोजनों जैसे खाना पकाने, पानी गरम करने, पानी को इकठ्ठा करने इत्यादि के लिए किया जाता है। और यह भी देखा गया है की इस तरह के ये बर्तन आम तौर पर अलौह धातुओं जैसे एल्युमीनियम, पीतल, तांबे, स्टेनलेस स्टील इत्यादि से बने होते हैं।

लेकिन इन सभी धातुओं में से एल्युमीनियम से बने बर्तनों का इस्तेमाल लोगों द्वारा बड़ी पैमाने पर व्यापक रूप से किया जाता है, चूँकि एल्युमीनियम से निर्मित बर्तनों का मूल्य अन्य की तुलना में सस्ता होता है और इनकी चलने की क्षमता भी अधिक होती है इसलिए विशेषकर मध्यम वर्ग, निम्न मध्यम वर्ग और कमजोर आय वर्गों द्वारा इन्हें बड़े पैमाने पर ख़रीदा जाता है। हालांकि स्टेनलेस स्टील से निर्मित बर्तनों का भी इस्तेमाल घरेलु उपयोग के लिए किया जाता है लेकिन चूँकि इनकी कीमत Aluminium Utensils की तुलना में थोड़ी अधिक होती है इसलिए अच्छी आय वाले परिवारों और कुछ मध्यम वर्गीय परिवारों द्वारा भी इनका इस्तेमाल किया जाता है।

यही कारण है की अन्य धातुओं की तुलना में एल्युमीनियम के बर्तन लगभग सभी आय वर्गों पसंद और ख़रीदे जाते हैं कीमत में सस्ते और गुणवत्तायुक्त होने के कारण इन्हें विभिन्न खानपान संगठनों जैसे होटल, रेस्तरां, कैंटीन, रक्षा, रेलवे इत्यादि द्वारा भी काफी पसंद किया जाता है। यद्यपि यह भी देखने में आया है की इस तरह के ये संगठन कई बर्तन ऐसे होते हैं जिन्हें स्टेनलेस स्टील में ही लेना पसंद करते हैं लेकिन खाना पकाने के लिए अधिकतर Aluminium Utensils का ही इस्तेमाल देखा गया है।

वह इसलिए क्योंकि एल्युमीनियम सामग्री कम वजन की होने के साथ बेहतर मजबूती भी प्रदान करती है इसमें उच्च गर्मी चालकता का गुण विद्यमान होता है, गर्मी की प्रतिरोधी और उपयोग करने में आसान होती है। शायद यही सब कारण है की वर्तमान में एल्युमीनियम के बर्तनों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर व्यापक तौर पर किया जा रहा है ऐसे में किसी भी इच्छुक उद्यमी के लिए इस तरह का यह व्यवसाय शुरू करना बेहद फायदेमंद हो सकता है ।

Aluminium Utensils Manufacturing Business

औद्यौगिक परिदृश्य और चलन

प्रचीनकाल से लेकर वर्तमान तक पारम्परिक समाज से लेकर आधुनिक समाज तक पूरे विश्व में घरेलु बर्तन एक प्रमुख उत्पाद श्रेणी के रूप में हमेशा से ही बाजार में मौजूद रहे हैं । हाँ यह अलग बात है की समय समय पर अलग अलग धातु या वस्तुओं से निर्मित बर्तनों की माँग रही है। वैसे देखा जाय तो उच्च शहरीकरण, संयुक्त परिवारों के विघटन और एकाकी परिवारों के प्रसार एवं तकनिकी प्रगति के कारण घरेलु इस्तेमाल में लाये जाने वाले उत्पादों की प्रकृति में दूरगामी परिवर्तन हुए हैं। भारत में भी इस वैश्वीकरण के दौर में खाना पकाने, खाना परोसने और खाना खाने की आदतों में महत्वपूर्ण बदलाव देखे जा सकते हैं।

