Affiliate Marketing क्या है? इसे शुरू करके पैसे कैसे कमायें।

वर्तमान में Affiliate Marketing ऑनलाइन  कमाई करने का एक बेहतरीन साधन माना जाता है इसे कोई भी व्यक्ति अपने घर से बैठे बैठे संचालित करके मनचाहे पैसे कमा सकता है । यही कारण है की आज जब भी कोई व्यक्ति ऑनलाइन पैसे कमाई के तरीकों के बारे में सोचता है तो वह एफिलिएट मार्केटिंग के बारे में भी अवश्य सोचता है। चूँकि आज के समय में मनुष्य जीवन में इन्टरनेट भी बेहद जरुरी हो गया है क्योंकि इसका इस्तेमाल लोग अपनी आवश्यकताओं के आधार पर अलग अलग तरीकों से करते हैं।

कोई इसे मनोरंजन का साधन मानता है तो कोई इसे अनेकों तरह की जानकारी पाने का स्रोत मानता है। कहने का आशय यह है की एक राजनेता इसे अपने वोटर को रिझाने का साधन मानता है तो एक बिजनेसमैन के लिए यह उसके उत्पाद या सेवा की मार्केटिंग एवं बिक्री के लिए बेहतरीन प्लेटफोर्म है। और एक कलाकार के लिए लोगों को विडियो के माध्यम से अपनी कलाकारी दिखाने का भी यह प्लेटफोर्म है। तो बहुत सारे लोग ऐसे भी हैं जो इन्टरनेट के माध्यम से Affiliate Marketing जैसी गतिविधियों से पैसे भी कमा रहे हैं।

जैसा की हम सब जानते हैं की वास्तविक यानिकी जमीनी दुनिया में भी बहुत सारे ऐसे काम होते हैं जिन्हें करके व्यक्ति को कमीशन उसके पारिश्रमिक के तौर पर मिलता है। वर्चुअल वर्ल्ड में एफिलिएट मार्केटिंग भी एक ऐसा ही काम है जिसके माध्यम से व्यक्ति को अपनी वेबसाइट इत्यादि के जरिये दूसरों के उत्पाद बेचने होते हैं और जब उद्यमी कोई एक बिक्री ही करने में सफल हो जाता है तो उसका पारिश्रमिक कमीशन के तौर पर उसे मिल जाता है।

Affiliate Marketing एक ऐसा व्यापार है जिसमें रणनीति, योजना की आवश्यकता तो होती है लेकिन शुरू करने के लिए बहुत सारे निवेश की आवश्यकता नहीं होती। उद्यमी शुरूआती दौर में इसे 7-10 हज़ार में आसानी से शुरू कर सकता है। और यदि उद्यमी के पास स्वयं की कोई वेबसाइट या ब्लॉग है तो इस स्थिति में बिना किसी निवेश के भी यह Affiliate Marketing का बिजनेस शुरू किया जा सकता है।

Affiliate Marketing in hindi

एफिलिएट मार्केटिंग क्या है (What is an Affiliate Marketing):

यद्यपि एक आम आदमी की नज़र में एफिलिएट मार्केटिंग ऑनलाइन पैसे कमाई करने का एक बढ़िया तरीका हो सकता है। लेकिन इसकी परिभाषा की बात करें तो हम पाएंगे की जब किसी व्यक्ति द्वारा किसी दूसरी कंपनी के उत्पाद या सेवा अपने एफिलिएट लिंक के माध्यम से ऑनलाइन प्रमोट की जाती है। तो उसके द्वारा किये जाने वाले इस कार्य को Affiliate Marketing कहते हैं।

इस प्रक्रिया में उस प्रमोट करने वाले व्यक्ति की कमाई तब होती है, जब वह उत्पाद या सेवा की कोई यूनिट बेचने में सफल हो जाता है। कहने का अभिप्राय यह है की जब मार्केटर द्वारा उत्पाद या सेवा को कोई इकाई सफलतापूर्वक अपने एफिलिएट लिंक के माध्यम से सफलतापूर्वक बेच दी जाती है, तभी उसे उसका पारिश्रमिक कमीशन के रूप में मिलता है।

एफिलिएट मार्केटिंग के लाभ (Some Major Benefits of Affiliate Marketing):  

Affiliate Marketing से होने वाले फायदों की बात करें तो यहाँ पर पहले यह स्पष्ट कर देना जरुरी है की हम उन सभी प्रमुख फायदों की लिस्ट यहाँ पर दे रहे हैं। जो न सिर्फ एफिलिएट मार्केटर को बल्कि उस कंपनी को भी हो सकते हैं जो अपना उत्पाद या सेवा इस प्रणाली के माध्यम से बेच रही होती है।