हमारा देश भारत जनसँख्या की दृष्टी से दूसरा सबसे बड़ा देश है इसलिए घरेलू इस्तेमाल में लाये जाने वाले उत्पादों जैसे Aluminium Utensils इत्यादि के लिए यहाँ खरीदारों और उपभोक्ताओं की कोई कमी नहीं है। वर्तमान में खाना बनाना या रसोई संभालना सिर्फ महिलाओं तक ही सिमित नहीं रह गया है बल्कि शहरी जीवन में युवा कामकाजी जोड़ों के जीवन में सामाजिक और भोजन की आदतों से सम्बंधित व्यापक परिवर्तन देखे जा सकते हैं।

वर्तमान में लोगों के घरेलु बर्तनों के खरीदारी निर्णयों को स्वस्थ खाना पकाना, सुविधा, सुरक्षा, कार्यक्षमता समय की बचत करने वाले उपकरण और खाना बनाने के बर्तन प्रभावित कर रहे हैं। भारत में रिटेल सेक्टर में घरेलु बर्तनों का यह व्यापारप्रति वर्ष लगभग 25 से 30% वार्षिक वृद्धि के साथ आगे बढ़ रहा है।

एल्युमीनियम बर्तनों की बिक्री संभाव्यता

वैसे देखा जाय तो पुराने समय में लोग मिटटी के बर्तनों का भी इस्तेमाल बड़ी मात्रा में करते थे लेकिन मिटटी के बर्तनों में स्थायित्व की कमी होने के कारण लोग धातु से निर्मित बर्तनों की ओर अग्रसित हुए । Aluminium Utensils को सिर्फ शहरी नहीं बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में निवासित लोगों द्वारा इस्तेमाल में लाया जाता है और इनकी खासियत यह है की इन्हें पुराना या बेकार होने पर भी कुछ न कुछ पैसों में बेचा जा सकता है।

चूँकि एल्युमीनियम के बर्तनों में टिकाऊपन होता है और ये सस्ते भी होते हैं इसलिए ये बिना किसी कठिनाई के अपने लिए ग्राहक या बाजार स्वयं ढूंढ लेते हैं। एल्युमीनियम कीमत में तो अन्य धातुओं से सस्ता है लेकिन यह भोजन को बड़ी जल्दी पकाने में सहायक है जिससे उपभोक्ताओं द्वारा इसे प्राथमिकता दी जाती है। इसकी कम कीमत होने के कारण यह सभी आय वर्ग के लोगों के बीच काफी प्रचलित है।

भारत जैसे विशालकाय देश में Aluminium Utensils के सौ से भी अधिक ब्रांड क्रियाशील हैं और ब्रांडेड उत्पाद तेजी से उपभोक्ताओं के बीच प्रचलित हो रहे हैं। प्रतिस्पर्धा के बावजूद नए सुविधा और डिजाईन से युक्त उत्पाद तेजी से लोकप्रियता बटोर रहे हैं। इसलिए यदि कोई उद्यमी लोगों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर एल्युमीनियम के बर्तनों को डिजाईन करके उनका निर्माण करता है तो ऐसे उत्पादों की बिक्री की संभावना अधिक है।

एल्युमीनियम बर्तन बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें (How to Start a Aluminum Utensils Manufacturing Business )   

Aluminium Utensils बनाने का व्यापार शुरू करने के लिए उद्यमी को 15-20 लाख रूपये खर्च करने की आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा उद्यमी को इस व्यवसाय को शुरू करने के लिए वे सभी प्रक्रियाएं पूर्ण करनी होंगीं जो किसी अन्य विनिर्माण बिजनेस को शुरू करने के लिए करनी पड़ती हैं। इनमें जमीन और बिल्डिंग का प्रबंध करने से लेकर, वित्त का प्रबंध, लाइसेंस और पंजीकरण, कर्मचारियों की नियुक्ति, आवश्यक प्रशिक्षण इत्यादि सभी कुछ शामिल है। तो आइये जानते हैं की कैसे कोई इच्छुक व्यक्ति खुद का एल्युमीनियम बर्तन बनाने का व्यवसाय शुरू कर सकता है।