  • व्यापारी या कंपनी को एफिलिएट मार्केटिंग के जरिये अपने उत्पाद या सेवाओं को बेचने के लिए असीमित क्षेत्र प्राप्त हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप उद्यमी के उत्पाद को पहचानने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि होती है। और बाद में इन्हीं लोगों में से लोग उत्पाद या सेवा खरीदकर ग्राहक बन जाते हैं।
  • कंपनी या व्यापारी को बेहद कम समय में बहुत अधिक ग्राहक मिलने की संभावना होती है। इससे व्यापारी का काफी अधिक समय बचता है जिसे वह अन्य कार्यों में लगा सकता है।
  • जहाँ तक एफिलिएट मार्केटर की बात है उन्हें यह फायदा होता है की कोई भी कंपनी एफिलिएट लिंक के माध्यम से हुई बिक्री को मेनुप्लेट नहीं कर सकती। क्योंकि यह सब कुछ मशीनों द्वारा ऑटोमेट किया जाता है । इसलिए ये आंकड़े काफी विश्वसनीय होते हैं।
  • Affiliate Marketing की प्रणाली को अपनकर कोई भी ब्लॉगर या वेबसाइट ओनर अपने वेबसाइट में अपने एफिलिएट लिंक के लिए अलग अलग आकार के बैनर आसानी से लगा सकता है। क्योंकि ये सब कुछ मर्चेंट द्वारा पहले से ही तैयार होते हैं। इसलिए एफिलिएट मार्केटिंग करने वाले व्यक्ति को सिर्फ कॉपी पेस्ट ही करने की आवश्यकता होती है।
  • Affiliate Marketing का सबसे बड़ा फायदा यह है की इसे शुरू करने के लिए कोई बहुत अधिक निवेश अर्थात पैसों की आवश्यकता नहीं होती है। वेबसाइट एवं ब्लॉग ओनर इसे आसानी से बिना पैसे लगाये भी शुरू कर सकते हैं।
  • मार्केटिंग करने वाले व्यक्ति को केवल अपने एफिलिएट लिंक को प्रमोट करने की आवश्यकता होती है बाकी उत्पाद स्टोर के लिए जगह, डिलीवरी, लोजिस्टिक, कस्टमर सपोर्ट, बिल इत्यादि सब जिम्मेदारी कंपनी या व्यापारी की होती है।
  • काम में स्वतंत्रता किसे पसंद नहीं होती और बॉस के नीचे काम करना कम ही लोग पसंद करते हैं। Affiliate Marketing का काम भी कुछ ऐसा ही है इसमें उद्यमी को किसी के भी अधीन काम करने की मजबूरी नहीं होती है। बल्कि इसमें अपने विवेक के आधार पर पूर्ण रूप से निर्णय लेने की स्वतंत्रता होती है। जिसका अर्थ यह है की इस काम में उद्यमी स्वयं का बॉस खुद ही है ।
  • Affiliate Marketing में जरुरी नहीं है की उद्यमी पूरा दिन इसी काम में लगा रहे, बल्कि उद्यमी चाहे तो इस तरह के काम को पार्ट टाइम बिजनेस के तौर पर भी कर सकता है । जिसके लिए दिन के 3-4 घंटे ही पर्याप्त होंगे।                                

एफिलिएट मार्केटिंग के घटक ( Components of Affiliate Marketing)

वैसे देखा जाय तो Affiliate Marketing को आम तौर पर पब्लिशर, कंज्यूमर एवं एडवरटाइजर की बीच की कड़ी कहा जाता है वह इसलिए क्योंकि यह तीन घटकों में एक सम्बन्ध स्थापित करती है । इसलिए इस तरह का काम शुरू करके कमाने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति के लिए यह बेहद जरुरी हो जाता है की वह इसके घटकों के बारे में जानकारी रखे। लेकिन उससे पहले हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं की हमने उपर्युक्त जिन तीन घटकों का उल्लेख किया है इनके अलावा एक अन्य घटक नेटवर्क का भी इस प्रणाली में अहम् योगदान होता है। इसलिए नीचे अब हम इन चारों घटकों के बारे में संक्षिप्त रूप से जानने की कोशिश करेंगे।

1. मर्चेंट या एडवरटाइजर:

इस श्रेणी में वे लोग या कंपनी आती हैं जो खुद के प्रोडक्ट या सेवा बेचने के लिए अपने खुद का एफिलिएट प्रोग्राम विकसित करके लोगों को उसे प्रमोट करने को कहती हैं। यानिकी वह कंपनी जो स्वयं का एफिलिएट प्रोग्राम बनाकर लोगों को उनकी कमाई का लालच देकर उन्हें अपने उत्पाद या सेवा बिक्री करने के लिए कहती हैं। इस श्रेणी में आप फ्लिप्कार्ट, अमेज़न, होस्टिंग कंपनी जैसे होस्टगैटर, ब्लूहोस्ट इत्यादि को रख सकते हैं।

2. पब्लिशर या एफिलिएट मार्केटर

Affiliate Marketing प्रणाली में इस श्रेणी के लोगों या कंपनी का काम मर्चेट या एडवरटाइजर के उत्पादों या सेवाओं को ऑनलाइन बेचने का होता है। ये उन उत्पाद या सेवाओं को बेचने का भरसक पर्यटन इसलिए करते हैं क्योंकि इन्हें प्रत्येक बिक्री पर पहले से निर्धारित कमीशन मिलता है।

ध्यान रहे मर्चेंट या एडवरटाइजर द्वारा ऐसे एफिलिएट प्रोग्राम तैयार किया जाता है की जब भी कोई एफिलिएट मार्केटर इसमें साइन अप करके रजिस्टर करता है तो प्रत्येक व्यक्ति को सिस्टम द्वारा अलग अलग एफिलिएट लिंक जारी किया जाता है। और यही वो लिंक होता है जिसकी वजह से मर्चेंट या सिस्टम को यह पता चल पाता है की किसने कौन से उत्पाद को कितना बेचा है।

3. कंज्यूमर या ग्राहक

कंज्यूमर या ग्राहक हर तरह के बिजनेस का एक प्रमुख घटक है इसलिए Affiliate Marketing की यह प्रणाली भी ग्राहक के चारों ओर ही घूमती हुई नज़र आती है। वह इसलिए क्योंकि यदि एफिलिएट मार्केटर ग्राहकों को सामान बेचने में असफल रहा तो उसे किसी प्रकार का कोई कमीशन पारिश्रमिक के तौर पर नहीं मिलता है। यही कारण है की मार्केटर द्वारा ग्राहकों को रिझाने एवं अपनी बिक्री बढाने के लिए अनेकों तरीके अपनाये जाते हैं। बहुत सारे मार्केटर तो फेसबुक एवं गूगल में पेड विज्ञापन भी चलाते हैं ताकि वे ऐसे लोगन तक पहुँच सकें जो उस तरह का वह उत्पाद खरीदना चाहते हैं ।

4. एफिलिएट नेटवर्क

एफिलिएट मार्केटिंग के माध्यम से अपना उत्पाद या सेवा बेचने के लिए जरुरी नहीं है की हर मर्चेंट या एडवरटाइजर एफिलिएट नेटवर्क नेटवर्क का ही सहारा ले । कुछ कम्पनियाँ ऐसी भी होती हैं जो अपना खुद का एफिलिएट प्रोग्राम खुद के वेबसाइट के माध्यम से ही रजिस्टर कराने की सुविधा प्रदान करते हैं।

इसलिए सम्पूर्ण मोनिटरिंग भी वे खुद ही करते हैं कुछ कम्पनियाँ एफिलिएट नेटवर्क के माध्यम से भी मार्केटर को अपने साथ जोड़ती हैं। और चूँकि यह मार्केटर एवं मर्चेंट के बीच मध्यस्थता प्रदान करता है  इसलिए Affiliate Marketing के घटक के तौर पर इसे भी शामिल किया गया है। वर्तमान में कुछ मुख्य एफिलिएट नेटवर्क क्लिक बैंक, कमीशन जंक्शन इत्यादि मौजूद हैं।  

एफिलिएट मार्केटिंग प्रणाली कैसे काम करती है  

ऐसे बहुत सारे लोग जो इस तरह का यह काम करने के इच्छुक तो होते हैं लेकिन उनके दिमाग में कहीं न कहीं किन्तु परन्तु भी चलता रहता है। और इसी किन्तु परन्तु से एक प्रश्न उनके दिमाग में यह भी उठता है की मर्चेंट या एडवरटाइजर को कैसे पता चलता है की किस मार्केटर ने कौन से उत्पाद और कितनी बिक्री की है। और उन्हें उनके पैसे कब और किस तरह से मिलेंगे। अर्थात वे लोग Affiliate Marketing की कार्य प्रणाली को जानना चाहते हैं की यह कार्य कैसे करती है।

तो आगे हम यह बात स्पष्ट कर देना चाहेंगे की दुनियां में एक नहीं बल्कि ऐसे हजारों लाखों मर्चेंट हैं जो एक नहीं बल्कि अनेकों उत्पाद बेचते हैं। यही कारण है की उन्होंने अपने उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री बढाने के लिए एफिलिएट मार्केटिंग प्रणाली विकसित की हुई होती है। यह इस तरह से विकसित की हुई होती है की प्रत्येक रजिस्टर करने वाले व्यक्ति को अलग अलग एफिलिएट लिंक स्वत ही जारी हो जाते हैं।