1. आवश्यक प्रशिक्षण और अनुभव प्राप्त करें

वैसे तो उद्यमी को आवश्यक मशीनरी की मदद से Aluminium Utensils का विनिर्माण करने के लिए मशीन ऑपरेटरों को नियुक्त करना ही होगा। लेकिन सिर्फ विनिर्माण प्रक्रिया जानने के लिए नहीं बल्कि सेल्स, मार्केटिंग, मांग, सप्लाई इत्यादि के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए भी उद्यमी को किसी सरकारी संस्थान से प्रशिक्षण या फिर पहले से मौजूद किसी ऐसी फैक्ट्री में जॉब करने की आवश्यकता हो सकती है।

इस तरह की पहले से स्थापित फैक्ट्री में जॉब करके उद्यमी कच्चे माल के स्रोत, उसकी कीमत, उत्पादन लागत, बेचे जाने वाली कीमत, बाजार इत्यादि का आसानी से पता लगा सकता है । ताकि बाद में उसे खुद का व्यवसाय संचालित करते समय किसी भी प्रकार की परेशानी या समस्या होने पर उसका समाधान आसानी से संभव हो सके।  

2. जमीन और बिल्डिंग का प्रबंध करें

Aluminium Utensils unit स्थापित करने के लिए उद्यमी को विनिर्माण स्थल के लिए जगह, उत्पादित उत्पाद के लिए स्टोर रूम, कच्चे माल के लिए स्टोर रूम, बिजली उपयोगिताओं जैसे जनरेटर इत्यादि के लिए जगह और एक छोटा सा ऑफिस स्थापित करने के लिए जगह की आवश्यकता होती है। इस प्रकार से देखे तो उद्यमी को 800-900 Square Feet जगह की आवश्यकता होती है। उद्यमी इस जगह का प्रबंध कहीं भी जहाँ उसे सस्ते किराये में बनी बनाई बिल्डिंग मिल रही हो ले सकता है बशर्ते वहां पर सड़क, बिजली, पानी इत्यादि मूलभूत सुविधाओं और कर्मचारियों की आसान उपलब्धता हो।  

3. वित्त का प्रबंध करें (Arrange fund to start Aluminium Utensils Unit):

वित्त का प्रबंध करने से पहले उद्यमी को एक प्रभावी बिजनेस प्लान बनाने की आवश्यकता होगी जिसमें जमीन और बिल्डिंग के खर्चे से लेकर, मशीनरी कच्चा माल इत्यादि खरीदने में आने वाला खर्चा और कर्मचारियों के वेतन अन्य उपभोज्य वस्तुओं को खरीदने में आने वाला खर्चा सभी कुछ शामिल होना चाहिए।  कहने का आशय यह है की इसमें Aluminium Utensils स्थापित करने में आने वाली स्थिर लागत और कार्यशील लागत बारीकी से उल्लेख होता है ताकि बिजनेस प्लान को अधिक से अधिक व्यवहारिक बनाया जाए और वास्तविक लागतों और इसमें उल्लेखित लागतों में कम से कम अंतर हो।

सिर्फ लागतों का ही नहीं बल्कि अनुमानित कमाई और व्यवसाय के उद्देश्यों को पूरा करने की पूरी योजना भी इसमें उल्लेखित होती है इसलिए वित्त का प्रबंध करने से पहले उद्यमी को बिजनेस प्लान अवश्य बना लेना चाहिए ताकि वह इसी के अनुसार वित्त कर प्रबंध कर पाए। उद्यमी सब्सिडी ऋणों, बैंक ऋणों इत्यादि के माध्यम से वित्त का प्रबंध कर सकता है।  

4. लाइसेंस और पंजीकरण प्राप्त करें

Aluminium Utensils Manufacturing के लिए उद्यमी को निम्नलिखित लाइसेंस और पंजीकरण लेने की आवश्यकता हो सकती है।

  • कंपनी का नाम सर्च करके रजिस्टर करें ।
  • प्रोप्राइटरशिप, वन पर्सन कंपनी, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी इत्यादि में से किसी एक का चुनाव करके रजिस्ट्रेशन।
  • व्यवसाय के नाम से पैन, बैंक में चालू खाता और जीएसटी रजिस्ट्रेशन।
  • फायर और पोल्यूशन डिपार्टमेंट से एनओसी।
  • स्थानीय प्राधिकरण से ट्रेड या फैक्ट्री लाइसेंस।
  • उद्यम पोर्टल रजिस्ट्रेशन
  • ब्रांड नाम की सुरक्षा के लिए ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन 