अब एफिलिएट मार्केटर को अपने इसी लिंक को अपनी वेबसाइट, ब्लॉग, सोशल मीडिया, विज्ञापन इत्यादि के माध्यम से प्रमोट करना होता है ताकि जब कोई भी ग्राहक उस लिंक पर क्लीक करे तो उसका एफिलिएट लिंक ही ओपन हो। उस लिंक के माध्यम से जब भी किसी व्यक्ति द्वारा कोई भी उत्पाद या सेवा खरीदी जाती है तो उद्यमी को इसकी ईमेल एवं उसके एफिलिएट अकाउंट के माध्यम से पता चल जाता है और उस पर जो भी कमीशन मिलता है वह उसके खाते में आ जाता है ।

उसके बाद उद्यमी उसे अपने बैंक अकाउंट में आसानी से ट्रान्सफर कर सकता है। उद्यमी चाहे तो अपनी कुशलता एवं कार्यक्षमता के अनुसार कितने भी उत्पादों का चयन एफिलिएट करने के लिए कर सकता है। जैसे यदि कोई टेक ब्लॉगर है तो वह वेब होस्टिंग, प्लगइन, सॉफ्टवेर इत्यादि की Affiliate Marketing कर सकता है । 

एफिलिएट मार्केटिंग कैसे शुरू करें (How to Start Affiliate Marketing)

वैसे यदि आप हमारा यह लेख पहले से बड़े ध्यान एवं एकाग्र होकर पढ़ रहे होंगे तो हमारे ख्याल से अब तक आपको पता चल गया होगा की Affiliate marketing शुरू करने के लिए व्यक्ति के पास स्वयं का ब्लॉग या कोई वेबसाइट होनी बेहद जरुरी है। क्योंकि जब व्यक्ति एफिलिएट मार्केटिंग के लिए रजिस्टर कर रहा होता है तब उसे अपनी वेबसाइट या ब्लॉग का लिंक देने की नितांत आवश्यकता होती है।

यद्यपि बहुत सारे लोगों को लगता है की वे सोशल मीडिया में अपना एफिलिएट लिंक शेयर करके भी उत्पाद एवं सेवा बेचकर कमाई कर सकते हैं। लेकिन सोशल मीडिया का लिंक देने पर व्यक्ति को एफिलिएट करने की स्वीकृति कम ही दी जाती है। इसलिए उद्यमी को चाहिए की वह खुद का ब्लॉग या वेबसाइट बनाने एवं उसमें कम से कम जब तक प्रतिदिन लगभग पांच सौ विजिटर आना शुरू न कर दें। तब तक किसी भी प्लेटफोर्म के माध्यम से एफिलिएट के लिए रजिस्टर न करें।

वह इसलिए क्योंकि मर्चेंट या एफिलिएट नेटवर्क उद्यमी द्वारा दी गई वेबसाइट का पूरा रिव्यु करने के बाद ही एफिलिएट एप्लीकेशन को स्वीकृत या अस्वीकृत करते हैं। और Affiliate Marketing करने के लिए उत्पादों का चुनाव करते समय इस बात पर विशेष ध्यान देन की जो आपके ब्लॉग का विषय हो उसी के अनुकूल ही आप उत्पादों का चयन करें जैसे यदि आप कोई हेल्थ ब्लॉग चलाते हैं तो आप मिनरल, विटामिन इत्यादि उत्पादों को एफिलिएट के माध्यम से बेच सकते हैं।

जहाँ तक ब्लॉग या वेबसाइट बनाने की बात है इच्छुक व्यक्ति इसे 7-10 हज़ार रूपये खर्च करके किसी वेब डेवलपर के माध्यम से आसानी से बना सकता है। इसके अलावा वर्डप्रेस, ब्लॉगर के माध्यम से मुफ्त में भी ब्लॉग शुरू कलर सकता है लेकिन इसके लिए व्यक्ति को इसकी जानकारी होनी चाहिए। और यदि आप पहले से कोई टेक ब्लॉगर हैं तो आप सॉफ्टवेर, वेब होस्टिंग, डोमेन इत्यादि उत्पादों के लिए एफिलिएट कर सकते हैं।

यदि उत्पाद विषय के अनुकूल नहीं हुआ तो इसके नुकसान ही नुकसान हैं। पहला नुकसान यह है की आपके नियमित पाठक जब विषय से हटकर एफिलिएट लिंक आपके ब्लॉग पर देखेंगे तो उनका आप पर विश्वास कम होता जायेगा । जिससे आपके ब्लॉग के विजिटर में कमी आ सकती है । दूसरा नुकसान यह है की आपका उत्पाद बिकेगा नहीं क्योंकि उस उत्पाद के लिए आपके ब्लॉग पर आने वाले विजिटर टारगेट ग्राहक नहीं है। इसलिए ध्यान रहे Affiliate Marketing में उत्पाद या सेवा ब्लॉग के विषय के अनुकूल होनी परम आवश्यक है ।

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