5. मशीनरी और कच्चा माल खरीदें

Aluminium Utensils बनाने का व्यापार शुरू करने के लिए उद्यमी को निम्नलिखित मशीनरी और उपकरणों की आवश्यकता हो सकती है।

  • तेल से चलने वाली भट्टी बर्नर, हेड आयल टैंक फिटिंग के साथ।
  • मोटर के साथ ब्लोअर।
  • शीट और सर्किल की एनिलिंग के लिए एनीलिंग भट्टी।
  • मोटर, स्टार्टर, स्विच इत्यादि उपकरणों के साथ एल्युमीनियम हॉट रोलिंग मिल ।
  • इलेक्ट्रिक मोटर, स्टार्टर, स्विच इत्यादि के साथ एल्युमीनियम कोल्ड रोलिंग मिल।
  • हैण्ड ऑपरेटेड शीयरिंग मशीन।
  • मोटर के साथ सर्किल कटिंग मशीन।
  • लाइट पंचिंग के लिए हैण्ड फ्लाई प्रेस।
  • मोटर, स्टार्टर इत्यादि के साथ डबल एक्शन डीप ड्राइंग पॉवर।
  • स्पिन्निंग लेथ सेण्टर।
  • 1000 किलो क्षमता वाली इलेक्ट्रॉनिक मापक मशीन।
  • पिलर ड्रिलिंग मशीन।
  • आर्क वेल्डिंग ट्रांसफार्मर।
  • बेंच ग्राइंडर।
  • कास्ट आयरन मोल्ड।
  • डीप ड्राइंग डाई।
  • स्पिन्निंग डाई।
  • एसिड टैंक।
  • स्पिनिंग टूल।
  • मापक और टेस्टिंग उपकरण।  

जहाँ तक कच्चे माल का सवाल है इस व्यवसाय के लिए कच्चे माल के तौर पर एल्युमीनियम शीट या स्क्रैप को इस्तेमाल में लाया जाता है।

 6. विनिर्माण प्रक्रिया शुरू करें (Start Manufacturing of Aluminium Utensils) 

Aluminium Utensils Manufacturing Process को निम्न भागों में विभाजित किया जा सकता है।

  • एलुमिनियम धातु के हिस्से को काटने के लिए ब्लैंकिंग, पंचिंग और छेदन प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है।
  • धातु को आवश्यक डिजाईन में आकार देने के लिए डीप ड्राइंग प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है।
  • वांछित प्रोफाइल प्राप्त करने के लिए स्पिनिंग प्रक्रिया के तहत धातु का निर्माण।
  • धातु को फ़ैलाने के लिए बलगिंग प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है।
  • डाई के तहत धातु को रोल करने के लिए बीडिंग और कर्लिंग प्रक्रिया की जाती है यह प्रक्रिया सामग्री से किनारों सहित रिंग प्राप्त करने के लिए की जाती है।
  • आधार की मोटाई को कम करने के लिए कोइनिंग या एम्बोस्सिंग प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है।
  • धातु को विस्तृत और उसकी लम्बाई बढाने के लिए पायलट होल के माध्यम से पंच किया जाता है।
  • सतह पर धातु को आसानी से रखने और इस्तेमाल में लाने के लिए नेकिंग और रिब फोर्मिंग प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है।
  • Aluminium Utensils Manufacturing Process में इसके बाद अतिरिक्त धातु को निकालने के लाइट ट्रिमिंग प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है ताकि एक फिनिश्ड प्रोडक्ट प्राप्त किया जा सके।
  • उसके बाद उत्पादित बर्तन को एनोडाईज्ड, पॉलिश और निरीक्षण किया जाता है।
  • उसके बाद उत्पादित बर्तनों का समूह बनाया जाता है और फिर इन्हें पैक कर दिया जाता है। स्क्रैप को दुबारा से कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल में लाया जाता है।

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